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MK Stalin: शादी के कुछ महीने बाद जेल में पिटाई, फिर कैसा रहा कैदी से तमिलनाडु के मुख्यमंत्री तक का सफर

MK Stalin Political Journey: आपातकाल के दौरान गिरफ़्तारी और उसके बाद के घटनाक्रम से उन्हें एक नई पहचान मिली. वह तमिलनाडु के संघर्षशील नेताओं में शुमार हो गए.

Written By: JP YADAV
Last Updated: 2026-03-24 17:47:20

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MK Stalin Political Journey: तमिलनाडु विधानसभा चुनाव 2026 के लिए चुनाव प्रचार जोर पकड़ने वाला है. आगामी 23 अप्रैल को मतदान होगा, जबकि मतगणना 4 मई 2026 को होगी.  2021 के विधानसभा चुनाव में शानदार प्रदर्शन करके सत्ता में आने वाली द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (DMK) को इस चुनाव से बड़ी उम्मीद है. विशेषज्ञ साफतौर पर मानकर चल रहे हैं कि अन्नाद्रमुक मुनेत्र कड़गम (AIDMK) जे. जयललिता के जाने से कमजोर हो चुकी है. AIDMK में अंदरूनी लड़ाई भी है. ऐसे में द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (DMK) तमिलनाडु की सत्ता में वापसी कर सकती है. डीएमके जीती तो तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एम के स्टालिन (MK Stalin) ही होंगे. इस स्टोरी में हम बताएंगे एमके स्टालिन की जीवन के रोचक पहलुओं को.

रोचक है स्टालिन नाम के पीछे की कहानी

एमके स्टालिन को हिंदी विरोधी नेता के तौर पर जाना जाता है. वह सालों बाद भी हिंदी का पुरजोर विरोध करते नजर आते हैं.  द्रविड़ आंदोलन के प्रमुख नेता और पूर्व मुख्यमंत्री एम. करुणानिधि के बेटे एमके स्टालिन को राजनीति विरासत में मिली, लेकिन उन्होंने अपने दमकर संघर्ष करके अपनी अलग जगह बनाई. 1 मार्च, 1953 को जन्मे एमके स्टालिन नाम ही बेहद रोचक है. मरहूम एम. करुणानिधि और उनकी दूसरी पत्नी दयालु अम्मल के घर एक मार्च, 1953 को बच्चे का जन्म हुआ. नाम पर विचार हो ही रहा था कि चार दिन बाद सोवियत नेता जोसेफ़ स्टालिन का निधन हो गया था. करुणानिधि ने अपने बेटे का स्टालिन रखा, जो एमके स्टालिन के नाम से जाने जाते हैं. एमके मुथु और एमके अलागिरी के बाद वह करुणानिधि के तीसरे बेटे हैं. 

कम उम्र में चुन ली सार्वजनिक जीवन की राह

एमके स्टालिन ने सिर्फ 15 साल की उम्र में राजनीति में दिलचस्पी लेनी शुरू कर दी थी. वर्ष 1968 में हुए चेन्नई  निगम चुनाव में डीएमके के कैंडिडेट के लिए प्रचार किया था. उनकी सक्रियता देखने लायक थी. उन्होंने सार्वजनिक आयोजनों में शामिल होना डीएमके की बैठकों में जानदार भाषण देने लगे थे. उनके भाषण जोशीले और युवाओं को आकर्षित करने वाले होते थे.  1975 में वह सिर्फ 22 वर्ष के रहे होंगे. उन्होंने आपातकाल के खिलाफ आंदोलन में हिस्सा लिया. उनकी गिरफ्तारी ने उन्हें राज्यभर में पहचान दिला दी. आपातकाल के दौरान एमके स्टालिन की छवि एक जुझारू नेता के रूप में हो चुकी थी. एक साल जेल में रहने के बाद एमके स्टालिन को 23 जनवरी, 1977 को रिहा कर दिया गया. बताया जाता है कि जेल में रहने के दौरान उनके साथ मारपीट भी की गई. 

बनाई अलग पहचान 

डीएमके की युवा इकाई में उन्होंने सक्रिय भूमिका निभाई. 20 जून, 1980 को डीएमके की युवा इकाई को आधिकारिक तौर पर लॉन्च किया गया. इस दौरान एमके स्टालिन को उसका नेता नियुक्त किया गया. तमिलनाडु की राजनीति में एक्टिव हुए एमके स्टालिन की नई पहचान बनी, क्योंकि जेल जाने से पहले तक डीएमके के सदस्य उन्हें सिर्फ़ करुणानिधि के बेटे के तौर पर जानते थे. बतौर युवा विंग में सक्रिय भूमिका निभाते हुए उन्होंने डीएमके के संगठन को जमीनी स्तर पर मजबूत किया.  इसका फायदा डीएमके को विधानसभा चुनाव के दौरान होता था. 

बतौर कलाकार भी एमके स्टालिन की पहचान है. पिता एम करुणानिधि तमिल फिल्मों में बतौर स्क्रिप्ट राइटर बहुत सफल थे. एमके स्टालिन की रुचि भी कला के क्षेत्र में जागी. करियर देखा जाए तो एमके अपने पिता की तुलना में कहीं नहीं ठहरते हैं. बावजूद इसके एमके स्टालिन ने ओरे राथम और मक्कल अयनायितल समेत कई फ़िल्मों में काम किया. अभिनय करियर की बात करें तो कुरिन्जी मलार और सूर्या जैसे टेलीविजन धारावाहिकों में भी उन्होंने अपने अभिनय की गहरी छाप छोड़ी. यह अलग बात है कि जल्द ही उनका अभिनय की दुनिया से मोहभंग हो गया. 

आखिरकार बने मुख्यमंत्री 

डीएमके की 2011 के विधानसभा चुनाव में हार हुी. इसके बाद 2014 के संसदीय चुनाव और फिर 2016 के विधानसभा चुनाव में भी डीएमके का प्रदर्शन खराब रहा. वर्ष 2015 में एम करुणानिधि की सेहरत खराब रहने लगी थी. उन्होंने खुद को सार्वजनिक जीवन से मुक्त किया. इसके साथ ही एमके स्टालिन को डीएमके का कार्यकारी नेता बना दिया गया. वर्ष 2018 में करुणानिधि के निधन के बाद वर्ष 2019 का आम चुनाव पार्टी एमके स्टालिन की अगुवाई में लड़ा गया. इस चुनाव में 38 निर्वाचन क्षेत्रों में से डीएम को 37 में जीत मिली. इससे पहले वर्ष 1996 में वह चेन्नई के मेयर चुने गए. यहां काम करने के दौरान उन्होंने प्रशासनिक क्षमता का परिचय दिया.

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MK Stalin Political Journey: तमिलनाडु विधानसभा चुनाव 2026 के लिए चुनाव प्रचार जोर पकड़ने वाला है. आगामी 23 अप्रैल को मतदान होगा, जबकि मतगणना 4 मई 2026 को होगी.  2021 के विधानसभा चुनाव में शानदार प्रदर्शन करके सत्ता में आने वाली द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (DMK) को इस चुनाव से बड़ी उम्मीद है. विशेषज्ञ साफतौर पर मानकर चल रहे हैं कि अन्नाद्रमुक मुनेत्र कड़गम (AIDMK) जे. जयललिता के जाने से कमजोर हो चुकी है. AIDMK में अंदरूनी लड़ाई भी है. ऐसे में द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (DMK) तमिलनाडु की सत्ता में वापसी कर सकती है. डीएमके जीती तो तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एम के स्टालिन (MK Stalin) ही होंगे. इस स्टोरी में हम बताएंगे एमके स्टालिन की जीवन के रोचक पहलुओं को.

रोचक है स्टालिन नाम के पीछे की कहानी

एमके स्टालिन को हिंदी विरोधी नेता के तौर पर जाना जाता है. वह सालों बाद भी हिंदी का पुरजोर विरोध करते नजर आते हैं.  द्रविड़ आंदोलन के प्रमुख नेता और पूर्व मुख्यमंत्री एम. करुणानिधि के बेटे एमके स्टालिन को राजनीति विरासत में मिली, लेकिन उन्होंने अपने दमकर संघर्ष करके अपनी अलग जगह बनाई. 1 मार्च, 1953 को जन्मे एमके स्टालिन नाम ही बेहद रोचक है. मरहूम एम. करुणानिधि और उनकी दूसरी पत्नी दयालु अम्मल के घर एक मार्च, 1953 को बच्चे का जन्म हुआ. नाम पर विचार हो ही रहा था कि चार दिन बाद सोवियत नेता जोसेफ़ स्टालिन का निधन हो गया था. करुणानिधि ने अपने बेटे का स्टालिन रखा, जो एमके स्टालिन के नाम से जाने जाते हैं. एमके मुथु और एमके अलागिरी के बाद वह करुणानिधि के तीसरे बेटे हैं. 

कम उम्र में चुन ली सार्वजनिक जीवन की राह

एमके स्टालिन ने सिर्फ 15 साल की उम्र में राजनीति में दिलचस्पी लेनी शुरू कर दी थी. वर्ष 1968 में हुए चेन्नई  निगम चुनाव में डीएमके के कैंडिडेट के लिए प्रचार किया था. उनकी सक्रियता देखने लायक थी. उन्होंने सार्वजनिक आयोजनों में शामिल होना डीएमके की बैठकों में जानदार भाषण देने लगे थे. उनके भाषण जोशीले और युवाओं को आकर्षित करने वाले होते थे.  1975 में वह सिर्फ 22 वर्ष के रहे होंगे. उन्होंने आपातकाल के खिलाफ आंदोलन में हिस्सा लिया. उनकी गिरफ्तारी ने उन्हें राज्यभर में पहचान दिला दी. आपातकाल के दौरान एमके स्टालिन की छवि एक जुझारू नेता के रूप में हो चुकी थी. एक साल जेल में रहने के बाद एमके स्टालिन को 23 जनवरी, 1977 को रिहा कर दिया गया. बताया जाता है कि जेल में रहने के दौरान उनके साथ मारपीट भी की गई. 

बनाई अलग पहचान 

डीएमके की युवा इकाई में उन्होंने सक्रिय भूमिका निभाई. 20 जून, 1980 को डीएमके की युवा इकाई को आधिकारिक तौर पर लॉन्च किया गया. इस दौरान एमके स्टालिन को उसका नेता नियुक्त किया गया. तमिलनाडु की राजनीति में एक्टिव हुए एमके स्टालिन की नई पहचान बनी, क्योंकि जेल जाने से पहले तक डीएमके के सदस्य उन्हें सिर्फ़ करुणानिधि के बेटे के तौर पर जानते थे. बतौर युवा विंग में सक्रिय भूमिका निभाते हुए उन्होंने डीएमके के संगठन को जमीनी स्तर पर मजबूत किया.  इसका फायदा डीएमके को विधानसभा चुनाव के दौरान होता था. 

बतौर कलाकार भी एमके स्टालिन की पहचान है. पिता एम करुणानिधि तमिल फिल्मों में बतौर स्क्रिप्ट राइटर बहुत सफल थे. एमके स्टालिन की रुचि भी कला के क्षेत्र में जागी. करियर देखा जाए तो एमके अपने पिता की तुलना में कहीं नहीं ठहरते हैं. बावजूद इसके एमके स्टालिन ने ओरे राथम और मक्कल अयनायितल समेत कई फ़िल्मों में काम किया. अभिनय करियर की बात करें तो कुरिन्जी मलार और सूर्या जैसे टेलीविजन धारावाहिकों में भी उन्होंने अपने अभिनय की गहरी छाप छोड़ी. यह अलग बात है कि जल्द ही उनका अभिनय की दुनिया से मोहभंग हो गया. 

आखिरकार बने मुख्यमंत्री 

डीएमके की 2011 के विधानसभा चुनाव में हार हुी. इसके बाद 2014 के संसदीय चुनाव और फिर 2016 के विधानसभा चुनाव में भी डीएमके का प्रदर्शन खराब रहा. वर्ष 2015 में एम करुणानिधि की सेहरत खराब रहने लगी थी. उन्होंने खुद को सार्वजनिक जीवन से मुक्त किया. इसके साथ ही एमके स्टालिन को डीएमके का कार्यकारी नेता बना दिया गया. वर्ष 2018 में करुणानिधि के निधन के बाद वर्ष 2019 का आम चुनाव पार्टी एमके स्टालिन की अगुवाई में लड़ा गया. इस चुनाव में 38 निर्वाचन क्षेत्रों में से डीएम को 37 में जीत मिली. इससे पहले वर्ष 1996 में वह चेन्नई के मेयर चुने गए. यहां काम करने के दौरान उन्होंने प्रशासनिक क्षमता का परिचय दिया.

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