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भारत में धूरंधर जैसी जासूसी, ई रिक्शा चलाने से लेकर पंचर बनाने तक निकले गद्दार! 22 लोग गिरफ्तार

Ghaziabad हर असाइनमेंट के बदले युवाओं को 5,000 से 20,000 रुपये तक दिए जाते थे. रकम इतनी थी कि गरीब और बेरोजगार युवाओं को आसानी से फंसाया जा सके.खास बात यह रही कि नेटवर्क में ऐसे युवाओं को टारगेट किया गया. इसमें मोबाइल रिपेयर शॉप में काम करने वाले,CCTV टेक्नीशियन और बेसिक नेटवर्किंग जानने वाले को टारगेट बनाया गया है,महिलाओं और नाबालिगों को भी इसमे शामिल किया गया है.

Written By: Divyanshi Singh
Last Updated: March 24, 2026 15:18:56 IST

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Ghaziabad: उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद के कौशांबी थाने से शुरू हुई एक मामूली इंटेलिजेंस सूचना ने देश की सुरक्षा से जुड़े बड़े खतरे का खुलासा कर दिया है. शुरुआत में यह मामला कुछ युवाओं की संदिग्ध गतिविधियों तक सीमित लगा लेकिन जांच आगे बढ़ने पर यह पाकिस्तान से संचालित एक संगठित जासूसी नेटवर्क निकला जो भारत में बड़े आतंकी हमले की तैयारी में जुटा था. अब तक इस मामले में 22 लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है जिनमें कई नाबालिग भी शामिल हैं. जांच एजेंसियों का मानना है कि यह कोई स्थानीय गैंग नहीं, बल्कि देशभर में फैला हुआ एक सुनियोजित नेटवर्क है. 

गाजियाबाद पुलिस द्वारा नौशाद अली, मीरा और एक नाबालिग की गिरफ्तारी के साथ पाकिस्तान से जुड़े जासूसी मॉड्यूल में संदिग्धों की कुल संख्या 22 हो गई है, जिसमें छह नाबालिग शामिल हैं. नौशाद जो मूल रूप से बिहार का रहने वाला है और फरीदाबाद में टायर पंक्चर की दुकान चलाता है पर सोशल मीडिया के ज़रिए टेक्निकल स्किल वाले नौजवानों को भर्ती करने का आरोप है. मीरा जिसे पहले हथियारों की तस्करी के लिए गिरफ्तार किया गया था ने कथित तौर पर शक से बचने के लिए भर्ती के लिए महिलाओं को टारगेट किया जबकि हर काम के लिए 5,000 या उससे ज़्यादा का पेमेंट अनजान चैनलों के ज़रिए किया गया.

कैसे खुला मामला?

14 मार्च को पुलिस को सूचना मिली कि उत्तर प्रदेश के भोवापुर इलाके में कुछ युवक रेलवे स्टेशन और सैन्य ठिकानों की फोटो-वीडियो बनाकर विदेश भेज रहे हैं. जांच में सामने आया कि इन युवाओं को पैसे का लालच देकर यह काम कराया जा रहा था. पहली कार्रवाई में 6 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया जिनके मोबाइल फोन से ऐसे वीडियो, लोकेशन टैग और सैन्य ठिकानों की तस्वीरें मिलीं जिन्होंने जांच की दिशा ही बदल दी.

पाकिस्तान से मिल रहे थे निर्देश

जांच के लिए बनाई गई SIT (स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम) में इंदिरापुरम पुलिस, क्राइम ब्रांच, साइबर सेल और SWAT को शामिल किया गया. पूछताछ में सामने आया कि इस पूरे नेटवर्क को पाकिस्तान में बैठे हैंडलर्स चला रहे थे. जिसमें मुख्य नाम सुहैल मलिक,नौशाद अली, समीर उर्फ “शूटर” का सामने आया है. ये सोशल मीडिया और एन्क्रिप्टेड ऐप्स के जरिए युवाओं को निर्देश देते थे कहां वीडियो बनाना है, किस एंगल से शूट करना है और कब लोकेशन भेजनी है.

5 हजार में ‘देश की जासूसी’

हर असाइनमेंट के बदले युवाओं को 5,000 से 20,000 रुपये तक दिए जाते थे. रकम इतनी थी कि गरीब और बेरोजगार युवाओं को आसानी से फंसाया जा सके.खास बात यह रही कि नेटवर्क में ऐसे युवाओं को टारगेट किया गया. इसमें मोबाइल रिपेयर शॉप में काम करने वाले,CCTV टेक्नीशियन और  बेसिक नेटवर्किंग जानने वाले को टारगेट बनाया गया है,महिलाओं और नाबालिगों को भी इसमे शामिल किया गया है.

पुलवामा कनेक्शन और बड़ी साजिश

जांच में पता चला कि गिरफ्तार 6 में से 4 आरोपी पहले पुलवामा जा चुके थे और वहां से संवेदनशील जानकारी पाकिस्तान भेजी थी. एजेंसियों का मानना है कि यह नेटवर्क सिर्फ जासूसी नहीं कर रहा था, बल्कि जम्मू-कश्मीर में बड़े आतंकी हमले की तैयारी कर रहा था. सबसे चौंकाने वाला खुलासा यह हुआ कि आरोपी दिल्ली से जम्मू तक रेलवे कॉरिडोर पर सोलर-पावर्ड CCTV कैमरे लगाने की योजना बना रहे थे ताकि सेना की मूवमेंट की लाइव स्ट्रीमिंग पाकिस्तान तक हो सके. दिल्ली कैंटोनमेंट और सोनीपत में ऐसे कैमरे पहले ही लगाए जा चुके थे. जांच में करीब 50 संभावित टारगेट लोकेशन की लिस्ट सामने आई है.

OTP और SIM कार्ड रैकेट

इस केस के साथ एक बड़ा OTP और SIM कार्ड रैकेट भी जुड़ा मिला है. आरोपी भारतीय मोबाइल नंबरों के OTP विदेश भेजते थे, जिससे पाकिस्तान में बैठे लोग भारतीय नंबरों से व्हाट्सऐप और सोशल मीडिया अकाउंट चला सकें. SIM कार्ड हासिल करने के लिए फर्जी आईडी, फिशिंग और प्री-एक्टिवेटेड सिम का इस्तेमाल किया जाता था. पैसों का लेनदेन UPI के जरिए होता था, लेकिन ट्रैकिंग से बचने के लिए जन सेवा केंद्रों और छोटे दुकानों के माध्यम से कैश निकाल लिया जाता था.

मल्टी-स्टेट ऑपरेशन

जांच के दौरान 20 मार्च को नौ और लोगों को गिरफ्तार किया गया, जिनमें पांच नाबालिग थे. इस नेटवर्क के तार बिहार, महाराष्ट्र और नेपाल तक जुड़े मिले, जिससे साफ हो गया कि यह कोई लोकल गैंग नहीं बल्कि मल्टी-स्टेट ऑपरेशन है. 22 मार्च को फरीदाबाद से नौशाद अली उर्फ लालू को गिरफ्तार किया गया, जो एक पेट्रोल पंप पर पंचर बनाने का काम करता था. उसके साथ मथुरा की एक ई-रिक्शा चालक महिला और एक नाबालिग को भी हिरासत में लिया गया. महिला के पाकिस्तान में बैठे सरफराज उर्फ सरदार से संपर्क होने की बात सामने आई है.

फिलहाल समीर उर्फ शूटर फरार है और जांच एजेंसियों का मानना है कि वही इस पूरे नेटवर्क की सबसे अहम कड़ी है. इस मामले में NIA, ATS और यूपी, दिल्ली व हरियाणा पुलिस मिलकर जांच कर रही हैं. एजेंसियां अब आरोपियों को उन सभी जगहों पर ले जाकर पूरी साजिश की कड़ियों को जोड़ने में जुटी हैं, जहां कैमरे लगाए गए, वीडियो शूट किए गए और सिम कार्ड खरीदे गए.

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Written By: Divyanshi Singh
Last Updated: March 24, 2026 15:18:56 IST

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Ghaziabad: उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद के कौशांबी थाने से शुरू हुई एक मामूली इंटेलिजेंस सूचना ने देश की सुरक्षा से जुड़े बड़े खतरे का खुलासा कर दिया है. शुरुआत में यह मामला कुछ युवाओं की संदिग्ध गतिविधियों तक सीमित लगा लेकिन जांच आगे बढ़ने पर यह पाकिस्तान से संचालित एक संगठित जासूसी नेटवर्क निकला जो भारत में बड़े आतंकी हमले की तैयारी में जुटा था. अब तक इस मामले में 22 लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है जिनमें कई नाबालिग भी शामिल हैं. जांच एजेंसियों का मानना है कि यह कोई स्थानीय गैंग नहीं, बल्कि देशभर में फैला हुआ एक सुनियोजित नेटवर्क है. 

गाजियाबाद पुलिस द्वारा नौशाद अली, मीरा और एक नाबालिग की गिरफ्तारी के साथ पाकिस्तान से जुड़े जासूसी मॉड्यूल में संदिग्धों की कुल संख्या 22 हो गई है, जिसमें छह नाबालिग शामिल हैं. नौशाद जो मूल रूप से बिहार का रहने वाला है और फरीदाबाद में टायर पंक्चर की दुकान चलाता है पर सोशल मीडिया के ज़रिए टेक्निकल स्किल वाले नौजवानों को भर्ती करने का आरोप है. मीरा जिसे पहले हथियारों की तस्करी के लिए गिरफ्तार किया गया था ने कथित तौर पर शक से बचने के लिए भर्ती के लिए महिलाओं को टारगेट किया जबकि हर काम के लिए 5,000 या उससे ज़्यादा का पेमेंट अनजान चैनलों के ज़रिए किया गया.

कैसे खुला मामला?

14 मार्च को पुलिस को सूचना मिली कि उत्तर प्रदेश के भोवापुर इलाके में कुछ युवक रेलवे स्टेशन और सैन्य ठिकानों की फोटो-वीडियो बनाकर विदेश भेज रहे हैं. जांच में सामने आया कि इन युवाओं को पैसे का लालच देकर यह काम कराया जा रहा था. पहली कार्रवाई में 6 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया जिनके मोबाइल फोन से ऐसे वीडियो, लोकेशन टैग और सैन्य ठिकानों की तस्वीरें मिलीं जिन्होंने जांच की दिशा ही बदल दी.

पाकिस्तान से मिल रहे थे निर्देश

जांच के लिए बनाई गई SIT (स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम) में इंदिरापुरम पुलिस, क्राइम ब्रांच, साइबर सेल और SWAT को शामिल किया गया. पूछताछ में सामने आया कि इस पूरे नेटवर्क को पाकिस्तान में बैठे हैंडलर्स चला रहे थे. जिसमें मुख्य नाम सुहैल मलिक,नौशाद अली, समीर उर्फ “शूटर” का सामने आया है. ये सोशल मीडिया और एन्क्रिप्टेड ऐप्स के जरिए युवाओं को निर्देश देते थे कहां वीडियो बनाना है, किस एंगल से शूट करना है और कब लोकेशन भेजनी है.

5 हजार में ‘देश की जासूसी’

हर असाइनमेंट के बदले युवाओं को 5,000 से 20,000 रुपये तक दिए जाते थे. रकम इतनी थी कि गरीब और बेरोजगार युवाओं को आसानी से फंसाया जा सके.खास बात यह रही कि नेटवर्क में ऐसे युवाओं को टारगेट किया गया. इसमें मोबाइल रिपेयर शॉप में काम करने वाले,CCTV टेक्नीशियन और  बेसिक नेटवर्किंग जानने वाले को टारगेट बनाया गया है,महिलाओं और नाबालिगों को भी इसमे शामिल किया गया है.

पुलवामा कनेक्शन और बड़ी साजिश

जांच में पता चला कि गिरफ्तार 6 में से 4 आरोपी पहले पुलवामा जा चुके थे और वहां से संवेदनशील जानकारी पाकिस्तान भेजी थी. एजेंसियों का मानना है कि यह नेटवर्क सिर्फ जासूसी नहीं कर रहा था, बल्कि जम्मू-कश्मीर में बड़े आतंकी हमले की तैयारी कर रहा था. सबसे चौंकाने वाला खुलासा यह हुआ कि आरोपी दिल्ली से जम्मू तक रेलवे कॉरिडोर पर सोलर-पावर्ड CCTV कैमरे लगाने की योजना बना रहे थे ताकि सेना की मूवमेंट की लाइव स्ट्रीमिंग पाकिस्तान तक हो सके. दिल्ली कैंटोनमेंट और सोनीपत में ऐसे कैमरे पहले ही लगाए जा चुके थे. जांच में करीब 50 संभावित टारगेट लोकेशन की लिस्ट सामने आई है.

OTP और SIM कार्ड रैकेट

इस केस के साथ एक बड़ा OTP और SIM कार्ड रैकेट भी जुड़ा मिला है. आरोपी भारतीय मोबाइल नंबरों के OTP विदेश भेजते थे, जिससे पाकिस्तान में बैठे लोग भारतीय नंबरों से व्हाट्सऐप और सोशल मीडिया अकाउंट चला सकें. SIM कार्ड हासिल करने के लिए फर्जी आईडी, फिशिंग और प्री-एक्टिवेटेड सिम का इस्तेमाल किया जाता था. पैसों का लेनदेन UPI के जरिए होता था, लेकिन ट्रैकिंग से बचने के लिए जन सेवा केंद्रों और छोटे दुकानों के माध्यम से कैश निकाल लिया जाता था.

मल्टी-स्टेट ऑपरेशन

जांच के दौरान 20 मार्च को नौ और लोगों को गिरफ्तार किया गया, जिनमें पांच नाबालिग थे. इस नेटवर्क के तार बिहार, महाराष्ट्र और नेपाल तक जुड़े मिले, जिससे साफ हो गया कि यह कोई लोकल गैंग नहीं बल्कि मल्टी-स्टेट ऑपरेशन है. 22 मार्च को फरीदाबाद से नौशाद अली उर्फ लालू को गिरफ्तार किया गया, जो एक पेट्रोल पंप पर पंचर बनाने का काम करता था. उसके साथ मथुरा की एक ई-रिक्शा चालक महिला और एक नाबालिग को भी हिरासत में लिया गया. महिला के पाकिस्तान में बैठे सरफराज उर्फ सरदार से संपर्क होने की बात सामने आई है.

फिलहाल समीर उर्फ शूटर फरार है और जांच एजेंसियों का मानना है कि वही इस पूरे नेटवर्क की सबसे अहम कड़ी है. इस मामले में NIA, ATS और यूपी, दिल्ली व हरियाणा पुलिस मिलकर जांच कर रही हैं. एजेंसियां अब आरोपियों को उन सभी जगहों पर ले जाकर पूरी साजिश की कड़ियों को जोड़ने में जुटी हैं, जहां कैमरे लगाए गए, वीडियो शूट किए गए और सिम कार्ड खरीदे गए.

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