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‘माफ़ करते हुए… अब जाओ’, इच्छामृत्यु की मंजूरी के बाद हरीश राणा की अंतिम विदाई की तैयारी, 22 सेकंड का वीडियो कर देगा आंखें नम

हरीश राणा इच्छा मृत्यु केस: हरीश पिछले लगभग 13 सालों से बिस्तर पर थे और कोमा की हालत में थे, AIIMS द्वारा सौंपी गई मेडिकल रिपोर्ट के आधार पर, सुप्रीम कोर्ट ने इच्छा-मृत्यु की याचिका पर अपना फ़ैसला सुनाया और हरीश को इच्छा मृत्यु की मंजूरी मिल गई. अब सोशल मीडिया पर उनके अंतिम विदाई का वीडियो वायरल हो रहा है.

Written By: Shristi S
Last Updated: 2026-03-15 23:59:11

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Harish Rana Passive Euthanasia Case: सुप्रीम कोर्ट ने भारत में पहले इच्छा -मृत्यु की याचिका को मंजूरी दे दी है, जिसके बाद अब गाजियाबाद के हरीश राणा का ‘लाइफ़ सपोर्ट सिस्टम’ अब हटा दिया गया है, और उन्हें इस दुनिया से विदा करने की तैयारियां चल रही हैं. इस घटना से जुड़ा एक बेहद भावुक वीडियो इस समय सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है, जिसमें उनकी अंतिम विदाई की तैयारियाँ दिखाई गई हैं.
 
हरीश राणा को उनके घर से दिल्ली स्थित AIIMS में शिफ़्ट कर दिया गया है. यहां, डॉक्टरों की एक विशेष टीम सुप्रीम कोर्ट के आदेशों के अनुसार ‘पैसिव यूथेनेशिया’ (इच्छा-मृत्यु) की प्रक्रिया को आगे बढ़ा रही है. हरीश पिछले लगभग 13 सालों से बिस्तर पर थे और कोमा की हालत में थे; डॉक्टरों के अनुसार, अब उनके ठीक होने की कोई गुंजाइश नहीं बची थी. इस स्थिति को देखते हुए, और AIIMS द्वारा सौंपी गई मेडिकल रिपोर्ट के आधार पर, सुप्रीम कोर्ट ने इच्छा-मृत्यु की याचिका पर अपना फ़ैसला सुनाया. कोर्ट ने निर्देश दिया कि उनके जीवन के अंतिम पलों से जुड़ी मेडिकल प्रक्रियाएं AIIMS में पूरी गरिमा के साथ की जाएं.
 

वायरल वीडियो में क्या दिखाया गया है?

सोशल मीडिया पर इस समय वायरल हो रहे 22-सेकंड के वीडियो ने इसे देखने वाले हर व्यक्ति को अंदर तक झकझोर दिया है. वीडियो में, हरीश राणा अपने बिस्तर पर लेटे हुए दिखाई दे रहे हैं, और उनकी नजरें एकटक ऊपर की ओर टिकी हुई हैं. जहां उनकी आँखों में गहरा दुख साफ़ झलक रहा है, वहीं उनके चेहरे पर एक अजीब सी शांति भी दिखाई दे रही है.



 
इस क्लिप में, एक महिला उनके माथे पर चंदन का तिलक लगाती हुई दिखाई दे रही है. उस पल में, हरीश के चेहरे पर सालों का दर्द और तकलीफ़ साफ़ तौर पर झलक रही थी; फिर भी, साथ ही, ऐसा लग रहा था मानो उसे एहसास हो गया हो कि आखिरकार उसे उस दर्द से मुक्ति मिलने वाली है जिसे उसने इतने लंबे समय तक सहा था. हरीश के सिर पर धीरे से हाथ फेरते हुए एक महिला ने उससे कहा कि सबको माफ़ करते हुए… और सबसे माफ़ी मांगते हुए… अब, जाओ. इस दृश्य ने सोशल मीडिया पर कई लोगों की आँखों में आँसू ला दिए.
 

हरीश राणा की कहानी क्या है?

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, लगभग 13 साल पहले जब हरीश राणा चंडीगढ़ में पढ़ाई कर रहे थे, तब उनका एक एक्सीडेंट हो गया था. बताया जाता है कि वह अपने हॉस्टल की बिल्डिंग से गिर गए थे, जिससे उन्हें गंभीर चोटें आईं और वह कोमा जैसी स्थिति में चले गए. इतने लंबे समय तक बिस्तर पर पड़े रहने के कारण, बाद में उन्हें स्वास्थ्य संबंधी कई जटिल परेशानियां हो गईं.
 
उनके परिवार ने इन सभी वर्षों में उनकी देखभाल करने में कोई कसर नहीं छोड़ी; हालांकि, डॉक्टरों ने यह साफ़ कर दिया था कि उनके ठीक होने की अब लगभग कोई उम्मीद नहीं बची है. आखिरकार, इस स्थिति को देखते हुए, परिवार ने कोर्ट से इच्छामृत्यु (euthanasia) की अनुमति के लिए याचिका दायर की. मेडिकल रिपोर्ट्स और मौजूदा परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए, सुप्रीम कोर्ट ने ‘पैसिव इच्छामृत्यु’ की अनुमति दे दी, जिससे हरीश को अपने लंबे समय से चले आ रहे कष्टों से मुक्ति मिल सकी.
 

पैसिव यूथेनेशिया क्या है?

यूथेनेशिया (इच्छा-मृत्यु) एक ऐसी स्थिति को कहते हैं जिसमें किसी गंभीर और लाइलाज बीमारी से पीड़ित व्यक्ति से ‘लाइफ़ सपोर्ट’ (जीवन-रक्षक उपचार) हटा लिया जाता है, ताकि उसे असहनीय दर्द से राहत मिल सके. आम तौर पर, इसे दो श्रेणियों में बाँटा जाता है: एक्टिव और पैसिव. पैसिव यूथेनेशिया में, मरीज़ का मेडिकल इलाज या लाइफ़ सपोर्ट धीरे-धीरे हटा लिया जाता है, जिससे वह स्वाभाविक रूप से जीवन के अंतिम चरण की ओर बढ़ सके.
 

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Written By: Shristi S
Last Updated: 2026-03-15 23:59:11

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Harish Rana Passive Euthanasia Case: सुप्रीम कोर्ट ने भारत में पहले इच्छा -मृत्यु की याचिका को मंजूरी दे दी है, जिसके बाद अब गाजियाबाद के हरीश राणा का ‘लाइफ़ सपोर्ट सिस्टम’ अब हटा दिया गया है, और उन्हें इस दुनिया से विदा करने की तैयारियां चल रही हैं. इस घटना से जुड़ा एक बेहद भावुक वीडियो इस समय सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है, जिसमें उनकी अंतिम विदाई की तैयारियाँ दिखाई गई हैं.
 
हरीश राणा को उनके घर से दिल्ली स्थित AIIMS में शिफ़्ट कर दिया गया है. यहां, डॉक्टरों की एक विशेष टीम सुप्रीम कोर्ट के आदेशों के अनुसार ‘पैसिव यूथेनेशिया’ (इच्छा-मृत्यु) की प्रक्रिया को आगे बढ़ा रही है. हरीश पिछले लगभग 13 सालों से बिस्तर पर थे और कोमा की हालत में थे; डॉक्टरों के अनुसार, अब उनके ठीक होने की कोई गुंजाइश नहीं बची थी. इस स्थिति को देखते हुए, और AIIMS द्वारा सौंपी गई मेडिकल रिपोर्ट के आधार पर, सुप्रीम कोर्ट ने इच्छा-मृत्यु की याचिका पर अपना फ़ैसला सुनाया. कोर्ट ने निर्देश दिया कि उनके जीवन के अंतिम पलों से जुड़ी मेडिकल प्रक्रियाएं AIIMS में पूरी गरिमा के साथ की जाएं.
 

वायरल वीडियो में क्या दिखाया गया है?

सोशल मीडिया पर इस समय वायरल हो रहे 22-सेकंड के वीडियो ने इसे देखने वाले हर व्यक्ति को अंदर तक झकझोर दिया है. वीडियो में, हरीश राणा अपने बिस्तर पर लेटे हुए दिखाई दे रहे हैं, और उनकी नजरें एकटक ऊपर की ओर टिकी हुई हैं. जहां उनकी आँखों में गहरा दुख साफ़ झलक रहा है, वहीं उनके चेहरे पर एक अजीब सी शांति भी दिखाई दे रही है.



 
इस क्लिप में, एक महिला उनके माथे पर चंदन का तिलक लगाती हुई दिखाई दे रही है. उस पल में, हरीश के चेहरे पर सालों का दर्द और तकलीफ़ साफ़ तौर पर झलक रही थी; फिर भी, साथ ही, ऐसा लग रहा था मानो उसे एहसास हो गया हो कि आखिरकार उसे उस दर्द से मुक्ति मिलने वाली है जिसे उसने इतने लंबे समय तक सहा था. हरीश के सिर पर धीरे से हाथ फेरते हुए एक महिला ने उससे कहा कि सबको माफ़ करते हुए… और सबसे माफ़ी मांगते हुए… अब, जाओ. इस दृश्य ने सोशल मीडिया पर कई लोगों की आँखों में आँसू ला दिए.
 

हरीश राणा की कहानी क्या है?

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, लगभग 13 साल पहले जब हरीश राणा चंडीगढ़ में पढ़ाई कर रहे थे, तब उनका एक एक्सीडेंट हो गया था. बताया जाता है कि वह अपने हॉस्टल की बिल्डिंग से गिर गए थे, जिससे उन्हें गंभीर चोटें आईं और वह कोमा जैसी स्थिति में चले गए. इतने लंबे समय तक बिस्तर पर पड़े रहने के कारण, बाद में उन्हें स्वास्थ्य संबंधी कई जटिल परेशानियां हो गईं.
 
उनके परिवार ने इन सभी वर्षों में उनकी देखभाल करने में कोई कसर नहीं छोड़ी; हालांकि, डॉक्टरों ने यह साफ़ कर दिया था कि उनके ठीक होने की अब लगभग कोई उम्मीद नहीं बची है. आखिरकार, इस स्थिति को देखते हुए, परिवार ने कोर्ट से इच्छामृत्यु (euthanasia) की अनुमति के लिए याचिका दायर की. मेडिकल रिपोर्ट्स और मौजूदा परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए, सुप्रीम कोर्ट ने ‘पैसिव इच्छामृत्यु’ की अनुमति दे दी, जिससे हरीश को अपने लंबे समय से चले आ रहे कष्टों से मुक्ति मिल सकी.
 

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