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Harish Rana: अभी बेटे का दिल धड़क रहा है… हनुमानजी के भरोसे हरीश की मां, किसी चमत्कार का इंतजार

Harish Rana Update: हरीश राणा को शीर्ष अदालत से इच्छामृत्यु की मंजूरी मिलने के बाद एम्स के पैलिएटिव केयर वार्ड में डॉक्टरों ने धीरे-धीरे उनका वेंटिलेटर और फीडिंग ट्यूब हटा दी. बरसों तक मशीन के सहारे सांसें ले रहे हरीश अब अपने फेफड़ों से अंतिम सांसें ले रहे हैं. माता-पिता की आंखों के आंसू सूख चुके हैं, लेकिन बेटे का दर्द लगातार बढ़ता जा रहा है. मां अस्पताल में किसी अब भी किसी चमत्कार के इंतजार में हनुमान चालीसा का पाठ कर रही हैं.

Written By: Lalit Kumar
Last Updated: 2026-03-24 16:39:46

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Harish Rana Update: गाजियाबाद के हरीश राणा, जिन्हें दिल्ली एम्स में भर्ती कराया गया है. उनकी अप्रत्यक्ष इच्छामृत्यु की प्रक्रिया अब अंतिम चरण में पहुंच गई है. शीर्ष अदालत से इच्छामृत्यु की मंजूरी मिलने के बाद एम्स के पैलिएटिव केयर वार्ड में डॉक्टरों ने धीरे-धीरे उनका वेंटिलेटर और फीडिंग ट्यूब हटा दी. बरसों तक मशीन के सहारे सांसें ले रहे हरीश अब अपने फेफड़ों से अंतिम सांसें ले रहे हैं. बता दें कि, सुप्रीम कोर्ट ने मेडिकल बोर्ड की सिफारिशों के बाद उन्हें पैसिव यूथिनेशिया की अनुमति दे दी है. यह पहली बार है कि किसी व्यक्ति को देश के सबसे बड़े अस्पताल दिल्ली एम्स के ट्रॉमा सेंटर के आईसीयू वार्ड में रखा गया है. लेकिन, राणा के कमरे के बाहर सन्नाटा पसरा हुआ है. वार्ड के अंदर से सिर्फ उपकरणों की बीप की आवाज आ रही है. माता-पिता की आंखों के आंसू सूख चुके हैं, लेकिन बेटे का दर्द लगातार बढ़ता जा रहा है. मां अस्पताल में किसी अब भी किसी चमत्कार के इंतजार में हनुमान चालीसा का पाठ कर रही हैं. 

13 साल से खामोश लड़ाई लड़ रहे हरीश राणा

बता दें कि, करीब 13 साल से बेड पर लेटे 32 वर्षीय हरीश राणा अपने जीवन की सबसे कठिन लड़ाई लड़ रहे हैं. यह कहानी सिर्फ एक मरीज की नहीं, बल्कि विज्ञान की सीमाओं, एक परिवार की बेबसी और मृत्यु के बाद भी जीवित रहने वाली उम्मीद की कहानी है. इस बीच, दिल्ली के एम्स में डॉक्टर हरीश राणा को लेकर चिंतित होते जा रहे हैं. अब उन पर विशेष निगरानी रखी जा रही है.

किसी चमत्कार के इंतजार में हनुमान चालीसा पड़ रही मां

हरीश राणा की मां अभी भी अस्पताल के गलियारे में हनुमान चालीसा लिए बैठी हैं, किसी चमत्कार की प्रतीक्षा कर रही हैं. वह कहती हैं, मेरा बेटा सांस ले रहा है, उसका दिल धड़क रहा है, वह मुझे छोड़कर जा रहा है. वहीं, उसके पिता, जिनकी आंखों में आंसू नहीं हैं, अपने बेटे की मृत्यु का इंतजार कर रहे हैं. वह डॉक्टर से कहते हैं कि उनके बेटे को अंतिम क्षणों में कष्ट नहीं होना चाहिए.

अब अपने फेफड़ों से अंतिम सांसें ले रहे हरीश राणा

दिल्ली के एम्स में हरीश राणा के लाइफ सपोर्ट सिस्टम को पूरी तरह से हटा दिया गया है. फीडिंग ट्यूब और वेंटिलेटर भी हटा दिए गए हैं. हरीश राणा को अब सामान्य बिस्तर पर लिटा दिया गया है. उनकी हालत फिलहाल स्थिर है. बरसों तक मशीन के सहारे सांसें ले रहे हरीश अब अपने फेफड़ों से अंतिम सांसें ले रहे हैं. हालांकि, डॉक्टर चौबीसों घंटे उनकी निगरानी कर रहे हैं, ताकि उन्हें कोई दर्द न हो. डॉक्टरों की पूरी टीम हरीश राणा के अंतिम क्षणों को यथासंभव आरामदायक बनाने के लिए काम कर रही है.

दिल्ली एम्स के डॉक्टर चिंतित

दिल्ली एम्स मेडिकल बोर्ड उनकी स्थिति पर कड़ी नजर रख रहा है. हालांकि, हरीश राणा की फीडिंग ट्यूब हटा दी गई है, फिर भी डॉक्टर उनके मस्तिष्क की कार्यप्रणाली को बनाए रखने के लिए उन्हें दवा दे रहे हैं. डॉक्टर हरीश राणा को दर्द से मुक्त रखने को लेकर बेहद चिंतित हैं. हरीश राणा के माता-पिता और परिवार के अन्य सदस्य प्रतिदिन दिल्ली के एम्स में आ रहे हैं, जहां उन्हें परामर्श दिया जा रहा है. एम्स के एनेस्थीसिया और पैलिएटिव मेडिसिन विभाग की प्रमुख डॉ. सीमा मिश्रा राणा की निष्क्रिय इच्छामृत्यु की प्रक्रिया का संचालन कर रही हैं.

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Harish Rana Update: गाजियाबाद के हरीश राणा, जिन्हें दिल्ली एम्स में भर्ती कराया गया है. उनकी अप्रत्यक्ष इच्छामृत्यु की प्रक्रिया अब अंतिम चरण में पहुंच गई है. शीर्ष अदालत से इच्छामृत्यु की मंजूरी मिलने के बाद एम्स के पैलिएटिव केयर वार्ड में डॉक्टरों ने धीरे-धीरे उनका वेंटिलेटर और फीडिंग ट्यूब हटा दी. बरसों तक मशीन के सहारे सांसें ले रहे हरीश अब अपने फेफड़ों से अंतिम सांसें ले रहे हैं. बता दें कि, सुप्रीम कोर्ट ने मेडिकल बोर्ड की सिफारिशों के बाद उन्हें पैसिव यूथिनेशिया की अनुमति दे दी है. यह पहली बार है कि किसी व्यक्ति को देश के सबसे बड़े अस्पताल दिल्ली एम्स के ट्रॉमा सेंटर के आईसीयू वार्ड में रखा गया है. लेकिन, राणा के कमरे के बाहर सन्नाटा पसरा हुआ है. वार्ड के अंदर से सिर्फ उपकरणों की बीप की आवाज आ रही है. माता-पिता की आंखों के आंसू सूख चुके हैं, लेकिन बेटे का दर्द लगातार बढ़ता जा रहा है. मां अस्पताल में किसी अब भी किसी चमत्कार के इंतजार में हनुमान चालीसा का पाठ कर रही हैं. 

13 साल से खामोश लड़ाई लड़ रहे हरीश राणा

बता दें कि, करीब 13 साल से बेड पर लेटे 32 वर्षीय हरीश राणा अपने जीवन की सबसे कठिन लड़ाई लड़ रहे हैं. यह कहानी सिर्फ एक मरीज की नहीं, बल्कि विज्ञान की सीमाओं, एक परिवार की बेबसी और मृत्यु के बाद भी जीवित रहने वाली उम्मीद की कहानी है. इस बीच, दिल्ली के एम्स में डॉक्टर हरीश राणा को लेकर चिंतित होते जा रहे हैं. अब उन पर विशेष निगरानी रखी जा रही है.

किसी चमत्कार के इंतजार में हनुमान चालीसा पड़ रही मां

हरीश राणा की मां अभी भी अस्पताल के गलियारे में हनुमान चालीसा लिए बैठी हैं, किसी चमत्कार की प्रतीक्षा कर रही हैं. वह कहती हैं, मेरा बेटा सांस ले रहा है, उसका दिल धड़क रहा है, वह मुझे छोड़कर जा रहा है. वहीं, उसके पिता, जिनकी आंखों में आंसू नहीं हैं, अपने बेटे की मृत्यु का इंतजार कर रहे हैं. वह डॉक्टर से कहते हैं कि उनके बेटे को अंतिम क्षणों में कष्ट नहीं होना चाहिए.

अब अपने फेफड़ों से अंतिम सांसें ले रहे हरीश राणा

दिल्ली के एम्स में हरीश राणा के लाइफ सपोर्ट सिस्टम को पूरी तरह से हटा दिया गया है. फीडिंग ट्यूब और वेंटिलेटर भी हटा दिए गए हैं. हरीश राणा को अब सामान्य बिस्तर पर लिटा दिया गया है. उनकी हालत फिलहाल स्थिर है. बरसों तक मशीन के सहारे सांसें ले रहे हरीश अब अपने फेफड़ों से अंतिम सांसें ले रहे हैं. हालांकि, डॉक्टर चौबीसों घंटे उनकी निगरानी कर रहे हैं, ताकि उन्हें कोई दर्द न हो. डॉक्टरों की पूरी टीम हरीश राणा के अंतिम क्षणों को यथासंभव आरामदायक बनाने के लिए काम कर रही है.

दिल्ली एम्स के डॉक्टर चिंतित

दिल्ली एम्स मेडिकल बोर्ड उनकी स्थिति पर कड़ी नजर रख रहा है. हालांकि, हरीश राणा की फीडिंग ट्यूब हटा दी गई है, फिर भी डॉक्टर उनके मस्तिष्क की कार्यप्रणाली को बनाए रखने के लिए उन्हें दवा दे रहे हैं. डॉक्टर हरीश राणा को दर्द से मुक्त रखने को लेकर बेहद चिंतित हैं. हरीश राणा के माता-पिता और परिवार के अन्य सदस्य प्रतिदिन दिल्ली के एम्स में आ रहे हैं, जहां उन्हें परामर्श दिया जा रहा है. एम्स के एनेस्थीसिया और पैलिएटिव मेडिसिन विभाग की प्रमुख डॉ. सीमा मिश्रा राणा की निष्क्रिय इच्छामृत्यु की प्रक्रिया का संचालन कर रही हैं.

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