India AI Impact Summit 2026: भारत-US ने शुक्रवार को पैक्स सिलिका पहल पर साइन किया. इस कदम का मकसद भारत को AI और सेमीकंडक्टर सप्लाई चेन को सुरक्षित करने में मदद करना है. साइन करने के बाद भारत में US के राजदूत सर्जियो गोर और आर्थिक मामलों के अंडर सेक्रेटरी ऑफ स्टेट जैकब हेलबर्ग के साथ एक फायरसाइड चैट हुई. US के नेतृत्व वाला पैक्स सिलिका डिक्लेरेशन दोनों देशों को ज़रूरी मिनरल्स के लिए प्राइस फ्लोर की ओर बढ़ने और ग्लोबल मैन्युफैक्चरिंग सप्लाई चेन पर चीन के दबदबे का मुकाबला करने में भी मदद करेगा.
पैक्स सिलिका को भरोसेमंद देशों के एक स्ट्रेटेजिक गठबंधन के रूप में देखा गया है. यह जरूरी मिनरल्स और सेमीकंडक्टर फैब्रिकेशन से लेकर एडवांस्ड AI सिस्टम और डिप्लॉयमेंट इंफ्रास्ट्रक्चर तक सिलिकॉन स्टैक को सुरक्षित करने के लिए कमिटेड है. इस पहल का उद्देश्य ग्लोबल सप्लाई चेन में ओवर कंसेंट्रेशन को कम करना, आर्थिक दबाव को रोकना और यह सुनिश्चित करना है कि उभरती टेक्नोलॉजी को खुले डेमोक्रेटिक समाजों द्वारा विकसित और नियंत्रित किया जाए.
मंत्री अश्वनी वैष्णव क्या कहा?
लोगों को संबोधित करते हुए इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने इस पल को एक औपचारिक साइनिंग से कहीं बढ़कर बताया. उन्होंने कहा कि हम सिर्फ एक समिट नहीं कर रहे हैं बल्कि, हम भविष्य बना रहे हैं. उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि युवा पीढ़ी के लिए नई नींव और नए अवसर बनाए जा रहे हैं.
आज़ादी के बाद से कंपाउंडिंग ग्रोथ की ताकत की ओर ध्यान दिलाते हुए उन्होंने कहा कि अगर हम 1947 से भारत की ग्रोथ को देखें, तो हम सभी कंपाउंडिंग के असर का अंदाज़ा लगा सकते हैं. भारत के टैलेंटेड इंजीनियर दुनिया के सबसे एडवांस्ड टू-नैनोमीटर चिप्स डिज़ाइन कर रहे हैं. सेमीकंडक्टर इंडस्ट्री को लगभग दस लाख नए स्किल्ड प्रोफेशनल्स की ज़रूरत होगी और यह भारत के लिए एक बहुत बड़ा मौका है.
जैकब हेलबर्ग ने भविष्य का रोडमैप बताया
सेरेमनी में बोलते हुए यूनाइटेड स्टेट्स के इकोनॉमिक ग्रोथ, एनर्जी और एनवायरनमेंट के अंडर सेक्रेटरी ऑफ़ स्टेट, जैकब हेलबर्ग ने इस डिक्लेरेशन को सिर्फ़ कागज पर एक एग्रीमेंट नहीं, बल्कि एक साझा भविष्य के लिए एक रोडमैप बताया. दोनों देशों के साझा डेमोक्रेटिक इतिहास का ज़िक्र करते हुए उन्होंने कहा कि आज जब हम Pax Silica डिक्लेरेशन पर साइन कर रहे हैं, तो हम हथियारों पर निर्भरता को ना कहते हैं. हम ब्लैकमेल को ना कहते हैं. हम सब मिलकर यह मानते हैं कि इकोनॉमिक सिक्योरिटी ही नेशनल सिक्योरिटी है.
इस पहल के पीछे की बड़ी महत्वाकांक्षा को बताते हुए जैकब ने आगे कहा कि हम भविष्य के पूरे स्टैक को सुरक्षित कर रहे हैं, धरती में गहरे मिनरल्स, हमारी लैब्स और फैब्स में सिलिकॉन वेफर्स, और वह इंटेलिजेंस जो इंसानी क्षमता को बाहर लाएगी. Pax Silica हमारा डिक्लेरेशन है कि भविष्य उनका है जो बनाते हैं. इसी भावना को दोहराते हुए, भारत में U.S. एम्बेसडर, सर्जियो गोर ने Pax Silica में भारत की एंट्री को स्ट्रेटेजिक और जरूरी बताया.
यूएस एम्बेसडर ने कहा हम ताकत चुनते हैं
यूएस एम्बेसडर सर्जिया गोर ने कहा कि Pax Silica वह कोएलिशन है जो 21वीं सदी के इकोनॉमिक और टेक्नोलॉजिकल ऑर्डर को डिफाइन करेगा. इसे पूरे सिलिकॉन स्टैक को सुरक्षित करने के लिए डिज़ाइन किया गया है. उन माइंस से जहां हम जरूरी मिनरल्स निकालते हैं, उन फैब्स तक जहां हम चिप्स बनाते हैं, उन डेटा सेंटर्स तक जहां हम फ्रंटियर AI डिप्लॉय करते हैं. पार्टनरशिप की डेमोक्रेटिक बुनियाद को समझते हुए, एम्बेसडर गोर ने कहा कि पैक्स सिलिका इस बारे में है कि क्या आज़ाद समाज ग्लोबल इकॉनमी की ऊंचाइयों को कंट्रोल करेंगे? हम आज़ादी, पार्टनरशिप और ताकत चुनते हैं.
सर्जियो गोर ने कहा कि AI क्रांति अभी आने वाली नहीं है. यह पहले से ही यहां है. इंडिया AI इम्पैक्ट समिट में साइनिंग से एक साफ मैसेज मिला कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और एडवांस्ड टेक्नोलॉजी का भविष्य किस्मत पर नहीं छोड़ा जाएगा. इसे आज़ादी, पार्टनरशिप और लंबे समय तक चलने वाले लचीलेपन के लिए कमिटेड देशों द्वारा सोच-समझकर बनाया जाएगा.
कौन-कौन से देश शामिल?
इसमें ऑस्ट्रेलिया, ग्रीस, इजराइल, जापान, कतर, दक्षिण कोरिया, सिंगापुर, संयुक्त अरब अमीरात, यूनाइटेड किंगडम जैसे देश शामिल हैं. भारत के इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने इस समझौते पर साइन किए. इससे फायदा यह होगा कि अभी तक ज्यादातर दुर्लभ खनिजों की आपूर्ति, शोधन व खनन में पूरी दुनिया चीन पर निर्भर थी, उसे कम या खत्म किया जाएगा.