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हम पाकिस्तान जैसे दलाल… मिडिल ईस्ट संकट पर पाक की एंट्री पर एस. जयशंकर का सख्त रुख

Jaishankar Statement Pakistan Mediation: मिडिल ईस्ट की स्थिति पर चर्चा करने के लिए बुलाई गई सर्वदलीय बैठक लगभग दो घंटे तक चली. बैठक के बारे में बात करते हुए, संसदीय कार्य मंत्री किरण रिजिजू ने कहा कि सरकार ने उठाए गए सभी सवालों पर विस्तृत स्पष्टीकरण दिए और किसी भी गलतफहमी को दूर किया. इस बीच एस. जयशंकर ने पाकिस्तान पर भी सख्त टिप्पणी की है.

Written By: Shristi S
Last Updated: 2026-03-25 22:43:54

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Jaishankar on Pakistan Mediation: इजराइल- अमेरिका और ईरान के बीच चल रहे जंग पर बुधवार को भारत में एक सर्वदलीय बैठक हुई.  इस बैठक के दौरान, सरकार ने मिडिल ईस्ट की स्थिति और अपनी तैयारियों के बारे में जानकारी दी. जब विपक्ष ने बैठक के दौरान ईरान और अमेरिका के बीच मध्यस्थता करने के पाकिस्तान के प्रस्ताव के बारे में सवाल उठाए, तो विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने कहा कि भारत पाकिस्तान जैसा दलाल देश नहीं है.
 
गौरतलब है कि पाकिस्तान ने ईरान और अमेरिका के बीच मध्यस्थ की भूमिका निभाने का प्रस्ताव दिया है. पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने ‘X’ (पहले ट्विटर) पर एक पोस्ट में कहा था कि उनका देश इस संघर्ष को खत्म करने के लिए सार्थक और निर्णायक बातचीत की मेजबानी करने को तैयार है. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी इस पोस्ट का एक स्क्रीनशॉट शेयर किया था. जिसपर विपक्ष ने सवाल पूछा.
 

सर्वदलीय बैठक में क्या हुआ?

मिडिल ईस्ट की स्थिति पर चर्चा करने के लिए बुलाई गई सर्वदलीय बैठक लगभग दो घंटे तक चली. बैठक के बारे में बात करते हुए, संसदीय कार्य मंत्री किरण रिजिजू ने कहा कि सरकार ने उठाए गए सभी सवालों पर विस्तृत स्पष्टीकरण दिए और किसी भी गलतफहमी को दूर किया. उन्होंने बताया कि कई सदस्यों ने होर्मुज जलडमरूमध्य के रास्ते गैस और पेट्रोलियम की आपूर्ति के बारे में जानकारी मांगी थी; उन्हें यह जानकर आश्वस्त किया गया कि भारत ने इस उद्देश्य के लिए पहले ही चार जहाज सुरक्षित कर लिए हैं. इसके परिणामस्वरूप, विपक्षी सदस्यों ने सरकार के प्रयासों पर संतोष व्यक्त किया.
 
उन्होंने आगे कहा कि विपक्षी सदस्यों ने पश्चिम एशिया की स्थिति, जो ईरान, इज़राइल और अमेरिका के बीच संघर्ष से उत्पन्न हुई हैसका भारत पर पड़ने वाले संभावित प्रभाव, साथ ही भारतीय लोगों के हितों की रक्षा के लिए सरकार द्वारा उठाए जा रहे कदमों के बारे में कई सवाल उठाए. सरकार ने इन सवालों के विस्तृत और व्यापक जवाब दिए. उन्होंने कहा कि मुझे आपको यह बताते हुए खुशी हो रही है कि सरकार ने पूरे विपक्ष द्वारा उठाए गए हर एक सवाल का जवाब दिया है. रिजिजू ने आगे कहा कि, आखिरकार, विपक्ष के सभी सदस्यों ने इस बात की पुष्टि की कि संकट की इस घड़ी में और मौजूदा हालात को देखते हुए सरकार जो भी फ़ैसले लेगी और जो भी कदम उठाएगी, वे सब मिलकर उनका समर्थन करेंगे.
 

विपक्ष ने उठाए सवाल

विपक्षी सांसदों धर्मेंद्र यादव और मुकुल वासनिक ने विशेष रूप से इसी मामले पर सवाल उठाए थे. इसके जवाब में, सरकार ने कहा कि पाकिस्तान 1981 से ही ऐसा व्यवहार करता आ रहा है, और इसमें कुछ भी नया नहीं है. बैठक में मौजूद एक सदस्य ने बताया कि जयशंकर ने टिप्पणी की भारत पाकिस्तान की तरह बिचौलिए या दलाल देश के रूप में काम नहीं करेगा.
 

सरकार ने क्या कहा?

विपक्ष ने सरकार की विदेश नीति की आलोचना की थी. कांग्रेस समेत विपक्षी पार्टियों ने विदेश नीति से जुड़े मामलों पर सवाल उठाए थे. सर्वदलीय बैठक के दौरान, सरकार ने इन सभी आरोपों को खारिज कर दिया. सरकार ने पश्चिम एशिया में संकट से निपटने के अपने तरीके का ज़ोरदार बचाव किया. पाकिस्तान की मध्यस्थता की पेशकश के बारे में, सरकार ने यह तर्क दिया कि अगर अमेरिका को पाकिस्तान के ज़रिए बातचीत करना फ़ायदेमंद लगता है, तो भारत उस प्रक्रिया को नियंत्रित नहीं कर सकता. इसके अलावा, सरकार ने इस बात पर ज़ोर दिया कि भारत वैश्विक कूटनीति में दलाल देश की भूमिका नहीं निभाएगा.
 
अपनी विदेश नीति की आलोचनाओं का जवाब देते हुए, सरकार ने ज़ोर देकर कहा कि भारत लगातार सक्रिय रहा है बयान जारी करता रहा है, कूटनीतिक पहल करता रहा है, और सभी संबंधित पक्षों के साथ लगातार बातचीत बनाए हुए है. सरकार ने कभी-कभी अपनाई गई चुप्पी को एक रणनीतिक हथियार बताया, और साथ ही इस बात पर भी ज़ोर दिया कि भारत निष्क्रिय नहीं रहा है.

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Jaishankar on Pakistan Mediation: इजराइल- अमेरिका और ईरान के बीच चल रहे जंग पर बुधवार को भारत में एक सर्वदलीय बैठक हुई.  इस बैठक के दौरान, सरकार ने मिडिल ईस्ट की स्थिति और अपनी तैयारियों के बारे में जानकारी दी. जब विपक्ष ने बैठक के दौरान ईरान और अमेरिका के बीच मध्यस्थता करने के पाकिस्तान के प्रस्ताव के बारे में सवाल उठाए, तो विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने कहा कि भारत पाकिस्तान जैसा दलाल देश नहीं है.
 
गौरतलब है कि पाकिस्तान ने ईरान और अमेरिका के बीच मध्यस्थ की भूमिका निभाने का प्रस्ताव दिया है. पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने ‘X’ (पहले ट्विटर) पर एक पोस्ट में कहा था कि उनका देश इस संघर्ष को खत्म करने के लिए सार्थक और निर्णायक बातचीत की मेजबानी करने को तैयार है. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी इस पोस्ट का एक स्क्रीनशॉट शेयर किया था. जिसपर विपक्ष ने सवाल पूछा.
 

सर्वदलीय बैठक में क्या हुआ?

मिडिल ईस्ट की स्थिति पर चर्चा करने के लिए बुलाई गई सर्वदलीय बैठक लगभग दो घंटे तक चली. बैठक के बारे में बात करते हुए, संसदीय कार्य मंत्री किरण रिजिजू ने कहा कि सरकार ने उठाए गए सभी सवालों पर विस्तृत स्पष्टीकरण दिए और किसी भी गलतफहमी को दूर किया. उन्होंने बताया कि कई सदस्यों ने होर्मुज जलडमरूमध्य के रास्ते गैस और पेट्रोलियम की आपूर्ति के बारे में जानकारी मांगी थी; उन्हें यह जानकर आश्वस्त किया गया कि भारत ने इस उद्देश्य के लिए पहले ही चार जहाज सुरक्षित कर लिए हैं. इसके परिणामस्वरूप, विपक्षी सदस्यों ने सरकार के प्रयासों पर संतोष व्यक्त किया.
 
उन्होंने आगे कहा कि विपक्षी सदस्यों ने पश्चिम एशिया की स्थिति, जो ईरान, इज़राइल और अमेरिका के बीच संघर्ष से उत्पन्न हुई हैसका भारत पर पड़ने वाले संभावित प्रभाव, साथ ही भारतीय लोगों के हितों की रक्षा के लिए सरकार द्वारा उठाए जा रहे कदमों के बारे में कई सवाल उठाए. सरकार ने इन सवालों के विस्तृत और व्यापक जवाब दिए. उन्होंने कहा कि मुझे आपको यह बताते हुए खुशी हो रही है कि सरकार ने पूरे विपक्ष द्वारा उठाए गए हर एक सवाल का जवाब दिया है. रिजिजू ने आगे कहा कि, आखिरकार, विपक्ष के सभी सदस्यों ने इस बात की पुष्टि की कि संकट की इस घड़ी में और मौजूदा हालात को देखते हुए सरकार जो भी फ़ैसले लेगी और जो भी कदम उठाएगी, वे सब मिलकर उनका समर्थन करेंगे.
 

विपक्ष ने उठाए सवाल

विपक्षी सांसदों धर्मेंद्र यादव और मुकुल वासनिक ने विशेष रूप से इसी मामले पर सवाल उठाए थे. इसके जवाब में, सरकार ने कहा कि पाकिस्तान 1981 से ही ऐसा व्यवहार करता आ रहा है, और इसमें कुछ भी नया नहीं है. बैठक में मौजूद एक सदस्य ने बताया कि जयशंकर ने टिप्पणी की भारत पाकिस्तान की तरह बिचौलिए या दलाल देश के रूप में काम नहीं करेगा.
 

सरकार ने क्या कहा?

विपक्ष ने सरकार की विदेश नीति की आलोचना की थी. कांग्रेस समेत विपक्षी पार्टियों ने विदेश नीति से जुड़े मामलों पर सवाल उठाए थे. सर्वदलीय बैठक के दौरान, सरकार ने इन सभी आरोपों को खारिज कर दिया. सरकार ने पश्चिम एशिया में संकट से निपटने के अपने तरीके का ज़ोरदार बचाव किया. पाकिस्तान की मध्यस्थता की पेशकश के बारे में, सरकार ने यह तर्क दिया कि अगर अमेरिका को पाकिस्तान के ज़रिए बातचीत करना फ़ायदेमंद लगता है, तो भारत उस प्रक्रिया को नियंत्रित नहीं कर सकता. इसके अलावा, सरकार ने इस बात पर ज़ोर दिया कि भारत वैश्विक कूटनीति में दलाल देश की भूमिका नहीं निभाएगा.
 
अपनी विदेश नीति की आलोचनाओं का जवाब देते हुए, सरकार ने ज़ोर देकर कहा कि भारत लगातार सक्रिय रहा है बयान जारी करता रहा है, कूटनीतिक पहल करता रहा है, और सभी संबंधित पक्षों के साथ लगातार बातचीत बनाए हुए है. सरकार ने कभी-कभी अपनाई गई चुप्पी को एक रणनीतिक हथियार बताया, और साथ ही इस बात पर भी ज़ोर दिया कि भारत निष्क्रिय नहीं रहा है.

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