11
Iraq Basra Oil Tanker Attack: ईरान इसराइल तनाव का असर अब इराक में भी देखने को मिला है. इराक के पास समुद्र में मार्शल आइलैंड्स के झंडे वाले तेल टैंकर, MT सेफसी विष्णु पर हमले की खबरें आई हैं. यह हमला तब हुआ जब टैंकर इराक के बसरा के पास स्थित खोर अल-ज़ुबैर बंदरगाह के पास माल लादने का काम कर रहा था. शुरुआती रिपोर्टों के अनुसार, एक सफेद रंग की, बिना चालक वाली स्पीडबोट जिसमें विस्फोटक होने का शक था. जहाज के दाईं ओर से तेज़ी से आई और टैंकर से टकरा गई. इस टक्कर के बाद, जहाज पर एक ज़ोरदार धमाका हुआ और आग लग गई.
इस दौरान बिहार के भागलपुर के देवनंदन प्रसाद सिंह, जो मुंबई के कांदिवली ईस्ट में रहते थे, इराक के पास समुद्र में तेल टैंकर पर हुए हमले में जान चली गई. जिसके बाद मृतक के घर मातम पसर चुका है.
कौन थे देवनंदन सिंह?
देवनंदन सिंह मूल रूप से बिहार के निवासी थे. वे 2019 में मुंबई आ गए थे और कांदिवली ईस्ट में स्थित रहेजा इटरनिटी सोसाइटी में अपने परिवार के साथ रहते थे. उनके परिवार में उनकी पत्नी और दो बच्चे हैं. बताया जा रहा है कि उनकी उम्र लगभग 50 वर्ष थी. इस घटना के बाद से परिवार उनके अंतिम दर्शन करने के लिए तड़प रहा है. घटना की जानकारी मिलते ही, संबंधित समुद्री एजेंसियों और अधिकारियों को विधिवत सूचित कर दिया गया. जहाज पर हुए हमले के कारणों और परिस्थितियों का पता लगाने के लिए एक जांच शुरू कर दी गई है. हमले की सटीक प्रकृति और किन विशिष्ट परिस्थितियों में यह हुआ, यह निर्धारित करने के प्रयास वर्तमान में जारी हैं.
संघर्ष के बीच तेल टैंकर पर हमला
रिपोर्टों के अनुसार, बुधवार को जब यह हमला हुआ, तब जहाज़ इराक के बसरा के पास, खोर अल ज़ुबैर बंदरगाह के नज़दीक लंगर डाले खड़ा था. शुरुआती रिपोर्टों से पता चलता है कि जहाज को मौजूदा क्षेत्रीय तनाव और अस्थिर सुरक्षा स्थिति की पृष्ठभूमि में निशाना बनाया गया था. देवनंदन सिंह को इस हमले में गंभीर चोटें आईं और इलाज के दौरान उन्होंने दम तोड़ दिया.
गांव में शोक की लहर
कंपनी ने आधिकारिक तौर पर इस दुखद घटना की पुष्टि की है. जैसे ही यह खबर गांव पहुंची, पूरे इलाके में शोक की लहर दौड़ गई. घर में रोने-पीटने और विलाप का माहौल छा गया; उनकी पत्नी, भाई और परिवार के अन्य सदस्य गहरे सदमे में हैं और उन्हें सांत्वना देने की तमाम कोशिशों के बावजूद वे खुद को संभाल नहीं पा रहे हैं. सूचना मिलते ही, मृतक की पत्नी और भाई तुरंत दिल्ली के लिए रवाना हो गए.
परिवार सरकार से विनम्र अपील कर रहा है कि उनके पार्थिव शरीर को किसी भी तरह भारत वापस लाने में मदद की जाए, ताकि अंतिम संस्कार से पहले वे उन्हें अपनी अंतिम श्रद्धांजलि अर्पित कर सकें. एक इंजीनियर, जो विदेश में काम करते हुए अपने देश का नाम रोशन कर रहा था. अब उसके गांव की हर आंख उसके घर लौटने का इंतज़ार कर रही है, और उसे तिरंगे में लिपटा देखने को तरस रही है. इस घटना ने न केवल एक परिवार को, बल्कि पूरे क्षेत्र को गहरा सदमा पहुंचाया है.