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क्या अपने पार्टनर से ‘गंदी बात’ करनी अच्छी बात है? डॉ. सीमा आनंद से जानिए प्लेजर की बात कब सही और कब रिस्की

Dirty Talk With Partner: रिश्तों को निभाने के लिए प्यार, भरोसा और संवाद तीनों का होना बेहद जरूरी है. लेकिन, जैसे ही बात सेक्स, प्लेज़र या ‘गंदी बात’ (Dirty Talk) की आती है, बहुत से लोग असहज हो जाते हैं. लोग इन शब्दों को मायने अपने-अपने तरीके से निकालने लगते हैं. लेकिन, क्या सच में पार्टनर से गंदी बात करना गलत है? देखिए इस पर क्या कहती हैं लंदन की मशहूर मिथोलॉजिस्ट और स्टोरीटेलर डॉ. सीमा आनंद -

Written By: Lalit Kumar
Last Updated: January 26, 2026 14:18:25 IST

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Dirty Talk With Partner: समय के साथ रिश्तों में बदलाव स्वाभाविक है. यह परिवर्तन विकास का अवसर हो सकता है. तो क्यों न उसे खुलकर संवाद, आपसी सहयोग और अच्छे रिश्तों के साथ अपनाया जाए. ये सभी चीजें यानी प्यार, भरोसा और संवाद रिश्तों में बेहद जरूरी हैं. लेकिन, यहां समझना होगा कि, रिश्ते सिर्फ साथ होने से नहीं, बल्कि एक-दूसरे को समझने और महसूस करने से मजबूत बनते हैं. इसके बाद भी जैसे ही बात सेक्स, प्लेज़र या ‘गंदी बात’ (Dirty Talk) की आती है, बहुत से लोग असहज हो जाते हैं. लोग इन शब्दों को मायने अपने-अपने तरीके से निकालने लगते हैं. इसमें भी गलत मानने वालों की संख्या बड़ी हो सकती है. लेकिन, लंदन की मशहूर मिथोलॉजिस्ट और स्टोरीटेलर डॉ. सीमा आनंद इनको कतई गलत नहीं मानती हैं. एक पॉडकास्ट में जब सीमा आनंद से पूछा गया कि, क्या अपने पार्टनर से गंदी बात करना अच्छी बात है? तो इसपर उन्होंने बेबाकी से उसका समर्थन किया. इसके साथ ही उन्होंने उन शब्दों की समय सीमा और समय के बारे में भी बताया. तो आइए जानते हैं कि आखिर पार्टनर से गंदी करने पर क्या कहती हैं डॉ. सीमा आनंद-

बात गंदी नहीं होती, नीयत और तरीका मायने रखता

डॉ. सीमा आनंद कहती हैं कि, अपने पार्टनर से ‘गंदी बात’ या प्लेज़र पर बातचीत करना बिलकुल गलत बात नहीं है. अगर गंदी बात हम अपने पार्टनर से नहीं करेंगे तो किससे करेंगे. हां ये जरूर है कि. दोनों की सहमति और सहजता का ध्यान रखना चाहिए. यह संवाद रिश्ते में नज़दीकी और भरोसा बढ़ा सकता है. वे कहती हैं कि, भारतीय परंपराओं में इच्छा और आनंद को हमेशा स्वीकार किया गया है, लेकिन आज हम शर्म और चुप्पी के कारण उनसे दूर हो गए हैं. सही समय, सही शब्द और सम्मानजनक भाषा बेहद ज़रूरी है. इंटरनेट पर अश्लील वीडियो देख कर सीखी गई बातें असल रिश्तों पर लागू नहीं होतीं हैं. असल में, बात गंदी नहीं होती, नीयत और तरीका मायने रखता है. 

रिश्तों में बातचीत सिर्फ शब्द नहीं गहराई होती

Dr. Seema Anand हमेशा लोगों की समस्याओं को लेकर वीडियो शेयर करती रहती हैं. इसी तरह के एक वीडियो में वे कहती हैं कि, आज की तेज़ ज़िंदगी में कपल्स साथ तो हैं, लेकिन खुलकर बात कम करते हैं. सेक्स पर बातचीत अब भी कई घरों में टैबू मानी जाती है. लेकिन, सच्चाई ये है कि, सही समय और सही तरीके से की गई बातचीत रिश्ते को गहराई देती है. यही नहीं, भारतीय परंपराओं में काम, इच्छा और आनंद को कभी गंदा नहीं माना गया. समस्या तब होती है, जब हम संवाद के बिना अनुमान लगाने लगते हैं.

क्या पार्टनर से ‘गंदी बात’ करना गलत है?

डॉ. सीमा आनंद कहती हैं कि, अगर दोनों की सहमति हो तो आप आपस में प्लेजर की बात कर सकते हैं. ‘गंदी बात’ दरअसल एक तरह का इंटिमेट कम्युनिकेशन है. यह जरूरी नहीं कि हर बार अश्लील हो. कई बार यह सिर्फ इच्छाओं, कल्पनाओं और भावनाओं को शब्द देने का तरीका होता है. हालांकि, वे बार-बार इस बात पर ज़ोर देती हैं कि consent is sexy. अगर आपका पार्टनर सहज नहीं है, तो ज़बरदस्ती की गई कोई भी बात रिश्ते को नुकसान पहुंचा सकती है.

पार्टनर से कब करें प्लेज़र की बातें?

हर समय सही नहीं होता. ऑफिस से थके हुए पार्टनर से अचानक ऐसी बातें शुरू करना गलत असर डाल सकता है. इस तरह की बातें आप तब करें, जब आप दोनों भावनात्मक रूप से जुड़े हों. जब पहले से हल्की-फुल्की रोमांटिक बातचीत चल रही हो, या फिर जब आप और आपका पार्टनर दोनों अकेले और रिलैक्स हों. 

गंदी बात करने से पहले किन बातों का रखें ध्यान?

डॉ. सीमा आनंद कहती हैं कि, अगर आप अपने पार्टनर से गंदी बातें कर रहे हैं तो कुछ बातों को ध्यान रखना चाहिए. हालांकि, अक्सर लोग गलती कर बैठते हैं. पोर्न से सीखना ज़रूरी नहीं है. असल ज़िंदगी फिल्म नहीं होती है, जो स्क्रीन पर अच्छा लगता है, ज़रूरी नहीं कि सामने वाले को भी अच्छा लगे. सम्मान के साथ कही गई बात और अपमानजनक भाषा में फर्क होता है. रिश्ते में भरोसा तभी बनेगा, जब भाषा सुरक्षित महसूस कराए. इसके अलावा, सिर्फ बोलना नहीं, पार्टनर की प्रतिक्रिया समझना भी उतना ही अहम है.

महिलाओं की खुशी पर खुली बातचीत जरूरी क्यों?

डॉ. सीमा आनंद कहती हैं कि, मेरा काम खास तौर पर महिलाओं की खुशी, स्वतंत्रता और आनंद पर केंद्रित है. उनका मानना है कि जब महिलाएं अपनी इच्छा खुलकर नहीं कह पातीं, तो रिश्ता असंतुलित हो जाता है. प्लेज़र पर बात करना सिर्फ सेक्स के लिए नहीं, बल्कि भावनात्मक आज़ादी के लिए भी ज़रूरी है.

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