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मरीजों के लिए ऐसी दीवानगी! सड़क पर कमर तक जमा था बर्फ फिर भी नहीं मानी हार, JCB से अस्पताल पहुंचे डॉक्टर

Jammu Kashmir Doctor जम्मू कश्मीर में इन दिनों भारी बर्फबारी का दौर जारी है. सड़क पर बर्फ जमा रहने के बावजूद डॉक्टर बशारत पंडित श्रीनगर से शोपियां जिला अस्पताल तक करीब 50 किलोमीटर की दूरी तय किया और अपने मरीजों का इलाज किया.

Written By: Sohail Rahman
Last Updated: January 29, 2026 15:53:44 IST

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District Hospital Shopian: जम्मू कश्मीर समेत पहाड़ी राज्यों में भीषण बर्फबारी का दौर जारी है. सड़कों पर कमर तक बर्फ जमा हुआ नजर आ रहा है. जिसकी वजह से लोगों को आवागमन में भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है. जरूरी काम की वजह से ही लोगों को निकलना पड़ रहा है. अगर इस दौरान किसी की तबीयत खराब हो जाए तो क्या होगा. उन्हें अस्पताल तक पहुंचाने में काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है.

इस दौरान, जम्मू कश्मीर से एक बेहतरीन तस्वीर सामने आई है. जम्मू कश्मीर के शोपियां जिले में तैनात एक डॉक्टर ने मंगलवार को यह साबित कर दिया कि कर्तव्य की भावना प्रकृति की सबसे कठिन चुनौतियों पर भी जीत हासिल कर सकती है.

क्या है पूरा मामला?

दरअसल पूरा मामला यह है कि खराब मौसम और कमर तक सड़क पर बर्फ जमा रहने के बावजूद भी जम्मू कश्मीर के शोपियां जिले में एक डॉक्टर अपने मरीजों को देखने के लिए एक्सकेवेयर पर बैठकर अस्पताल पहुंचा. इस डॉक्टर का नाम बशारत पंडित है, जो दक्षिण कश्मीर के पुलवामा के रहने वाले हैं. लेकिन फिलहाल वो श्रीनगर में रह रहे हैं. जो शोपियां के जिला अस्पताल में एक स्त्री रोग विशेषज्ञ के तौर पर तैनात है.

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सड़क पर बर्फ जमा होने के बावजूद तय किया 55 किलोमीटर का सफर

वह मंगलवार को सुबह 7.30 बजे घर से निकले ताकि लगभग 55 किलोमीटर का सफर तय कर सकें. जबकि श्रीनगर और उसके आसपास बर्फबारी हल्की थी, दक्षिण कश्मीर में हालात और खराब हो गए, जहां शोपियां में तीन से चार फीट ताजी बर्फ गिरी. शोपियां पहुंचने के बाद उनकी कार फंस गई, जिससे उन्हें अस्पताल पहुंचने की बेताब कोशिश में लगभग तीन किलोमीटर पैदल चलना पड़ा. पंडित ने PTI को फोन पर बताया कि यह सुबह का समय था और ज्यादातर सड़कें साफ नहीं थीं. मैंने पैदल चलना शुरू किया, लेकिन तभी एक JCB (एक्सकेवेटर) आया, तो मैं उस पर चढ़ गया.

एक्सकेवेटर पर बैठकर पहुंचे अस्पताल

पंडित ने आगे जानकारी देते हुए बताया कि वह एक्सकेवेटर से अस्पताल गए और सुबह करीब 10.30 बजे वहां पहुंचे. उन्होंने कहा कि यह जिम्मेदारी और कर्तव्य की भावना थी. यह मेरे मरीजों खासकर गर्भवती महिलाओं के प्रति कर्तव्य की भावना थी, जिन्हें वरना दिक्कतों का सामना करना पड़ सकता था. पंडित ने कहा कि उन्हें गर्भवती महिलाओं का इलाज करने के लिए किसी भी कीमत पर अस्पताल पहुंचना था. उन्होंने आगे बताया कि कई मरीज इलाज के लिए लाइन में लगे थे और कुछ इमरजेंसी भी थीं. इस भारी बर्फबारी में मरीजों को दूसरे अस्पतालों में भेजना मुश्किल होता. डॉक्टर ने बताया कि उनके विभाग ने दिन में 10 सर्जरी कीं और सभी मरीजों की हालत स्थिर है. 

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