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JNU Slogans Row:  JNU में रात को लगे विवादित नारों की क्या है असली वजह?

JNU Slogans Row: सुप्रीम कोर्ट द्वारा छात्र कार्यकर्ता उमर खालिद और शरजील इमाम को जमानत देने से इनकार करने के बाद सोमवार को दिल्ली के जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) के कैंपस में विवादित नारे लगाए गए.

Written By: Pushpendra Trivedi
Last Updated: 2026-01-06 12:21:09

JNU Slogans Row: सुप्रीम कोर्ट द्वारा छात्र कार्यकर्ता उमर खालिद और शरजील इमाम को जमानत देने से इनकार करने के बाद सोमवार को दिल्ली के जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) के कैंपस में विवादित नारे लगाए गए. ये दोनों लोग पांच साल से ज़्यादा समय से जेल में हैं. उन पर 2020 के दिल्ली दंगों से जुड़े “बड़ी साजिश” के मामले में आरोप हैं. इस घटना पर प्रतिक्रिया देते हुए बीजेपी नेता और दिल्ली के पर्यावरण मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा ने आज पूछा कि अगर वे सुप्रीम कोर्ट के फैसले के खिलाफ विरोध प्रदर्शन करने लगें तो और क्या कहा जा सकता है? उन्होंने कहा, “उनका इस देश से कोई लेना-देना नहीं है. ये ऐसे लोग हैं जो भारत को तोड़ना चाहते हैं, वे प्रधानमंत्री के बारे में बुरा बोलते हैं.”

रात को लगाए नारे

सूत्रों ने बताया कि JNU के साबरमती हॉस्टल में रात 9 बजे से 10 बजे के बीच कुछ लोगों ने नारे लगाए. सूत्रों के अनुसार, जब नारे लगाए जा रहे थे तब लेफ्ट समर्थित JNU स्टूडेंट्स यूनियन (JNUSU) के जॉइंट सेक्रेटरी दानिश और उसके सेक्रेटरी सुनील मौके पर मौजूद थे. नारों में ताबूतों और पीएम मोदी के नाम का जिक्र था. खालिद और इमाम भी कभी JNU में लेफ्ट के नारे लगाने वाले ग्रुप का हिस्सा थे. जैसे कन्हैया कुमार और शेहला राशिद थे. कुमार और राशिद अब आगे बढ़ गए हैं.

ABVP ने कहा कि शिकायत दर्ज करेंगे

अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) के JNU सचिव प्रवीण के पीयूष ने एक इंटरव्यू में बताया कि “लेफ्ट के छात्रों ने साबरमती हॉस्टल के पास नारे लगाए. उन्होंने RSS, ABVP, PM मोदी जी के खिलाफ बुरा-भला कहा.” उन्होंने आगे कहा, “हम इस मामले को आगे बढ़ाएंगे और यह सुनिश्चित करेंगे कि उन्हें सज़ा मिले.” जस्टिस अरविंद कुमार और प्रसन्ना बी वराले की बेंच ने सोमवार को कहा कि अभियोजन सामग्री से खालिद और इमाम के खिलाफ पहली नज़र में मामला बनता है, जिससे गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (UAPA) की धारा 43D(5) के तहत जमानत पर कानूनी रोक लगती है.

इसने कहा कि इस समय अभियोजन के सबूत और अन्य सामग्री “उन्हें जमानत पर रिहा करने का औचित्य नहीं ठहराती” और कहा कि रिकॉर्ड से पता चलता है कि वे योजना बनाने लोगों को इकट्ठा करने और रणनीतिक निर्देश जारी करने के स्तर पर शामिल थे. इसने मामले में नामजद पांच अन्य लोगों को जमानत दे दी. 

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JNU Slogans Row:  JNU में रात को लगे विवादित नारों की क्या है असली वजह?

JNU Slogans Row: सुप्रीम कोर्ट द्वारा छात्र कार्यकर्ता उमर खालिद और शरजील इमाम को जमानत देने से इनकार करने के बाद सोमवार को दिल्ली के जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) के कैंपस में विवादित नारे लगाए गए.

Written By: Pushpendra Trivedi
Last Updated: 2026-01-06 12:21:09

JNU Slogans Row: सुप्रीम कोर्ट द्वारा छात्र कार्यकर्ता उमर खालिद और शरजील इमाम को जमानत देने से इनकार करने के बाद सोमवार को दिल्ली के जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) के कैंपस में विवादित नारे लगाए गए. ये दोनों लोग पांच साल से ज़्यादा समय से जेल में हैं. उन पर 2020 के दिल्ली दंगों से जुड़े “बड़ी साजिश” के मामले में आरोप हैं. इस घटना पर प्रतिक्रिया देते हुए बीजेपी नेता और दिल्ली के पर्यावरण मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा ने आज पूछा कि अगर वे सुप्रीम कोर्ट के फैसले के खिलाफ विरोध प्रदर्शन करने लगें तो और क्या कहा जा सकता है? उन्होंने कहा, “उनका इस देश से कोई लेना-देना नहीं है. ये ऐसे लोग हैं जो भारत को तोड़ना चाहते हैं, वे प्रधानमंत्री के बारे में बुरा बोलते हैं.”

रात को लगाए नारे

सूत्रों ने बताया कि JNU के साबरमती हॉस्टल में रात 9 बजे से 10 बजे के बीच कुछ लोगों ने नारे लगाए. सूत्रों के अनुसार, जब नारे लगाए जा रहे थे तब लेफ्ट समर्थित JNU स्टूडेंट्स यूनियन (JNUSU) के जॉइंट सेक्रेटरी दानिश और उसके सेक्रेटरी सुनील मौके पर मौजूद थे. नारों में ताबूतों और पीएम मोदी के नाम का जिक्र था. खालिद और इमाम भी कभी JNU में लेफ्ट के नारे लगाने वाले ग्रुप का हिस्सा थे. जैसे कन्हैया कुमार और शेहला राशिद थे. कुमार और राशिद अब आगे बढ़ गए हैं.

ABVP ने कहा कि शिकायत दर्ज करेंगे

अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) के JNU सचिव प्रवीण के पीयूष ने एक इंटरव्यू में बताया कि “लेफ्ट के छात्रों ने साबरमती हॉस्टल के पास नारे लगाए. उन्होंने RSS, ABVP, PM मोदी जी के खिलाफ बुरा-भला कहा.” उन्होंने आगे कहा, “हम इस मामले को आगे बढ़ाएंगे और यह सुनिश्चित करेंगे कि उन्हें सज़ा मिले.” जस्टिस अरविंद कुमार और प्रसन्ना बी वराले की बेंच ने सोमवार को कहा कि अभियोजन सामग्री से खालिद और इमाम के खिलाफ पहली नज़र में मामला बनता है, जिससे गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (UAPA) की धारा 43D(5) के तहत जमानत पर कानूनी रोक लगती है.

इसने कहा कि इस समय अभियोजन के सबूत और अन्य सामग्री “उन्हें जमानत पर रिहा करने का औचित्य नहीं ठहराती” और कहा कि रिकॉर्ड से पता चलता है कि वे योजना बनाने लोगों को इकट्ठा करने और रणनीतिक निर्देश जारी करने के स्तर पर शामिल थे. इसने मामले में नामजद पांच अन्य लोगों को जमानत दे दी. 

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