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जब मशीनें खुद तय करेंगी किसे मारना है! क्या है किलर रोबोट और क्यों उठ रही बैन की मांग? जानिए सबकुछ

Killer Robots: एआई और मशीनी युग में कुछ ऐसे हथियार बनाए जा रहे हैं, जो भविष्य के लिए खतरा साबित हो सकते हैं. अब ये हथियार खुद तय करेंगे कि किसे मारना है. दुनिया में इसका विरोध भी हो रहा है और समर्थन भी. जानिए आखिर क्या है ये. क्या इससे बदलने वाली है दुनिया?

Written By: Kamesh Dwivedi
Last Updated: 2026-03-11 17:50:12

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Killer Robots Explained: कहते हैं ना विज्ञान जितना वरदान है उतना अभिशाप भी है. आज एआई और आधुनिक मशीनों ने लोगों का काम आसान कर दिया है. इस समय किलर रोबोट्स की चर्चा हो रही है. ये कुछ ऐसे हथियार हैं जो बिना मानव के हस्तक्षेप के खुद अपना निशाना चुन सकते हैं और हमला कर सकते हैं. इसीलिए दुनिया के करीब 30 देश इसके बैन की मांग कर रहे हैं, जबकि कुछ इसका समर्थन कर रहे हैं. जानिए इसके बारे में सबकुछ. 

क्या होता है किलर रोबोट?

‘किलर रोबोट’ अब आधुनिक युद्धक्षेत्रों में उतर रहे हैं. इसे टेक्निकल भाषा में लीथल ऑटोनॉमस वेपन सिस्टम (LAWS) कहा जाता है. ये ऐसे हथियार होते हैं जो एक बार सक्रिय होने के बाद अपने आप काम कर सकते हैं. सामान्य हथियारों में हर कदम पर इंसान का नियंत्रण होता है, लेकिन इन प्रणालियों में ऐसा नहीं होता. ये कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) की मदद से खुद ही युद्ध के मैदान में जरूरी फैसले ले सकती हैं.

कैसे काम करता है ये?

इन हथियारों के अंदर एआई सिस्टम लगा होता है, जो लाखों तस्वीरों और जानकारियों का विश्लेषण करके कुछ ही पलों में यह समझने की कोशिश करता है कि सामने दिख रहा व्यक्ति सैनिक है या आम नागरिक. इसके अलावा कई बार ये ड्रोन स्वार्म टेक्नोलॉजी के साथ काम करते हैं. इसका मतलब है कि सैकड़ों ड्रोन एक नेटवर्क की तरह आपस में जुड़े रहते हैं, एक-दूसरे से जानकारी साझा करते हैं और मिलकर किसी लक्ष्य पर हमला कर सकते हैं.

किस बात का हो रहा विरोध?

मानव जब युद्ध में उतरता है तो वह स्थित के अनुसार फैसला लेता है. वह देखता है कि कौन निर्दोष है या कौन दुश्मन. इस आधार पर वार करता है. मशीनों में संवेदनाएं भी नहीं होती हैं. इसलिए वह गलत फैसला भी ले सकती हैं. युद्ध की स्थिति को देखकर इंसान अपने साथियों और अधिकारियों को सही से पूरी जानकारी दे सकता है. वहीं मशीन से ऐसा कम करने की गुंजाइश है. साथ ही ये भी कहा जा रहा है कि अगर एआई कुछ भी गलत करेगा, तो इसकी जिम्मेदारी कौन लेगा? क्योंकि ये किसी की जान का सवाल है. 

30 से अधिक देशों ने जताया विरोध

ऑस्ट्रिया और न्यूजीलैंड सहित 30 से अधिक देशों ने संयुक्त राष्ट्र से इस तरह की प्रणालियों पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने का आग्रह किया है. क्योंकि इन देशों ने आने वाले समय की गंभीर समस्याओं का आंकने का प्रयास किया है. 

ये देश कर रहे समर्थन

वहीं अमेरिका, रूस, चीन और इजराइल सहित प्रमुख सैन्य शक्तियां इसका पुरजोर समर्थन करती हैं. ये देश तर्क देते हैं कि स्वायत्त हथियार भविष्य के संघर्षों में महत्वपूर्ण रणनीतिक लाभ प्रदान कर सकते हैं. आपको बता दें कि आने वाले समय में कोई देश नहीं चाहेगा कि युद्ध हो, क्योंकि इससे देश की आर्थिक स्थिति और और विकास पर गहरा असर पड़ता है. 

भारत ने अपनाया सतर्क रुख

नई दिल्ली ने संयुक्त राष्ट्र में पूर्ण प्रतिबंध लगाने की मांगों का समर्थन नहीं किया है. इसके बजाय, उसने तर्क दिया है कि इस मुद्दे पर गहन चर्चा और सावधानीपूर्वक जांच की आवश्यकता है. भारत का मानना ​​है कि उभरती हुई सैन्य प्रौद्योगिकियों पर समय से पहले प्रतिबंध नहीं लगाया जाना चाहिए क्योंकि वे भविष्य की रक्षा क्षमताओं में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं. साथ ही, भारतीय अधिकारियों ने बल प्रयोग पर सार्थक मानवीय नियंत्रण बनाए रखने के महत्व पर जोर दिया है.

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Written By: Kamesh Dwivedi
Last Updated: 2026-03-11 17:50:12

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Killer Robots Explained: कहते हैं ना विज्ञान जितना वरदान है उतना अभिशाप भी है. आज एआई और आधुनिक मशीनों ने लोगों का काम आसान कर दिया है. इस समय किलर रोबोट्स की चर्चा हो रही है. ये कुछ ऐसे हथियार हैं जो बिना मानव के हस्तक्षेप के खुद अपना निशाना चुन सकते हैं और हमला कर सकते हैं. इसीलिए दुनिया के करीब 30 देश इसके बैन की मांग कर रहे हैं, जबकि कुछ इसका समर्थन कर रहे हैं. जानिए इसके बारे में सबकुछ. 

क्या होता है किलर रोबोट?

‘किलर रोबोट’ अब आधुनिक युद्धक्षेत्रों में उतर रहे हैं. इसे टेक्निकल भाषा में लीथल ऑटोनॉमस वेपन सिस्टम (LAWS) कहा जाता है. ये ऐसे हथियार होते हैं जो एक बार सक्रिय होने के बाद अपने आप काम कर सकते हैं. सामान्य हथियारों में हर कदम पर इंसान का नियंत्रण होता है, लेकिन इन प्रणालियों में ऐसा नहीं होता. ये कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) की मदद से खुद ही युद्ध के मैदान में जरूरी फैसले ले सकती हैं.

कैसे काम करता है ये?

इन हथियारों के अंदर एआई सिस्टम लगा होता है, जो लाखों तस्वीरों और जानकारियों का विश्लेषण करके कुछ ही पलों में यह समझने की कोशिश करता है कि सामने दिख रहा व्यक्ति सैनिक है या आम नागरिक. इसके अलावा कई बार ये ड्रोन स्वार्म टेक्नोलॉजी के साथ काम करते हैं. इसका मतलब है कि सैकड़ों ड्रोन एक नेटवर्क की तरह आपस में जुड़े रहते हैं, एक-दूसरे से जानकारी साझा करते हैं और मिलकर किसी लक्ष्य पर हमला कर सकते हैं.

किस बात का हो रहा विरोध?

मानव जब युद्ध में उतरता है तो वह स्थित के अनुसार फैसला लेता है. वह देखता है कि कौन निर्दोष है या कौन दुश्मन. इस आधार पर वार करता है. मशीनों में संवेदनाएं भी नहीं होती हैं. इसलिए वह गलत फैसला भी ले सकती हैं. युद्ध की स्थिति को देखकर इंसान अपने साथियों और अधिकारियों को सही से पूरी जानकारी दे सकता है. वहीं मशीन से ऐसा कम करने की गुंजाइश है. साथ ही ये भी कहा जा रहा है कि अगर एआई कुछ भी गलत करेगा, तो इसकी जिम्मेदारी कौन लेगा? क्योंकि ये किसी की जान का सवाल है. 

30 से अधिक देशों ने जताया विरोध

ऑस्ट्रिया और न्यूजीलैंड सहित 30 से अधिक देशों ने संयुक्त राष्ट्र से इस तरह की प्रणालियों पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने का आग्रह किया है. क्योंकि इन देशों ने आने वाले समय की गंभीर समस्याओं का आंकने का प्रयास किया है. 

ये देश कर रहे समर्थन

वहीं अमेरिका, रूस, चीन और इजराइल सहित प्रमुख सैन्य शक्तियां इसका पुरजोर समर्थन करती हैं. ये देश तर्क देते हैं कि स्वायत्त हथियार भविष्य के संघर्षों में महत्वपूर्ण रणनीतिक लाभ प्रदान कर सकते हैं. आपको बता दें कि आने वाले समय में कोई देश नहीं चाहेगा कि युद्ध हो, क्योंकि इससे देश की आर्थिक स्थिति और और विकास पर गहरा असर पड़ता है. 

भारत ने अपनाया सतर्क रुख

नई दिल्ली ने संयुक्त राष्ट्र में पूर्ण प्रतिबंध लगाने की मांगों का समर्थन नहीं किया है. इसके बजाय, उसने तर्क दिया है कि इस मुद्दे पर गहन चर्चा और सावधानीपूर्वक जांच की आवश्यकता है. भारत का मानना ​​है कि उभरती हुई सैन्य प्रौद्योगिकियों पर समय से पहले प्रतिबंध नहीं लगाया जाना चाहिए क्योंकि वे भविष्य की रक्षा क्षमताओं में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं. साथ ही, भारतीय अधिकारियों ने बल प्रयोग पर सार्थक मानवीय नियंत्रण बनाए रखने के महत्व पर जोर दिया है.

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