K M Cariappa Indian Army: भारतीय सेना के पहले चीफ के.एम. करिअप्पा ने 1947 के भारत-पाकिस्तान युद्ध में अहम भूमिका निभाई थी, जो कश्मीर क्षेत्र में पश्चिमी मोर्चे पर हुआ था. उनकी काबिलियत को देखते हुए 1949 में उन्हें भारतीय सेना की कमान दी गई. इससे पहले सभी कमांडर ब्रिटिश थे.
सेना प्रमुख बनने के बाद करिअप्पा स्वतंत्र भारत के पहले फील्ड मार्शल भी बने. आइए जनरल के.एम. करिअप्पा के जीवन के बारे में विस्तार से जानते हैं.
आजाद भारत के पहले सेना प्रमुख और फील्ड मार्शल बने करिअप्पा (Karippa became the first Army Chief and Field Marshal of independent India)
स्वतंत्र भारत के पहले फील्ड मार्शल के.एम. करिअप्पा को 15 जनवरी, 1949 को भारतीय सेना का प्रमुख बनाया गया. इसके अलावा, आपकी जानकारी के लिए बतातें चलें कि वह भारतीय सेना की कमान संभालने वाले पहले भारतीय जनरल थे; उनसे पहले, सभी कमांडर ब्रिटिश अधिकारी थे. पहले सेना प्रमुख होने के अलावा, वह भारतीय सेना में पांच-सितारा रैंक रखने वाले पहले अधिकारी भी थे.
उन्होंने भारतीय सेना में तीस साल तक देश की सेवा की और 1953 में रिटायर हो गए. हालांकि, रिटायरमेंट के बाद भी फील्ड मार्शल करिअप्पा ने विभिन्न क्षमताओं में भारतीय सेना में योगदान देना जारी रखा. के.एम. करिअप्पा का निधन 15 मई, 1993 को बेंगलुरु में 94 साल की उम्र में हुआ.
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करिअप्पा ने संभाली सेना विभाजन की जिम्मेदारी (Kariappa took charge of the army division)
आजादी के बाद भारतीय सेना को मजबूत बनाने और एकजुट करने में करिअप्पा ने अहम भूमिका निभाई. उन्हें भारत के बंटवारे के दौरान सेना को बांटने की ज़िम्मेदारी भी सौंपी गई थी. 1947-48 के भारत-पाकिस्तान युद्ध के दौरान करिअप्पा ने पश्चिमी मोर्चे की कमान संभाली थी. ब्रिटिश सेना में रहते हुए करिअप्पा ने दूसरे विश्व युद्ध में भी अहम भूमिका निभाई थी. उन्हें ब्रिटिश सरकार ने अफ्रीका और बर्मा में लड़ने के लिए भेजा था.
करिअप्पा का जन्म 28 जनवरी, 1899 को कर्नाटक के कोडागु ज़िले में एक किसान परिवार में हुआ था. उन्होंने 1919 में ब्रिटिश शासन के तहत भारतीय सेना में जॉइन किया. ब्रिटिश काल के दौरान उन्होंने सेना में कई ऊंचे पदों पर काम किया.