Land for Jobs Case: सोमवार को राउज एवेन्यू कोर्ट ने पूर्व रेल मंत्री लालू प्रसाद यादव और पूर्व बिहार मुख्यमंत्री राबड़ी देवी के खिलाफ ‘लैंड फॉर जॉब’ सीबीआई मामले में औपचारिक रूप से आरोप तय कर दिए. दोनों अदालत में पेश हुए, आरोपों से इनकार किया और कहा कि वे मुकदमे का सामना करेंगे. यह मामला रेलवे के ग्रुप-D पदों पर नौकरी दिलाने के बदले जमीन लेने के आरोपों से जुड़ा है. विशेष न्यायाधीश विशाल गोगने ने इस मामले में दोनों पर आरोप तय किए. अदालत ने कहा कि आरोपियों को व्यक्तिगत रूप से पेश होना होगा, जब तक वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग की अनुमति न दी जाए.मिसा भारती ने कहा कि अदालत ने उम्र और स्वास्थ्य को देखते हुए वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए पेश होने की अनुमति दी है.
9 जनवरी को अदालत ने लालू प्रसाद यादव, राबड़ी देवी, तेजस्वी यादव, तेज प्रताप यादव, मीसा भारती समेत कई आरोपियों पर आरोप तय करने का आदेश दिया था. अदालत ने कहा था कि पहली नजर में ऐसा लगता है कि सरकारी नौकरी के बदले जमीन लेने की साजिश रची गई.अदालत ने कहा कि लालू प्रसाद यादव और उनका परिवार एक सिंडिकेट की तरह काम करता दिख रहा है, जिसमें नौकरी के बदले जमीन ली गई.
52 आरोपी बरी, 5 की हो चुकी है मौत
अदालत ने 52 आरोपियों को बरी कर दिया, जिनमें रेलवे के कई अधिकारी शामिल थे. इस मामले में 5 आरोपियों की सुनवाई के दौरान मौत हो चुकी है. सीबीआई ने कुल 103 लोगों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की थी.अदालत ने लालू प्रसाद यादव, राबड़ी देवी, मीसा भारती, हेमा यादव, तेजस्वी यादव, तेज प्रताप यादव, भोला यादव, आर.के. महाजन और प्रेम चंद गुप्ता के खिलाफ आपराधिक साजिश, धोखाधड़ी और भ्रष्टाचार के आरोप तय करने का आदेश दिया.
लालू प्रसाद यादव की ओर से वरिष्ठ वकील मनींदर सिंह ने दलील दी कि यह मामला राजनीतिक रूप से प्रेरित है. उन्होंने कहा कि ऐसा कोई सबूत नहीं है कि जमीन के बदले नौकरी दी गई. जमीन की खरीद-फरोख्त पैसे देकर हुई है.राबड़ी देवी की ओर से भी कहा गया कि उन्होंने जमीन पैसे देकर खरीदी है और इसमें कोई गैरकानूनी काम नहीं हुआ.
सीबीआई ने 2022 में दर्ज किया था केस
सीबीआई ने यह मामला 18 मई 2022 को दर्ज किया था और समय-समय पर दो चार्जशीट व दो सप्लीमेंट्री चार्जशीट दाखिल कीं. आरोप है कि रेलवे की ग्रुप-D नौकरियों के बदले जमीन ली गई.अदालत ने यह भी कहा कि कुछ रेलवे अधिकारियों ने अपने अधिकारों का दुरुपयोग करते हुए नियुक्तियां कीं, लेकिन मुख्य कार्मिक अधिकारियों को इस मामले में बरी कर दिया गया.