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महाराष्ट्र धर्म स्वतंत्रता विधेयक 2026 विधानसभा में पेश, जबरन धर्मांतरण पर 7 साल जेल और लाखों का जुर्माना; जानें 10 बड़े प्रावधान

महाराष्ट्र धर्म स्वतंत्रता विधेयक 2026: महाराष्ट्र धर्म स्वतंत्रता बिल देवेंद्र फडणवीस सरकार ने शुक्रवार को राज्य विधानसभा में पेश किया है. ऐसे में चलिए जानें कि इस विधेयक के विशेष प्रावधान क्या है.

Written By: Shristi S
Last Updated: 2026-03-13 19:41:52

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Maharashtra Freedom of Religion Bill 2026: देवेंद्र फडणवीस सरकार ने शुक्रवार को राज्य विधानसभा में ‘महाराष्ट्र धर्म स्वतंत्रता विधेयक 2026’ पेश किया. इस विधेयक में जबरदस्ती, धोखाधड़ी, प्रलोभन या शादी के ज़रिए किए जाने वाले धार्मिक धर्मांतरण पर रोक लगाने के लिए कड़े प्रावधान किए गए हैं.
 
पिछले हफ़्ते कैबिनेट द्वारा मंज़ूर किए गए ‘महाराष्ट्र धर्म स्वतंत्रता विधेयक 2026’ का लक्ष्य यह सुनिश्चित करना है कि धर्म परिवर्तन स्वैच्छिक और क़ानूनी हों. ऐसे में चलिए जानें कि इस विधेयक के विशेष प्रावधान क्या है.
 

विधेयक से जुड़े 10 बड़े प्रावधान

  • विधेयक के अनुसार, शादी की आड़ में गैर-कानूनी धर्मांतरण में शामिल लोगों को सात साल की जेल की सज़ा होगी और उन पर 1 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया जाएगा.
  • नाबालिग, मानसिक रूप से अस्वस्थ व्यक्ति, महिला या अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति से संबंधित व्यक्ति के मामले में उल्लंघन करने पर सात साल की जेल और 5 लाख रुपये का जुर्माना होगा.
  • सामूहिक धर्मांतरण के मामले में सात साल की जेल और 5 लाख रुपये का जुर्माना होगा. विधेयक के अनुसार, बार-बार अपराध करने वाले व्यक्ति को 10 साल की जेल और 5 लाख रुपये का जुर्माना हो सकता है.
  • विधेयक में पुलिस थाने के प्रभारी अधिकारी के लिए यह अनिवार्य किया गया है कि वह किसी भी व्यक्ति द्वारा की गई शिकायत को दर्ज करे.
  • मसौदा कानून के अनुसार, यह विधेयक धर्म की स्वतंत्रता के संवैधानिक अधिकार की रक्षा करना चाहता है, साथ ही प्रलोभन, ज़ोर-ज़बरदस्ती, गलतबयानी, अनुचित प्रभाव या धोखाधड़ी के साधनों के ज़रिए किए गए धर्मांतरण पर रोक लगाता है.
  • प्रस्तावित कानून के तहत, किसी भी व्यक्ति या संस्था को उपहार, पैसा, रोज़गार, मुफ्त शिक्षा, शादी का वादा, बेहतर जीवनशैली या दैवीय उपचार का प्रस्ताव देकर किसी व्यक्ति को एक धर्म से दूसरे धर्म में परिवर्तित करने या परिवर्तित करने का प्रयास करने की अनुमति नहीं होगी. इन चीज़ों को प्रलोभन की श्रेणी में रखा गया है.
  • मसौदा कानून के अनुसार, यह विधेयक शादी या शादी के वादे के ज़रिए किए गए धर्मांतरण पर भी रोक लगाता है, यदि ऐसे कृत्यों में प्रलोभन, ज़ोर-ज़बरदस्ती या धोखा शामिल हो.
  • विधेयक के उद्देश्यों और कारणों के विवरण में, सरकार ने कहा कि देश के विभिन्न हिस्सों में ज़ोर-ज़बरदस्ती और संगठित धार्मिक धर्मांतरण की घटनाएं सामने आई हैं, और अक्सर कमज़ोर वर्गों को प्रलोभन देकर निशाना बनाया जाता है.
  • विधेयक के अनुसार, हालाँकि संविधान धर्म की स्वतंत्रता की गारंटी देता है, लेकिन यह अधिकार सार्वजनिक व्यवस्था, नैतिकता और स्वास्थ्य के अधीन है, और इसमें किसी अन्य व्यक्ति को ज़ोर-ज़बरदस्ती परिवर्तित करने का अधिकार शामिल नहीं है.
  • यह बिल ज़बरदस्ती को किसी व्यक्ति या समूह को उनकी मर्ज़ी के खिलाफ धर्म बदलने के लिए मजबूर करने के काम के तौर पर परिभाषित करता है, जबकि सामूहिक धर्म-परिवर्तन का मतलब है दो या उससे ज़्यादा लोगों का एक ही समय पर धर्म बदलना.
 

कानूनी धार्मिक धर्मांतरण की प्रक्रिया

  • व्यक्तियों को धर्मांतरण से 60 दिन पहले सक्षम प्राधिकारी को सूचित करना होगा.
  • 30 दिनों के भीतर आपत्तियाँ उठाई जा सकती हैं, जिसके बाद पुलिस जाँच कर सकती है.
  • धर्मांतरण के 21 दिनों के भीतर, व्यक्ति और आयोजन करने वाली संस्था को एक घोषणा पत्र जमा करना होगा.
  • निर्धारित समय के भीतर घोषणा पत्र जमा न करने पर धर्मांतरण अमान्य माना जाएगा.
  • प्रस्तावित कानून में अवैध धर्मांतरण से प्रभावित बच्चों के पुनर्वास, भरण-पोषण और अभिरक्षा के प्रावधान भी शामिल हैं.
 
गृह राज्य मंत्री पंकज भोयर ने  बिल पेश किया करते समय यह भी कहा कि यदि यह विधेयक कानून बन जाता है, तो महाराष्ट्र भी उत्तर प्रदेश, गुजरात, मध्य प्रदेश, कर्नाटक और उत्तराखंड जैसे उन राज्यों की श्रेणी में शामिल हो जाएगा, जिन्होंने धार्मिक धर्मांतरण को विनियमित करने के लिए इसी तरह के कानून बनाए हैं. इसका मकसद धर्म की आज़ादी के अधिकार की रक्षा करना है. इसका एक और मकसद ज़बरदस्ती, धोखे, लालच या शादी के ज़रिए होने वाले गैर-कानूनी धर्म-परिवर्तन पर रोक लगाना भी है.

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Written By: Shristi S
Last Updated: 2026-03-13 19:41:52

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Maharashtra Freedom of Religion Bill 2026: देवेंद्र फडणवीस सरकार ने शुक्रवार को राज्य विधानसभा में ‘महाराष्ट्र धर्म स्वतंत्रता विधेयक 2026’ पेश किया. इस विधेयक में जबरदस्ती, धोखाधड़ी, प्रलोभन या शादी के ज़रिए किए जाने वाले धार्मिक धर्मांतरण पर रोक लगाने के लिए कड़े प्रावधान किए गए हैं.
 
पिछले हफ़्ते कैबिनेट द्वारा मंज़ूर किए गए ‘महाराष्ट्र धर्म स्वतंत्रता विधेयक 2026’ का लक्ष्य यह सुनिश्चित करना है कि धर्म परिवर्तन स्वैच्छिक और क़ानूनी हों. ऐसे में चलिए जानें कि इस विधेयक के विशेष प्रावधान क्या है.
 

विधेयक से जुड़े 10 बड़े प्रावधान

  • विधेयक के अनुसार, शादी की आड़ में गैर-कानूनी धर्मांतरण में शामिल लोगों को सात साल की जेल की सज़ा होगी और उन पर 1 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया जाएगा.
  • नाबालिग, मानसिक रूप से अस्वस्थ व्यक्ति, महिला या अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति से संबंधित व्यक्ति के मामले में उल्लंघन करने पर सात साल की जेल और 5 लाख रुपये का जुर्माना होगा.
  • सामूहिक धर्मांतरण के मामले में सात साल की जेल और 5 लाख रुपये का जुर्माना होगा. विधेयक के अनुसार, बार-बार अपराध करने वाले व्यक्ति को 10 साल की जेल और 5 लाख रुपये का जुर्माना हो सकता है.
  • विधेयक में पुलिस थाने के प्रभारी अधिकारी के लिए यह अनिवार्य किया गया है कि वह किसी भी व्यक्ति द्वारा की गई शिकायत को दर्ज करे.
  • मसौदा कानून के अनुसार, यह विधेयक धर्म की स्वतंत्रता के संवैधानिक अधिकार की रक्षा करना चाहता है, साथ ही प्रलोभन, ज़ोर-ज़बरदस्ती, गलतबयानी, अनुचित प्रभाव या धोखाधड़ी के साधनों के ज़रिए किए गए धर्मांतरण पर रोक लगाता है.
  • प्रस्तावित कानून के तहत, किसी भी व्यक्ति या संस्था को उपहार, पैसा, रोज़गार, मुफ्त शिक्षा, शादी का वादा, बेहतर जीवनशैली या दैवीय उपचार का प्रस्ताव देकर किसी व्यक्ति को एक धर्म से दूसरे धर्म में परिवर्तित करने या परिवर्तित करने का प्रयास करने की अनुमति नहीं होगी. इन चीज़ों को प्रलोभन की श्रेणी में रखा गया है.
  • मसौदा कानून के अनुसार, यह विधेयक शादी या शादी के वादे के ज़रिए किए गए धर्मांतरण पर भी रोक लगाता है, यदि ऐसे कृत्यों में प्रलोभन, ज़ोर-ज़बरदस्ती या धोखा शामिल हो.
  • विधेयक के उद्देश्यों और कारणों के विवरण में, सरकार ने कहा कि देश के विभिन्न हिस्सों में ज़ोर-ज़बरदस्ती और संगठित धार्मिक धर्मांतरण की घटनाएं सामने आई हैं, और अक्सर कमज़ोर वर्गों को प्रलोभन देकर निशाना बनाया जाता है.
  • विधेयक के अनुसार, हालाँकि संविधान धर्म की स्वतंत्रता की गारंटी देता है, लेकिन यह अधिकार सार्वजनिक व्यवस्था, नैतिकता और स्वास्थ्य के अधीन है, और इसमें किसी अन्य व्यक्ति को ज़ोर-ज़बरदस्ती परिवर्तित करने का अधिकार शामिल नहीं है.
  • यह बिल ज़बरदस्ती को किसी व्यक्ति या समूह को उनकी मर्ज़ी के खिलाफ धर्म बदलने के लिए मजबूर करने के काम के तौर पर परिभाषित करता है, जबकि सामूहिक धर्म-परिवर्तन का मतलब है दो या उससे ज़्यादा लोगों का एक ही समय पर धर्म बदलना.
 

कानूनी धार्मिक धर्मांतरण की प्रक्रिया

  • व्यक्तियों को धर्मांतरण से 60 दिन पहले सक्षम प्राधिकारी को सूचित करना होगा.
  • 30 दिनों के भीतर आपत्तियाँ उठाई जा सकती हैं, जिसके बाद पुलिस जाँच कर सकती है.
  • धर्मांतरण के 21 दिनों के भीतर, व्यक्ति और आयोजन करने वाली संस्था को एक घोषणा पत्र जमा करना होगा.
  • निर्धारित समय के भीतर घोषणा पत्र जमा न करने पर धर्मांतरण अमान्य माना जाएगा.
  • प्रस्तावित कानून में अवैध धर्मांतरण से प्रभावित बच्चों के पुनर्वास, भरण-पोषण और अभिरक्षा के प्रावधान भी शामिल हैं.
 
गृह राज्य मंत्री पंकज भोयर ने  बिल पेश किया करते समय यह भी कहा कि यदि यह विधेयक कानून बन जाता है, तो महाराष्ट्र भी उत्तर प्रदेश, गुजरात, मध्य प्रदेश, कर्नाटक और उत्तराखंड जैसे उन राज्यों की श्रेणी में शामिल हो जाएगा, जिन्होंने धार्मिक धर्मांतरण को विनियमित करने के लिए इसी तरह के कानून बनाए हैं. इसका मकसद धर्म की आज़ादी के अधिकार की रक्षा करना है. इसका एक और मकसद ज़बरदस्ती, धोखे, लालच या शादी के ज़रिए होने वाले गैर-कानूनी धर्म-परिवर्तन पर रोक लगाना भी है.

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