मुंबई से सटे भाईंदर इलाके के एक सरकारी अस्पताल से ऐसी खबर सामने आई है, जो किसी के भी रोंगटे खड़े कर दे. जहाँ बीमार इंसान की जान बचाने की जद्दोजहद होती है, उस एक 89 साल की बुजुर्ग महिला को चूहे ने इस कदर कुतर डाला कि उनकी जान ही चली गई. इस खौफनाक घटना के बाद सरकारी अस्पतालों की सफाई और मरीजों की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं.
क्या है पूरा मामला?
मृत महिला की पहचान सुहासिनी माठेकर (89 वर्ष) के रूप में हुई है. उन्हें 12 मार्च को भाईंदर पश्चिम स्थित भारत रत्न पंडित भीमसेन जोशी अस्पताल में भर्ती कराया गया था. हालत गंभीर होने की वजह से उन्हें चौथी मंजिल पर बने ICU में वेंटिलेटर पर रखा गया था. परिवार को उम्मीद थी कि उनकी माँ मौत को मात देकर घर लौटेंगी, लेकिन उन्हें क्या पता था कि अस्पताल के भीतर ही ‘काल’ चूहों के रूप में घूम रहा है.
परिजनों का आरोप
परिजनों का आरोप है कि रविवार की देर रात ICU के भीतर चूहे ने सुहासिनी माठेकर के हाथ को बुरी तरह कुतरना शुरू कर दिया. सोमवार सुबह जब करीब 6 बजे परिवार उनसे मिलने पहुंचा, तो उनके पैरों तले जमीन खिसक गई. बुजुर्ग महिला के दाहिने हाथ पर गहरे घाव थे और बिस्तर खून से लथपथ था. आरोप है कि रात भर अस्पताल का स्टाफ सोता रहा और चूहा बेबस बुजुर्ग महिला को नोचता रहा.
प्रशासन की कार्रवाई
परिजनों का कहना है कि घाव गहरा होने की वजह से काफी खून बह चुका था, जिसके कारण दोपहर तक उनकी मौत हो गई. सवाल यह उठता है कि जिस ICU में हर पल डॉक्टरों और नर्सों की नजर होनी चाहिए, वहां इतनी बड़ी घटना हो गई और किसी को भनक तक नहीं लगी? क्या वेंटिलेटर पर पड़ी एक लाचार बुजुर्ग महिला की सुरक्षा की जिम्मेदारी किसी की नहीं थी? इस मामले के तूल पकड़ने और राजनीतिक दलों के दबाव के बाद अस्पताल प्रशासन ने अब जाकर अपनी आँखें खोली हैं. मामले की जांच के लिए एक कमेटी बनाई गई है और ड्यूटी पर मौजूद डॉक्टर व नर्स को नोटिस जारी किया गया है.