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Mumbai BMC Election 2026: क्या महा विकास अघाड़ी कर रहा कोई बड़ी साजिश? खो सकती है मुंबई की असली पहचान

Mumbai BMC Election 2026: आम जनता की यही मांग है कि राजनेता वोट बैंक के लिए समाज के मूल ढांचे के साथ मत खेलें. मुंबई की असली पहचान को बनाए रखना हर पॉलिटिकल पार्टी का कर्तव्य है.

Written By: Pushpendra Trivedi
Edited By: JP YADAV
Last Updated: 2026-01-09 13:42:21

Mumbai BMC Election 2026: देश की फाइनेंशियल कैपिटल इन दिनों सियासतदारों की रणभूमि बनी हुई है. जैसे ही इलेक्शन की घड़ियां पास आ रही हैं वैसे ही राजनीति और तेज होती जा रही है. आरोप-प्रत्यारोप का सिलसिला तेज हो गया है और इसी क्रम में महाविकास आघाड़ी (MVA) पर आरोप लगने शुरू हो गए हैं. कहा जा रहा है कि उनकी पॉलिसी से मुंबई में एक विशेष वर्ग का दबदबा बढ़ेगा, जिससे शहर की मूल पहचान खोने का डर है. सियासत के घेरे में फंसी मुंबई पर जैसे काले बादल छाए हुए हैं.

मामला सिर्फ यहीं तक ही सीमित नहीं है, बल्कि बेहरामपाड़ा, मालवणी और कुर्ला में जो अनधिकृत बस्तियां हैं, वो भी इस बहस का सेंट्रल पॉइंट बनी हुई हैं. महाविकास अघाड़ी पर यह आरोप भी लगाए जा रहे हैं कि वह झुग्गी-झोपड़ी पुनर्वास के नाम पर कानूनी दर्जा देने के प्रयास में लगी है. हालांकि, राजनैतिक गलियारों में इसका विरोध भी हुआ. जानकारी के मुताबिक, लोगों का कहना है कि यह सुधार नहीं, बल्कि सोची समझी राजनीतिक साजिश है. अब हर गली में एक ही सवाल सुनने को मिल रहा है कि मुंबई की दिशा क्या होगी. 

अवैध बस्ती पर किसकी नजर?

मुंबई के बेहरामपाड़ा, मालवणी और कुर्ला जैसे हिस्सों में अवैध बस्तियों का बड़े लेवल पर विस्तार देखा गया. इन झुग्गी-झोपड़ी वाले इलाकों को महाविकास आघाड़ी के शासनकाल के दौरान वैध बनाने के आरोप लगते रहे. इस मामले को ‘झुग्गी-झोपड़ी पुनर्वास योजना’ के तहत नहीं, बल्कि गहरी सियासत रणनीति के तौर पर देखा जा रहा है. आलोचकों ने भी इस पर तर्क देते हुए कहा कि इससे एक बड़ा वोट बैंक तैयार हो सकता है. आलोचक इसे सिर्फ प्रशासनिक डिसीजन नहीं, बल्कि मुंबई के जनसांख्यिकीय संतुलन को स्थायी रूप से बदलने की सोची-समझी कोशिश मानते हैं. इसका असर मुंबई के चुनाव पर भी देखने को मिल सकता है.

मराठी अस्मिता पर सवाल 

मुंबई में मराठी लोगों की पहचान पर कई सालों से सियासत चमकती रही है. हालांकि, अब ‘उद्धव बालासाहेब ठाकरे’ (UBT) गुट भी लोगों की नजरों में गिरता जा रहा है. उन पर आरोप है कि यूबीटी ने वोट बैंक की खातिर मराठी लोगों को शहर से विस्थापित करके बांग्लादेशी एवं रोहिंग्या मुसलमानों को पनाह दी. अगर वास्तविकता देखी जाए तो मुंबई में बढ़ती महंगाई और घरों की ऊंची कीमतों की वजह से मध्यमवर्गीय मराठी आबादी को मुख्य शहर को छोड़कर ठाणे, कल्याण, डोंबिवली तथा विरार जैसे इलाकों में विस्थापित होना पड़ा. 

शहर में अवैध घुसपैठ भी सुरक्षा के लिए एक संवेदनशील मुद्दा बना हुआ है. विदेशी घुसपैठियों के पास से यदि राशन या आधार कार्ड जैसे अहम डॉक्यूमेंट बरामद होते हैं तो यह काफी चिंता का विषय है. राष्ट्रीय सुरक्षा के लिहाज से भी यह ठीक नहीं है. विपक्ष ने भी आरोप लगाते हुए कहा कि “मराठी लोगों का साथ छूटने पर यह रिक्तता भरने के लिए ‘वोट जिहाद’ का सहारा लिया जा रहा है.” 

विवादों में रही महाविकास अघाड़ी

महाविकास आघाड़ी के कार्यकाल में याकूब मेमन की कब्र के सौंदर्यीकरण और अजान प्रतियोगिताओं जैसे मामलों पर सवाल उठे थे. आलोचकों के अनुसार, आतंकवादियों से जुड़े मामलों का महिमामंडन समाज के लिए बहुत खतरनाक है. इस तरह के कामों से कट्टरपंथी ताकतों को बल मिलता है. वहीं, महापौर पद की बात होते ही राजनीतिक विशेषज्ञों का कहना है कि हिंदू समाज को भाषा, जाति में उलझाकर रखा जाता है और मुसलमानों से वोट लेकर सत्ता पर काबिज होने की होड़ रहती है.

 इस तरह की बातें सिर्फ मुंबई में ही नहीं बल्कि पूरे प्रदेश में यही हाल है. राजनीति के सौदागर मुंबई की अस्मिता के साथ खेल रहे हैं. यह शहर देश की आर्थिक धुरी है. अवैध प्रवासियों को यहां पर बसाकर मूल प्रवासियों की जनसांख्यिकी संरचना को बदला जा रहा है. मुंबई के लोगों को यह तय करना होगा कि उन्हें विकास पर आधारित राजनीति चाहिए कि ऐसी सत्ता जो शहर की मूल भावना और कल्चर को अधेरे में डाल दे. आम जनता की यही मांग है कि राजनेता वोट बैंक के लिए समाज के मूल ढांचे के साथ मत खेलें. मुंबई की असली पहचान को बनाए रखना हर पॉलिटिकल पार्टी का कर्तव्य है.

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Mumbai BMC Election 2026: क्या महा विकास अघाड़ी कर रहा कोई बड़ी साजिश? खो सकती है मुंबई की असली पहचान

Mumbai BMC Election 2026: आम जनता की यही मांग है कि राजनेता वोट बैंक के लिए समाज के मूल ढांचे के साथ मत खेलें. मुंबई की असली पहचान को बनाए रखना हर पॉलिटिकल पार्टी का कर्तव्य है.

Written By: Pushpendra Trivedi
Edited By: JP YADAV
Last Updated: 2026-01-09 13:42:21

Mumbai BMC Election 2026: देश की फाइनेंशियल कैपिटल इन दिनों सियासतदारों की रणभूमि बनी हुई है. जैसे ही इलेक्शन की घड़ियां पास आ रही हैं वैसे ही राजनीति और तेज होती जा रही है. आरोप-प्रत्यारोप का सिलसिला तेज हो गया है और इसी क्रम में महाविकास आघाड़ी (MVA) पर आरोप लगने शुरू हो गए हैं. कहा जा रहा है कि उनकी पॉलिसी से मुंबई में एक विशेष वर्ग का दबदबा बढ़ेगा, जिससे शहर की मूल पहचान खोने का डर है. सियासत के घेरे में फंसी मुंबई पर जैसे काले बादल छाए हुए हैं.

मामला सिर्फ यहीं तक ही सीमित नहीं है, बल्कि बेहरामपाड़ा, मालवणी और कुर्ला में जो अनधिकृत बस्तियां हैं, वो भी इस बहस का सेंट्रल पॉइंट बनी हुई हैं. महाविकास अघाड़ी पर यह आरोप भी लगाए जा रहे हैं कि वह झुग्गी-झोपड़ी पुनर्वास के नाम पर कानूनी दर्जा देने के प्रयास में लगी है. हालांकि, राजनैतिक गलियारों में इसका विरोध भी हुआ. जानकारी के मुताबिक, लोगों का कहना है कि यह सुधार नहीं, बल्कि सोची समझी राजनीतिक साजिश है. अब हर गली में एक ही सवाल सुनने को मिल रहा है कि मुंबई की दिशा क्या होगी. 

अवैध बस्ती पर किसकी नजर?

मुंबई के बेहरामपाड़ा, मालवणी और कुर्ला जैसे हिस्सों में अवैध बस्तियों का बड़े लेवल पर विस्तार देखा गया. इन झुग्गी-झोपड़ी वाले इलाकों को महाविकास आघाड़ी के शासनकाल के दौरान वैध बनाने के आरोप लगते रहे. इस मामले को ‘झुग्गी-झोपड़ी पुनर्वास योजना’ के तहत नहीं, बल्कि गहरी सियासत रणनीति के तौर पर देखा जा रहा है. आलोचकों ने भी इस पर तर्क देते हुए कहा कि इससे एक बड़ा वोट बैंक तैयार हो सकता है. आलोचक इसे सिर्फ प्रशासनिक डिसीजन नहीं, बल्कि मुंबई के जनसांख्यिकीय संतुलन को स्थायी रूप से बदलने की सोची-समझी कोशिश मानते हैं. इसका असर मुंबई के चुनाव पर भी देखने को मिल सकता है.

मराठी अस्मिता पर सवाल 

मुंबई में मराठी लोगों की पहचान पर कई सालों से सियासत चमकती रही है. हालांकि, अब ‘उद्धव बालासाहेब ठाकरे’ (UBT) गुट भी लोगों की नजरों में गिरता जा रहा है. उन पर आरोप है कि यूबीटी ने वोट बैंक की खातिर मराठी लोगों को शहर से विस्थापित करके बांग्लादेशी एवं रोहिंग्या मुसलमानों को पनाह दी. अगर वास्तविकता देखी जाए तो मुंबई में बढ़ती महंगाई और घरों की ऊंची कीमतों की वजह से मध्यमवर्गीय मराठी आबादी को मुख्य शहर को छोड़कर ठाणे, कल्याण, डोंबिवली तथा विरार जैसे इलाकों में विस्थापित होना पड़ा. 

शहर में अवैध घुसपैठ भी सुरक्षा के लिए एक संवेदनशील मुद्दा बना हुआ है. विदेशी घुसपैठियों के पास से यदि राशन या आधार कार्ड जैसे अहम डॉक्यूमेंट बरामद होते हैं तो यह काफी चिंता का विषय है. राष्ट्रीय सुरक्षा के लिहाज से भी यह ठीक नहीं है. विपक्ष ने भी आरोप लगाते हुए कहा कि “मराठी लोगों का साथ छूटने पर यह रिक्तता भरने के लिए ‘वोट जिहाद’ का सहारा लिया जा रहा है.” 

विवादों में रही महाविकास अघाड़ी

महाविकास आघाड़ी के कार्यकाल में याकूब मेमन की कब्र के सौंदर्यीकरण और अजान प्रतियोगिताओं जैसे मामलों पर सवाल उठे थे. आलोचकों के अनुसार, आतंकवादियों से जुड़े मामलों का महिमामंडन समाज के लिए बहुत खतरनाक है. इस तरह के कामों से कट्टरपंथी ताकतों को बल मिलता है. वहीं, महापौर पद की बात होते ही राजनीतिक विशेषज्ञों का कहना है कि हिंदू समाज को भाषा, जाति में उलझाकर रखा जाता है और मुसलमानों से वोट लेकर सत्ता पर काबिज होने की होड़ रहती है.

 इस तरह की बातें सिर्फ मुंबई में ही नहीं बल्कि पूरे प्रदेश में यही हाल है. राजनीति के सौदागर मुंबई की अस्मिता के साथ खेल रहे हैं. यह शहर देश की आर्थिक धुरी है. अवैध प्रवासियों को यहां पर बसाकर मूल प्रवासियों की जनसांख्यिकी संरचना को बदला जा रहा है. मुंबई के लोगों को यह तय करना होगा कि उन्हें विकास पर आधारित राजनीति चाहिए कि ऐसी सत्ता जो शहर की मूल भावना और कल्चर को अधेरे में डाल दे. आम जनता की यही मांग है कि राजनेता वोट बैंक के लिए समाज के मूल ढांचे के साथ मत खेलें. मुंबई की असली पहचान को बनाए रखना हर पॉलिटिकल पार्टी का कर्तव्य है.

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