Union Budget 2026: केंद्र सरकार 1961 के पुराने इनकम टैक्स एक्ट की जगह 2025 का नया इनकम टैक्स एक्ट लाएगी. यह एक्ट 1 अप्रैल, 2026 से लागू होगा. टैक्स दरों या स्लैब में कोई बदलाव नहीं है. नया एक्ट सिर्फ टैक्स रिटर्न फाइल करने की प्रक्रिया को आसान बनाएगा. इसका मतलब है कि सरकार नई टैक्स व्यवस्था( New Tax Regime) को ज्यादा बढ़ावा दे रही है, लेकिन पुरानी टैक्स व्यवस्था( Old Tax Regime) अभी खत्म नहीं हुई है.
पुराने टैक्स स्लैब का क्या होगा?
अब आपके मन में ये सवाल होगा कि जब नया टैक्स एक्ट लागू होगा तो फिर पुराने टैक्स स्लैब का क्या होगा? पुराना टैक्स स्लैब (Old Tax Regime) अभी भी उपलब्ध रहेगा. यह पूरी तरह से खत्म नहीं किया गया है. आप अपनी मर्जी से पुरानी व्यवस्था चुन सकते हैं. फॉर्म भरते समय नए टैक्स एक्ट को बाई डिफॉल्ट सेट कर दिया जायेगा अगर आप पुराने एक्ट को चुनना चाहें तो आप चुन सकते हैं. अगर आप HRA, LIC (80C), होम लोन ब्याज या मेडिकल इंश्योरेंस (80D) जैसी छूट का फायदा उठाना चाहते हैं, तो पुरानी व्यवस्था आपके लिए बेहतर हो सकती है. सरकार ने पुराने स्लैब की दरों या छूट की सीमाओं में कोई खास बदलाव नहीं किया है; वे वैसी ही रहेंगी जैसी पहले थीं.
‘नया टैक्स एक्ट’ लागू होने का असली मतलब
जब हम कहते हैं कि 1 अप्रैल से नया स्लैब लागू होगा, तो उसका मुख्य अर्थ यह है, अब से ‘New Tax Regime’ आपका डिफ़ॉल्ट (Default) विकल्प होगा। यानी अगर आप खुद से फॉर्म भरते समय ‘पुरानी व्यवस्था’ नहीं चुनेंगे, तो टैक्स अपने आप ‘नई व्यवस्था’ के हिसाब से कट जाएगा। नई व्यवस्था में टैक्स की दरें कम रखी गई हैं और ₹12 लाख तक की आय (Rebate और Standard Deduction मिलाकर) पर टैक्स लगभग ज़ीरो हो गया है. वहीं अगर आप पहले वाली व्यवस्था से टैक्स पे करते हैं तो अभी भी उस व्यवस्था से आपके 4-8 लाख तक की इनकम पर 5 प्रतिशत टैक्स जबकि 8 से 12 लाख तक के इनकम पर 10 प्रतिशत टैक्स कट जाएगा.
इनकम टैक्स से जुड़े 4 बदलाव इस प्रकार हैं:
- केंद्र सरकार 1961 के पुराने इनकम टैक्स एक्ट की जगह 2025 का नया इनकम टैक्स एक्ट लाएगी. यह 1 अप्रैल, 2026 से लागू होगा. टैक्स दरों या स्लैब में कोई बदलाव नहीं है; नया एक्ट सिर्फ टैक्स रिटर्न फाइल करने की प्रक्रिया को आसान बनाएगा.
- अब शिक्षा और मेडिकल इलाज के लिए विदेश पैसे भेजने पर कम टैक्स कलेक्टेड एट सोर्स (TCS) लगेगा। सरकार ने इसे 5% से घटाकर 2% करने का फैसला किया है। फॉरेन टूर पैकेज पर 5% और 20% की TCS दरें भी घटाकर 2% कर दी गई हैं.
- टैक्स डिडक्टेड एट सोर्स (TDS) से छूट के लिए अलग से आवेदन जमा करने की ज़रूरत नहीं होगी. नियमों के अनुसार, अगर आप इनकम टैक्स के लिए ज़िम्मेदार नहीं हैं, तो आपका TDS नहीं काटा जाएगा। फिलहाल, इसके लिए फॉर्म 15G (60 साल से कम उम्र वालों के लिए) या फॉर्म 15H (सीनियर सिटिज़न्स के लिए) जमा करना पड़ता है.
- इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) में सुधार करने की आखिरी तारीख बढ़ा दी गई है. अब, रिवाइज्ड रिटर्न 31 दिसंबर के बजाय 31 मार्च तक मामूली फीस के साथ फाइल किए जा सकते हैं.
आपको एकबार फिर समझाते हैं कि टैक्स सिस्टम में कोई बदलाव नहीं हुआ है. अगर आप पुराना टैक्स सिस्टम चुनते हैं, तो आपकी ₹2.5 लाख तक की इनकम अभी भी टैक्स-फ्री रहेगी. हालांकि, इनकम टैक्स एक्ट की धारा 87A के तहत, आप ₹5 लाख तक की इनकम पर टैक्स बचा सकते हैं.
इसी तरह, अगर आप नया टैक्स सिस्टम चुनते हैं, तो पहले की तरह, आपको ₹4 लाख तक की इनकम पर टैक्स नहीं देना होगा. इनकम टैक्स एक्ट की धारा 87A के तहत, सैलरी पाने वाले लोग ₹12.75 लाख तक की इनकम पर और दूसरे लोग ₹12 लाख तक की इनकम पर टैक्स छूट का फायदा उठा सकते हैं.