Israel Iran War: वैश्विक अर्थव्यवस्था में मची उथल-पुथल और मिडल ईस्ट में बढ़ते तनाव के बीच केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने देश की आर्थिक स्थिति को लेकर एक स्पष्ट और बेबाक तस्वीर पेश की है. वित्त मंत्री ने संकेत दिया कि भले बाहरी कारकों पर सरकार का सीधा नियंत्रण नहीं है, लेकिन भारत हर स्थिति से निपटने के लिए कोविड काल जैसी मुस्तैदी दिखा रहा है.
डॉलर के मुकाबले रुपये की गिरती कीमत पर बोलते हुए वित्त मंत्री ने स्वीकार किया कि यह बाजार की ताकतों पर निर्भर है. उन्होंने कहा, ‘डॉलर की मजबूती के सामने रुपये के उतार-चढ़ाव पर सरकार का सीधा नियंत्रण नहीं है. आरबीआई स्थिति पर नजर बनाए हुए है, लेकिन वह कितनी बड़ी मात्रा में विदेशी मुद्रा बाजार में हस्तक्षेप करेगा, यह पहले से नहीं कहा जा सकता.’
महंगाई और तेल के बढ़ते दाम
वित्त मंत्री ने आम आदमी की जेब पर पड़ने वाले बोझ यानी पेट्रोल-डीजल की कीमतों पर भी संकेत दिए. उन्होंने कहा कि पूरी दुनिया में ईंधन के दाम बढ़े हैं, जिसका असर भारत पर भी पड़ सकता है. हालांकि, उन्होंने राहत की बात यह कही कि दुनिया के अन्य विकसित और विकासशील देशों की तुलना में भारत की आर्थिक स्थिति काफी बेहतर और स्थिर है. सीतारमण ने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि यदि पश्चिम एशिया संकट लंबा खिंचता है, तो वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला प्रभावित होगी और स्थितियां बिगड़ सकती हैं. सरकार इस पर पैनी नजर रखे हुए है और हर सप्ताह उच्च स्तरीय समीक्षा की जा रही है.
अफवाहों पर लगाम
मजदूरों के पलायन की खबरों को सिरे से खारिज करते हुए उन्होंने कहा, ‘पलायन की खबरें पूरी तरह गलत हैं। रेलवे, वित्त मंत्रालय और खुद पीएमओ इसकी दैनिक रिपोर्ट ले रहे हैं. कहीं भी पलायन की स्थिति नहीं है.’ वहीं, फर्टिलाइजर की कमी पर उन्होंने स्पष्ट किया कि कुछ लोगों द्वारा स्टॉक जमा करने की वजह से किल्लत महसूस हुई है. राज्यों को सख्त निर्देश दिए गए हैं कि जमाखोरों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए.
सोना और अर्थव्यवस्था
सोने की कीमतों में आई हालिया गिरावट को वित्त मंत्री ने सकारात्मक बताया. उन्होंने कहा कि पहले दाम बहुत ज्यादा थे, अब कीमतों का कम होना उपभोक्ताओं और बाजार के लिए अच्छा संकेत है.