क्या था पूरा मामला?
निचली अदालत ने 14 साल की सुनाई थी सजा
हालांकि हाई कोर्ट ने माना कि कॉन्फिडेंशियल डॉक्यूमेंट्स एक पर्सनल डिवाइस पर थे, लेकिन प्रॉसिक्यूशन यह साबित नहीं कर सका कि निशांत अग्रवाल ने जानबूझकर या देशद्रोह के इरादे से पाकिस्तान को कोई जानकारी लीक की. इस आधार पर, सभी गंभीर आरोप (जासूसी, युद्ध छेड़ने की साज़िश, वगैरह) हटा दिए गए, और सिर्फ पर्सनल डिवाइस पर कॉन्फिडेंशियल डॉक्यूमेंट्स रखने का छोटा सा जुर्म बचा, जिसके लिए वह पहले ही जेल की सज़ा काट चुका था.