कहते हैं ना कि विकास के लिए कुछ नियमों को तोड़ना पड़ता है. कुछ ऐसा ही उदाहरण नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट ने पेश किया है. इसने 150 किलोमीटर की दूरी वाले नियम को तोड़ दिया है और इंदिरा गांधी इंटरनेशनल एयरपोर्ट से महज 61 किलोमीटर की दूरी पर बनकर तैयार है. बस ही कुछ ही दिनों में यानी कि 28 मार्च से इसका उद्घाटन होने वाला है. चलिए जानते हैं कि क्या है एयरपोर्ट की दूरी वाला नियम.
किन नियमों को तोड़ने की कही जा रही बात?
आपको बता दें कि अगर किसी जगह पहले से एक एयरपोर्ट बना हुआ है, तो उसके आसपास 150 किलोमीटर के दायरे में नया एयरपोर्ट बनाने की अनुमति नहीं दी जाती. यानी, दो एयरपोर्ट के बीच कम से कम 150 किमी की दूरी होना जरूरी है, ताकि वे एक-दूसरे के बहुत पास न हों और हवाई संचालन में कोई दिक्कत न आए. नोएडा में बने इंटरनेशनल एयरपोर्ट से इंदिरा गांधी इंटरनेशनल एयरपोर्ट (IGI) की दूरी महज 61 किलोमीटर की दूरी है. इसके बावजूद यह बनकर तैयार है.
कैसे मिली इसे बनाने की अनुमति?
एविशन जानकारों का का कहना है कि अगर किसी एयरपोर्ट पर यात्रियों की संख्या उसकी तय क्षमता तक पहुंच जाती है, तो सरकार 150 किमी वाले नियम में ढील दे सकती है. आपको बता दें कि दिल्ली का IGI एयरपोर्ट भी लगभग अपनी पूरी क्षमता पर काम कर रहा है, जिसके कारण दिल्ली-एनसीआर में हवाई यातायात का दबाव काफी बढ़ गया था. इसी प्रेशर को संभालने के लिए नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट (जेवर) को अनुमति दी गई है. इसके जरिए हवाई यात्रियों को सुविधा मिलेगी.
क्या है इस एयरपोर्ट की खासियत?
नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट, जिसे जेवर एयरपोर्ट के नाम से जानते हैं. वह अपने पहले चरण में 1334 हेक्टेयर में विकसित हुआ है और यह एयरपोर्ट भविष्य में 5100 हेक्टेयर तक विस्तार पाएगा. आपको बता दें कि जेवर एयरपोर्ट का पहला रनवे 3900 मीटर लंबा और 45 मीटर चौड़ा बनाया गया है, जिससे बड़े विमानों को भी आसानी से रफ्तार मिल सकेगी. भविष्य में इस एयरपोर्ट को एयरोसिटी के रूप में तैयार करने की योजना है.
28 मार्च को होगा उद्घाटन
जेवर एयरपोर्ट का उद्घाटन 28 मार्च को किया जाएगा. इसके लिए पीएम मोदी पहुंचेंगे. साथ ही यूपी सीएम योगी आदित्यनाथ भी मौजूद रहेंगे.