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अब ‘अफसरशाही’ नहीं चलेगी! PM मोदी ने सरकारी अफसरों को दिया कड़ा संदेश, बदल जाएगा काम का तरीका!

Sadhana Saptah 2026: PM मोदी ने साधना सप्ताह में दिया सेवा का नया मंत्र. अब अफसर नहीं, कर्मयोगी बनकर जनता की सेवा होगी. जानिए कैसे AI और तकनीक से बदलेगी भारत की तस्वीर.

Written By: Shivani Singh
Last Updated: April 2, 2026 16:31:04 IST

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PM Modi: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार 2 अप्रैल, 2026 को विकसित भारत के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए सिविल सेवाओं को समय के साथ बदलने और लगातार अपडेट करने पर जोर दिया. साधना सप्ताह के शुभारंभ पर एक वीडियो संदेश के माध्यम से उन्होंने शासन और जनसेवा को लेकर एक नई दृष्टि साझा की.

प्रधानमंत्री मोदी ने स्पष्ट किया कि देश में शासन का मूल मंत्र ‘नागरिक देवो भव’ है. उन्होंने कहा कि सामूहिक शक्ति के साथ हमारा लक्ष्य सार्वजनिक सेवाओं को इतना सक्षम और संवेदनशील बनाना है कि वे हर नागरिक की जरूरतों को समझ सकें. शासन का अंतिम उद्देश्य नागरिकों के जीवन की सुगमता और जीवन की गुणवत्ता में हर दिन सुधार करना होना चाहिए.

अफसर नहीं, कर्तव्य का भाव

प्रशासनिक सुधारों पर चर्चा करते हुए पीएम मोदी ने एक बहुत ही मानवीय बात कही. उन्होंने कहा, ‘प्रशासनिक सेवाओं में सुधार का एक गहरा अर्थ लोक सेवकों के व्यवहार में बदलाव है. पुरानी व्यवस्था में जोर अफसर बनने पर होता था लेकिन आज का समय कर्तव्य के भाव का है.’ उन्होंने सिविल सेवकों को याद दिलाया कि उनका हर छोटा-बड़ा प्रयास 2047 के विकसित भारत की तस्वीर उकेर रहा है. उन्होंने अफसरों से कुछ आत्मचिंतन करने वाले सवाल पूछे. जैसे, हमारे एक फैसले से कितने नागरिकों का जीवन बदल सकता है?, हमारा व्यक्तिगत बदलाव कैसे एक पूरे संस्थान का बदलाव बन सकता है?, हमारे काम का देश की विकास यात्रा पर क्या प्रभाव पड़ेगा?

टेक्नोलॉजी और AI

प्रधानमंत्री ने आधुनिक दौर में टेक्नोलॉजी और डेटा की समझ को अनिवार्य बताया. उन्होंने कहा कि एक बेहतर प्रशासक वही है जो तकनीक का सही इस्तेमाल करना जानता हो. इसी सोच के साथ लोक सेवकों की क्षमता बढ़ाने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के क्षेत्र में भी निरंतर सीखने और प्रशिक्षण पर काम किया जा रहा है.

क्या है ‘साधना सप्ताह’?
साधना सप्ताह का आयोजन क्षमता निर्माण आयोग (CBC) द्वारा 2 से 8 अप्रैल तक किया जा रहा है. भारत के सिविल सेवा इकोसिस्टम में सहयोग और क्षमता निर्माण का अब तक का सबसे बड़ा प्रयास है. यह आयोग मिशन कर्मयोगी के ढांचे के तहत काम करता है, ताकि शासन को अधिक पारदर्शी, जवाबदेह और भविष्य के लिए तैयार बनाया जा सके.

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प्रधानमंत्री मोदी ने स्पष्ट किया कि देश में शासन का मूल मंत्र ‘नागरिक देवो भव’ है. उन्होंने कहा कि सामूहिक शक्ति के साथ हमारा लक्ष्य सार्वजनिक सेवाओं को इतना सक्षम और संवेदनशील बनाना है कि वे हर नागरिक की जरूरतों को समझ सकें. शासन का अंतिम उद्देश्य नागरिकों के जीवन की सुगमता और जीवन की गुणवत्ता में हर दिन सुधार करना होना चाहिए.

अफसर नहीं, कर्तव्य का भाव

प्रशासनिक सुधारों पर चर्चा करते हुए पीएम मोदी ने एक बहुत ही मानवीय बात कही. उन्होंने कहा, ‘प्रशासनिक सेवाओं में सुधार का एक गहरा अर्थ लोक सेवकों के व्यवहार में बदलाव है. पुरानी व्यवस्था में जोर अफसर बनने पर होता था लेकिन आज का समय कर्तव्य के भाव का है.’ उन्होंने सिविल सेवकों को याद दिलाया कि उनका हर छोटा-बड़ा प्रयास 2047 के विकसित भारत की तस्वीर उकेर रहा है. उन्होंने अफसरों से कुछ आत्मचिंतन करने वाले सवाल पूछे. जैसे, हमारे एक फैसले से कितने नागरिकों का जीवन बदल सकता है?, हमारा व्यक्तिगत बदलाव कैसे एक पूरे संस्थान का बदलाव बन सकता है?, हमारे काम का देश की विकास यात्रा पर क्या प्रभाव पड़ेगा?

टेक्नोलॉजी और AI

प्रधानमंत्री ने आधुनिक दौर में टेक्नोलॉजी और डेटा की समझ को अनिवार्य बताया. उन्होंने कहा कि एक बेहतर प्रशासक वही है जो तकनीक का सही इस्तेमाल करना जानता हो. इसी सोच के साथ लोक सेवकों की क्षमता बढ़ाने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के क्षेत्र में भी निरंतर सीखने और प्रशिक्षण पर काम किया जा रहा है.

क्या है ‘साधना सप्ताह’?
साधना सप्ताह का आयोजन क्षमता निर्माण आयोग (CBC) द्वारा 2 से 8 अप्रैल तक किया जा रहा है. भारत के सिविल सेवा इकोसिस्टम में सहयोग और क्षमता निर्माण का अब तक का सबसे बड़ा प्रयास है. यह आयोग मिशन कर्मयोगी के ढांचे के तहत काम करता है, ताकि शासन को अधिक पारदर्शी, जवाबदेह और भविष्य के लिए तैयार बनाया जा सके.

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