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Pune Family Court Verdict: महाराष्ट्र के पुणे से काफी हैरतअंगैज मामला सामने आया है, जिससे सुन हर कोई हैरान रह गया. कोर्ट में हर दिन अलग-अलग तरह के केस आते हैं. जिनपर फैसला सालों ले लेता है तो किसी का तुरंत. इसी कड़ी में पत्नी ने कोर्ट को बताया कि शादी के बाद भी उसके पति ने उसके साथ किसी भी तरह का संबंध नहीं बनाया. जब भी वह अपने पति से बात करती तो वह लगातार शारीरिक संबंध बनाने से मना कर देता और उससे दूर-दूर भागता. जिससे उनकी शादीशुदा ज़िंदगी सिर्फ़ एक फॉर्मैलिटी बनकर रह गई. मामला इतना सीरियस था कि कोर्ट को सीधे शादी की वैलिडिटी पर अपना फैसला सुनाना पड़ा. पति ने भी फिजिकल रिलेशन न बनाने की बात मानी, जिसके बाद कोर्ट ने बिना लंबी सुनवाई के शादी को रद्द कर दिया. ऐसे में चलिए विस्तार से जाने पूरा मामला.
क्या है पूरा मामला?
जानकारी के मुताबिक, कोमल और अक्षय (दोनों नाम बदले हुए) की शादी उनके पढ़े-लिखे परिवारों की सहमति से रजिस्टर्ड मैरिज के ज़रिए हुई थी. शादी के बाद, पत्नी नई ज़िंदगी की उम्मीद में अपने ससुराल आई, लेकिन जल्द ही उसे एहसास हुआ कि उसके पति को शादी के रिश्ते में कोई दिलचस्पी नहीं है. बार-बार बातचीत और कोशिशों के बावजूद, हालात नहीं बदले. आखिर में, पत्नी अपने माता-पिता के घर लौट आई और फैमिली कोर्ट में शादी खत्म करने की अर्जी दी.
इस केस में पत्नी ने कोर्ट को बताया कि उसने अपनी शादीशुदा ज़िंदगी को नॉर्मल करने की कई कोशिशें कीं, लेकिन उसका पति लगातार दूरी बनाए रखता था. शादी के बाद भी कपल ने आपसी सहमति से फिजिकल रिलेशन नहीं बनाए. जब हालात बर्दाश्त से बाहर हो गए, तो पत्नी ने कोर्ट का दरवाजा खटखटाया. पति ने भी कोर्ट में यह बात मानी. यह केस में एक टर्निंग पॉइंट बन गया, और जज ने लंबी सुनवाई करना जरूरी नहीं समझा.
कोर्ट ने तुरंत फैसला क्यों दिया?
कोर्ट में सुनवाई के दौरान, पति ने लिखकर माना कि शादी के बाद से दोनों के बीच कोई आपसी सहमति से फिजिकल रिलेशन नहीं बने हैं. हिंदू मैरिज एक्ट के तहत, अगर फैक्ट्स पर कोई झगड़ा नहीं है और आरोपी अपना गुनाह मान लेता है, तो कोर्ट बिना लंबी गवाही के फैसला सुना सकता है. जज बी.डी. कदम ने इसी नियम का इस्तेमाल करते हुए शादी को अमान्य घोषित कर दिया.
कोर्ट ने कानून कैसे लागू किया?
कोर्ट ने कहा कि शादी सिर्फ एक सोशल कॉन्ट्रैक्ट नहीं है, बल्कि शादी की जिम्मेदारियों पर आधारित एक संस्था है. अगर पति-पत्नी के बीच शादी का रिश्ता टूट जाता है, तो शादी का मकसद ही खत्म हो जाता है. कोर्ट ने यह भी माना कि ऐसे मामलों में बेवजह की देरी दोनों पार्टियों की मेंटल हेल्थ पर असर डालती है.