Comedian Rajpal Yadav: बॉलीवुड के सुपर कॉमेडियन राजपाल यादव इन दिनों गंभीर कानूनी संकट से गुजर रहे हैं. इस समय राजपाल यादव दिल्ली की तिहाड़ जेल में बंद हैं. बता दें कि, उन पर 9 करोड़ रुपये चुकाने का मामला दर्ज है. हालांकि, उनकी मदद के लिए राजनेता से लेकर बॉलीवुड स्टार आगे आ रहे हैं. खैर मसला जो भी हो, लेकिन सच्चाई ये है कि राजपाल यादव आज किसी परिचय के मोहताज नहीं हैं. उनका नाम बड़े अदब के साथ लिया जाता है. इसके पीछे कई बड़ी वजह हैं. उन्होंने शुरुआती जीवन में बहुत ही संघर्ष झेला. जब वे संपन्न हुए तो पुरानी बातों को वे अक्सर साझा करते रहते हैं. इसी क्रम में उन्होंने अपनी बेरोजगारी की ऐसी दास्तां सुनाई, कि हर कोई ठहाके लगाने लगा. उन्होंने अपनी बेरोजगारी से जुड़ा पूरा किस्सा लल्लनटॉप पर साझा किया. आइए जानते हैं कि राजपाल यादव अपनी बेरोजगारी पर क्या कहते हैं-
अखबार में इस्तिहार देख पहुंच गया पुलिस में भर्ती होने
राजपाल यादव कहते हैं कि, बात उन दिनों की है जब बेरोजगार थे. पढ़ाई में 10वीं पास कर ली थी. मन में देशभक्ति की भावना थी, इसलिए सेना में जाने की इच्छा थी. इसलिए मैंने सीतापुर, बरेली और फतेहगढ़ में नौकरी के लिए भर्ती देखी. मैं नहीं जानते था कि मेरी लम्बाई हमारी नौकरी में बाधा बनेगी. मुझे तो यही लगता था कि बंदूक चलाना है बस. इसी दौरान अखबार में मैंने पहले नौसेना फिर पीएसी की नौकरी का इस्तिहार देखा. मैं बड़ा खुश हुआ और उसी दिन से अधिक मेहनत शुरू कर दी. खूब दौड़, पेड़ पर लटका, उठक-बैठक और न जाने क्या-क्या.
जब नौसेना में भर्ती होने पहुंच गया बरेली
खैर, अब वो दिन आ गया… जिस दिन बरेली (उत्तर प्रदेश) में भर्ती होनी थी. इसलिए मैं (राजपाल यादव) भी समय से पहले वहां पहुंच गया. मैंने वहां एक बात नोटिस की, कि लाइन में करीब 50-60 जवान खड़े थे. सभी कंडीडेट 6 फिट के आसपास थे. उन्हीं के बीच में मैं खड़ा था. इसी दौरान एक सूबेदार साहब आए. और बोले- वो… ए….इधर आओं, इधर आओ. तो मैं थोड़ा घबराता हुआ उनके पास पहुंच गया. सूबेदार साहब बोले- कहां से आए हो? राजपाल यादव- शाहजहांपुर से. सूबेदार- यहां क्या करने आए हो? राजपाल- साहब भर्ती होने. इस पर उन्होंने कहा भर्ती! पर किसमें? राजपाल- नौसेना में. सूबेदार- तू भर्ती होगा, कितना पढ़ा-लिखा है? राजपाल (डरते हुए)- 10वीं पास.
…जब सूबेदार को आ गई दया
राजपाल यादव कहते हैं कि, जब मैंने सूबेदार साहब के सामने अपनी इच्छा जाहिर की, तो उन्हें मेरे पर दया आ गई. मेरी लगन को वो अच्छे समझ गए. फिर सूबेदार साहब बोले- तुमने अखबार का इस्तिहार ठीक से पढ़ा था. मैंने कहा- हां. सूबेदार- उसमें हाइट कितनी लिखी थी? राजपाल- 152 सेंटीमीटर. सूबेदार- और तेरी लम्बाई कितनी है? राजपाल- शायद इतनी हो जाएगी. फिर सूबेदार साहब मुझे दीवार पर ले गए और नापा. फिर सूबेदार साहब ने मुझे 3 तरीके से नापा, लेकिन मेरी लंबाई 151 सेंटीमीटर से ऊपर नहीं हो पाई. इसपर उन्होंने मुझे वहां से निकाल दिया.
दिमाग में सवाल हाइट का नहीं बराबरी का था
फिर घर आकर मैंने और मेहनत की. पेड़ों पर लटका. इसके कुछ दिन बाद फिर वहीं भर्ती हुई. मैं लाइन में लगा ही था, कि वही सूबेदार फिर आ गया. उसी टोन में बोला ओ… इधर आ. इसबार मैं सूबेदार से बिगड़ गया. मैंने कहा कि, आप हाइट पर क्यों जाते हो- बंदूक तो मुझे भी चलानी आती है. अगर नहीं मानते हो तो बंदूक चलाने में किसी से भी मेरी बराबरी करा लो. फिर वो मुझे कुछ दूर ले गए और बोले- मेरे बच्चे कुछ नियम होते हैं. जब कोई इनको पूरा नहीं कर पाता है तो उसे निकाल दिया जाता है. इसके बाद मैं उनकी बात मानकर घर चला आया.
पीएसी में भर्ती होने का भी सपना रहा गया अधूरा
अब घर आकर निराशा तो थी, लेकिन जज्बात बैठने नहीं दे रहे थे. इसी बीच फतेहगढ़ में पीएसी की भर्ती निकली. मैंने सोचा कि, सेना में भर्ती नहीं हो पाया लेकिन शायद पीएसी में भर्ती हो जाऊं. मैंने तुरंत फॉर्म भर दिया और वहां पहुंच गया. मेरे साथ फिर वही हुआ… जो हर बार होता था. अंतत: मेरा सेना में जाने का सपना ‘सपना’ ही रह गया. कभी पूरा नहीं हो पाया.