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राज्यसभा सांसद कार्तिकेय शर्मा ने जजों के लिए की बड़ी मांग, वेतन और सेवा शर्तों की हो समीक्षा

Rajya Sabha MP: हरियाणा से राज्यसभा सांसद कार्तिकेय शर्मा ने भारतीय न्यायपालिका के वेतन और सेवा शर्तों की व्यापक समीक्षा की मांग की. इसमें उन्होंने कहा कि भारतीय न्यायाधीशों को दुनिया के कई बड़े लोकतंत्रों में उनके समकक्षों की तुलना में कम वेतन मिलता है.

Written By: Sohail Rahman
Last Updated: March 25, 2026 10:11:51 IST

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Rajya Sabha MP Kartikeya Sharma: मंगलवार (24 मार्च, 2026) को राज्यसभा सांसद कार्तिकेय शर्मा ने भारतीय न्यायपालिका के वेतन और सेवा शर्तों की व्यापक समीक्षा की मांग की. उन्होंने कहा कि भारतीय न्यायाधीशों को दुनिया के कई बड़े लोकतंत्रों में उनके समकक्षों की तुलना में कम वेतन मिलता है. हरियाणा से राज्यसभा सांसद कार्तिकेय शर्मा ने राज्यसभा में कहा कि न्यायपालिका के वेतन ढांचे पर काम करने की जरूरत है, जो अंतरराष्ट्रीय मानकों और इस संस्था की गरिमा दोनों को दर्शाता हो.

इसके अलावा, उन्होंने जोर देकर कहा कि न्यायिक स्वतंत्रता को बनाए रखने के लिए प्रतिस्पर्धी और गरिमापूर्ण वेतन जरूरी है. इससे भारत की वह क्षमता और मजबूत होगी, जिससे वह बार (वकीलों) के सबसे काबिल सदस्यों को बेंच (न्यायाधीशों) के रूप में आकर्षित कर सके और उन्हें अपने साथ बनाए रख सके.

कार्तिकेय शर्मा ने की ये मांग

उनके कार्यालय से जारी एक बयान के अनुसार, कार्तिकेय शर्मा ने भारतीय न्यायपालिका के वेतन और सेवा शर्तों की व्यापक समीक्षा की मांग की. न्यायपालिका की संवैधानिक महत्ता पर जोर देते हुए कार्तिकेय शर्मा ने कहा कि न्यायाधीशों पर संवैधानिक मूल्यों की रक्षा करने, मौलिक अधिकारों की सुरक्षा करने और कानून के शासन को सुनिश्चित करने की अहम ज़िम्मेदारी होती है. इसके अलावा, उन्होंने इस बात पर भी रोशनी डाली कि यह जिम्मेदारी ऐसे माहौल में निभाई जाती है जो लगातार ज्यादा चुनौतीपूर्ण होता जा रहा है. जहां मुकदमों का भारी बोझ है और जनता की उम्मीदें भी बहुत ज्यादा हैं.

कार्तिकेय शर्मा ने और क्या-क्या कहा?

इस संदर्भ में शर्मा ने बताया कि मौजूदा वेतन ढांचे न तो इन ज़िम्मेदारियों के महत्व को ठीक से दर्शाते हैं और न ही भारत के अपने संवैधानिक ढांचे के भीतर मौजूद अन्य समान पदों के वेतन के साथ तालमेल बिठा पाते हैं. बयान में कहा गया है कि अन्य उच्च सार्वजनिक पदों के साथ वेतन में समानता न होना, संस्थागत संतुलन और दीर्घकालिक क्षमता के बारे में महत्वपूर्ण चिंताएं पैदा करता है.

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Written By: Sohail Rahman
Last Updated: March 25, 2026 10:11:51 IST

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Rajya Sabha MP Kartikeya Sharma: मंगलवार (24 मार्च, 2026) को राज्यसभा सांसद कार्तिकेय शर्मा ने भारतीय न्यायपालिका के वेतन और सेवा शर्तों की व्यापक समीक्षा की मांग की. उन्होंने कहा कि भारतीय न्यायाधीशों को दुनिया के कई बड़े लोकतंत्रों में उनके समकक्षों की तुलना में कम वेतन मिलता है. हरियाणा से राज्यसभा सांसद कार्तिकेय शर्मा ने राज्यसभा में कहा कि न्यायपालिका के वेतन ढांचे पर काम करने की जरूरत है, जो अंतरराष्ट्रीय मानकों और इस संस्था की गरिमा दोनों को दर्शाता हो.

इसके अलावा, उन्होंने जोर देकर कहा कि न्यायिक स्वतंत्रता को बनाए रखने के लिए प्रतिस्पर्धी और गरिमापूर्ण वेतन जरूरी है. इससे भारत की वह क्षमता और मजबूत होगी, जिससे वह बार (वकीलों) के सबसे काबिल सदस्यों को बेंच (न्यायाधीशों) के रूप में आकर्षित कर सके और उन्हें अपने साथ बनाए रख सके.

कार्तिकेय शर्मा ने की ये मांग

उनके कार्यालय से जारी एक बयान के अनुसार, कार्तिकेय शर्मा ने भारतीय न्यायपालिका के वेतन और सेवा शर्तों की व्यापक समीक्षा की मांग की. न्यायपालिका की संवैधानिक महत्ता पर जोर देते हुए कार्तिकेय शर्मा ने कहा कि न्यायाधीशों पर संवैधानिक मूल्यों की रक्षा करने, मौलिक अधिकारों की सुरक्षा करने और कानून के शासन को सुनिश्चित करने की अहम ज़िम्मेदारी होती है. इसके अलावा, उन्होंने इस बात पर भी रोशनी डाली कि यह जिम्मेदारी ऐसे माहौल में निभाई जाती है जो लगातार ज्यादा चुनौतीपूर्ण होता जा रहा है. जहां मुकदमों का भारी बोझ है और जनता की उम्मीदें भी बहुत ज्यादा हैं.

कार्तिकेय शर्मा ने और क्या-क्या कहा?

इस संदर्भ में शर्मा ने बताया कि मौजूदा वेतन ढांचे न तो इन ज़िम्मेदारियों के महत्व को ठीक से दर्शाते हैं और न ही भारत के अपने संवैधानिक ढांचे के भीतर मौजूद अन्य समान पदों के वेतन के साथ तालमेल बिठा पाते हैं. बयान में कहा गया है कि अन्य उच्च सार्वजनिक पदों के साथ वेतन में समानता न होना, संस्थागत संतुलन और दीर्घकालिक क्षमता के बारे में महत्वपूर्ण चिंताएं पैदा करता है.

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