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Republic Day 2026: भारत के 77वें गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर तिरंगे के शानदार रंगों से अंजी खड्ड ब्रिज और चिनाब ब्रिज जगमागा उठा, जिससे शक्तिशाली चिनाब नदी के बैकग्रांउड में एक लुभावना नजारा उभर आया. तिरंगी रोशनी ने इस शानदार इंजीनियरिंग चमत्कार को भारत की एकता, लचीलेपन और तकनीकी प्रगति का एक शक्तिशाली प्रतीक बना दिया. ऐसे में चलिए विस्तार से समझें अंजी खड्ड ब्रिज और चिनाब ब्रिज की पूरी जानकारी.
अंजी ब्रिज क्यों है खास?
अंजी ब्रिज को जो चीज असाधारण बनाती है, वह सिर्फ़ इसका डिज़ाइन ही नहीं, बल्कि इसका रणनीतिक और प्रतीकात्मक महत्व भी है. चेनाब नदी की सहायक नदी, गहरी अंजी खड्ड पर बना यह पुल नदी के तल से लगभग 331 मीटर (1,085 फीट) की ऊंचाई पर है. 473.25 मीटर लंबा यह पुल हिमालय क्षेत्र में भारत के महत्वाकांक्षी इंफ्रास्ट्रक्चर विकास का एक अहम हिस्सा है.
तेज़ हवाओं, भूकंपीय गतिविधि और मुश्किल इलाके का सामना करने के लिए डिज़ाइन किए गए इस ब्रिज में 96 केबल और 193 मीटर से ज़्यादा ऊंचाई का एक सिंगल पाइलोन है. इस ब्रिज में कुल 7 स्पैन हैं और इसे हाई-स्पीड ट्रेन ट्रैफिक को संभालने के लिए डिज़ाइन किया गया है, जो इसे कश्मीर रेलवे कॉरिडोर में एक महत्वपूर्ण कड़ी बनाता है.
चिनाब ब्रिज की खासियत
जम्मू और कश्मीर के रियासी ज़िले में स्थित चिनाब ब्रिज की रोशनी देश के आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर में हासिल की गई उपलब्धियों और भौगोलिक और इंजीनियरिंग चुनौतियों से पार पाने की क्षमता की एक खूबसूरत याद दिलाती है. नदी के तल से 359 मीटर की ऊंचाई पर बना चिनाब ब्रिज दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण रेल प्रोजेक्ट्स में से एक माना जाता है. रेल मंत्रालय और जम्मू और कश्मीर प्रशासन के अधिकारियों ने देश को श्रद्धांजलि देने और नागरिकों को आज़ादी, एकता और शांति के मूल्यों के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को फिर से पक्का करने के लिए प्रेरणा देने के मकसद से खास तिरंगी रोशनी का इंतज़ाम किया था.
दोनों पुल, उधमपुर-श्रीनगर-बारामूला रेल लिंक (USBRL) प्रोजेक्ट का हिस्सा हैं, जिन्हें राष्ट्रीय गौरव और इंजीनियरिंग की काबिलियत दिखाने के लिए रोशन किया गया है. इन प्रोजेक्ट्स का मकसद कश्मीर घाटी को हर मौसम में कनेक्टिविटी देना है, जिससे इस क्षेत्र में टूरिज्म और विकास को बढ़ावा मिलेगा. पहाड़ी बैकग्राउंड के सामने इन पुलों के लुभावने, रोशन नजारे आधुनिक भारतीय इंजीनियरिंग और विकास के प्रतीक बन गए हैं.