CJM Vibhanshu Sudhir: ASP अनुज चौधरी और 22 दूसरे पुलिसवालों के खिलाफ केस दर्ज करने का आदेश देने वाले CJM विभांशु सुधीर का सुल्तानपुर ट्रांसफर कर दिया गया है. विभांशु सुधीर का ट्रांसफर सिविल जज सीनियर डिवीजन के पद पर किया गया है. हाल ही में, संभल हिंसा में घायल आलम के पिता की अर्जी पर सुनवाई करते हुए सीजेएम विभांशु सुधीर ने पुलिस के खिलाफ केस दर्ज करने का आदेश दिया था. अनुज चौधरी के खिलाफ केस दर्ज करने के आदेश ने सोशल मीडिया पर खूब सुर्खियां बटोरीं. इस बीच, संभल के सिविल जज सीनियर डिवीजन आदित्य सिंह को संभल का सीजेएम बनाया गया है. सीजेएम विभांशु सुधीर के ट्रांसफर के बाद आदित्य सिंह संभल के सीजेएम बन गए हैं. बहुत विवादित हरिमंदिर जामा मस्जिद मामले की सुनवाई अभी आदित्य सिंह की सिविल जज सीनियर डिवीजन कोर्ट में चल रही है.
जारी किया था आदेश
विभांशु सुधीर ने FIR दर्ज करने का आदेश जारी किया. संभल जिले के चंदौसी की एक कोर्ट ने संभल हिंसा मामले में उस समय के सर्किल ऑफिसर (CO) अनुज चौधरी, उस समय के थाना इंचार्ज अनुज तोमर और अज्ञात पुलिसवालों के खिलाफ FIR दर्ज करने का आदेश दिया है. हालांकि एक सीनियर पुलिस अधिकारी ने कहा कि एडमिनिस्ट्रेशन इस आदेश के खिलाफ अपील करेगा. चीफ ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट (CJM) विभांशु सुधीर ने यह आदेश 9 जनवरी को हिंसा में घायल एक व्यक्ति के पिता की अर्जी पर दिया, जिसमें आरोप लगाया गया था कि उनके बेटे को पुलिस ने गोली मारी थी.
अनुज तोमर समेत 12 पुलिसवालों को बनाया था आरोपी
शिकायत के मुताबिक, नखासा थाना इलाके के खग्गू सराय इलाके के रहने वाले यामीन ने आरोप लगाया कि उनका 24 साल का बेटा आलम 24 नवंबर 2024 को पापड़ बेचने निकला था और शाही जामा मस्जिद के पास पुलिसवालों ने उसे गोली मार दी. शिकायत करने वाले ने उस समय के CO अनुज चौधरी, उस समय के थाना इंचार्ज अनुज तोमर और 10-12 अज्ञात पुलिसवालों को आरोपी बनाया है.
सुनवाई के बाद कोर्ट ने 9 जनवरी को सभी आरोपी पुलिस अधिकारियों के खिलाफ FIR दर्ज करने का आदेश दिया. वकील चौधरी अख्तर हुसैन सजीब ने PTI को बताया कि घायल युवक का पुलिस से छिपकर इलाज कराया गया था, और कोर्ट ने संबंधित पुलिस अधिकारियों के खिलाफ FIR दर्ज करने की अर्जी स्वीकार कर ली.
क्या है पूरा मामला?
यह विवाद पिछले साल 19 नवंबर को शुरू हुआ जब वकील हरि शंकर जैन और विष्णु शंकर जैन समेत हिंदू याचिकाकर्ताओं ने संभल डिस्ट्रिक्ट कोर्ट में एक केस दायर किया, जिसमें दावा किया गया कि शाही जामा मस्जिद पहले से मौजूद हरिहर नाथ मंदिर के ऊपर बनाई गई थी. कोर्ट के आदेश पर उसी दिन एक सर्वे किया गया, जिसके बाद 24 नवंबर को दूसरा सर्वे किया गया.