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Home > देश > 6 साल बाद इंसाफ, रेयरेस्ट ऑफ रेयर मानते हुए मद्रास हाई कोर्ट का बड़ा फैसला, 9 पुलिसकर्मियों को सजा-ए-मौत

6 साल बाद इंसाफ, रेयरेस्ट ऑफ रेयर मानते हुए मद्रास हाई कोर्ट का बड़ा फैसला, 9 पुलिसकर्मियों को सजा-ए-मौत

Sathankulam Case Verdict: 2020 के हाई-प्रोफाइल साथनकुलम हिरासत में मौत के मामले में एक बड़ा और अहम फैसला आया है. कोर्ट ने तमिलनाडु के नौ पुलिसकर्मियों को इस मामले में दोषी पाते हुए मौत की सज़ा सुनाई है. कोर्ट ने इस घटना को 'रेयरेस्ट ऑफ रेयर' मामला मानते हुए यह कड़ी सज़ा दी है और 9 पुलिसकर्मियों को मौत की सजा सुनाई है.

Written By: Shristi S
Last Updated: 2026-04-06 22:24:56

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Madras High Court on Sathankulam Case: मद्रास हाई कोर्ट की मदुरै बेंच ने 2020 के हाई-प्रोफाइल साथनकुलम हिरासत में मौत के मामले में एक बड़ा और अहम फैसला आया है. कोर्ट ने तमिलनाडु के नौ पुलिसकर्मियों को इस मामले में दोषी पाते हुए मौत की सज़ा सुनाई है. कोर्ट ने इस घटना को ‘रेयरेस्ट ऑफ रेयर’ (rarest of rare) मामला मानते हुए यह कड़ी सज़ा दी है, जो एक बेहद जघन्य अपराध का संकेत है
 
यह फैसला छह साल तक चले एक लंबे ट्रायल के बाद सुनाया गया. इस मामले की सुनवाई प्रथम अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश जी. मुथुकुमारन की अदालत में हुई, जिन्होंने हत्या और अन्य संबंधित अपराधों के आरोपों में सभी नौ आरोपियों को दोषी ठहराया. अपने फैसले में, कोर्ट ने टिप्पणी की कि यह मामला अत्यधिक क्रूरता और सत्ता के घोर दुरुपयोग का एक उदाहरण है.
 

क्या था पूरा मामला?

यह मामला थूथुकुडी जिले के साथनकुलम से जुड़ा है, जहां व्यवसायी पी. जयराज और उनके बेटे जे. बेनिक्स की पुलिस हिरासत में मौत हो गई थी. दोनों को 19 जून, 2020 को COVID-19 लॉकडाउन नियमों का उल्लंघन करने के आरोप में पुलिस ने हिरासत में लिया था. आरोप था कि उन्होंने अपनी मोबाइल एक्सेसरीज़ की दुकान तय समय से ज़्यादा देर तक खुली रखी थी. जांच में पता चला कि हिरासत में रहने के दौरान, दोनों के साथ लगातार और बेरहमी से मारपीट की गई. उन्हें पूरी रात प्रताड़ित किया गया, जिससे उन्हें गंभीर चोटें आईं. जिनमें कुंद चीज़ों से लगी चोटें और शरीर के अंदर भारी रक्तस्राव शामिल था जिसके कारण अंततः उनकी मौत हो गई.
 

9 पुलिसकर्मियों को मौत की सज़ा

इस घटना से पूरे देश में आक्रोश फैल गया. लोगों ने पुलिस हिरासत में हिंसा को लेकर सवाल उठाए और न्याय की मांग की. मामले की गंभीरता ऐसी थी कि जांच अंततः केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) को सौंप दी गई. अपनी जांच में, CBI इस निष्कर्ष पर पहुंची कि यातना देने का यह कृत्य सुनियोजित था और इसे पूरी रात लगातार अंजाम दिया गया. जांच एजेंसी ने कोर्ट में तर्क दिया कि आरोपियों ने यह अपराध जानबूझकर किया था और इसलिए, वे अधिकतम संभव सज़ा के हकदार हैं. 
 
कोर्ट ने CBI द्वारा प्रस्तुत इस तर्क को स्वीकार कर लिया. इस मामले में दोषी ठहराए गए नौ पुलिसकर्मियों में इंस्पेक्टर एस. श्रीधर, सब-इंस्पेक्टर पी. रघु गणेश और के. बालकृष्णन शामिल हैं. इसके अलावा, इस लिस्ट में हेड कांस्टेबल एस. मुरुगन और ए. समदुरई, साथ ही कांस्टेबल एम. मुथुराज, एस. चेल्लादुरई, एक्स. थॉमस फ्रांसिस और एस. वेलुमुथु शामिल हैं.
 

दसवां आरोपी COVID-19 के कारण गुजर गया

इस मामले में दसवां आरोपी, स्पेशल सब-इंस्पेक्टर पॉलदुरई, ट्रायल के दौरान COVID-19 के कारण गुज़र गया. अपने फैसले में, कोर्ट ने साफ तौर पर कहा कि यह कोई आम जुर्म नहीं था; बल्कि, इसमें पुलिस ने अपनी अथॉरिटी का घोर गलत इस्तेमाल करते हुए बेहद क्रूरता दिखाई थी. नतीजतन, इसे दुर्लभतम से दुर्लभ (rarest of rare) श्रेणी में आने वाला मामला मानते हुए, कोर्ट ने फैसला सुनाया कि मौत की सज़ा देना ही सही कदम होगा.

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Last Updated: 2026-04-06 22:24:56

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Madras High Court on Sathankulam Case: मद्रास हाई कोर्ट की मदुरै बेंच ने 2020 के हाई-प्रोफाइल साथनकुलम हिरासत में मौत के मामले में एक बड़ा और अहम फैसला आया है. कोर्ट ने तमिलनाडु के नौ पुलिसकर्मियों को इस मामले में दोषी पाते हुए मौत की सज़ा सुनाई है. कोर्ट ने इस घटना को ‘रेयरेस्ट ऑफ रेयर’ (rarest of rare) मामला मानते हुए यह कड़ी सज़ा दी है, जो एक बेहद जघन्य अपराध का संकेत है
 
यह फैसला छह साल तक चले एक लंबे ट्रायल के बाद सुनाया गया. इस मामले की सुनवाई प्रथम अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश जी. मुथुकुमारन की अदालत में हुई, जिन्होंने हत्या और अन्य संबंधित अपराधों के आरोपों में सभी नौ आरोपियों को दोषी ठहराया. अपने फैसले में, कोर्ट ने टिप्पणी की कि यह मामला अत्यधिक क्रूरता और सत्ता के घोर दुरुपयोग का एक उदाहरण है.
 

क्या था पूरा मामला?

यह मामला थूथुकुडी जिले के साथनकुलम से जुड़ा है, जहां व्यवसायी पी. जयराज और उनके बेटे जे. बेनिक्स की पुलिस हिरासत में मौत हो गई थी. दोनों को 19 जून, 2020 को COVID-19 लॉकडाउन नियमों का उल्लंघन करने के आरोप में पुलिस ने हिरासत में लिया था. आरोप था कि उन्होंने अपनी मोबाइल एक्सेसरीज़ की दुकान तय समय से ज़्यादा देर तक खुली रखी थी. जांच में पता चला कि हिरासत में रहने के दौरान, दोनों के साथ लगातार और बेरहमी से मारपीट की गई. उन्हें पूरी रात प्रताड़ित किया गया, जिससे उन्हें गंभीर चोटें आईं. जिनमें कुंद चीज़ों से लगी चोटें और शरीर के अंदर भारी रक्तस्राव शामिल था जिसके कारण अंततः उनकी मौत हो गई.
 

9 पुलिसकर्मियों को मौत की सज़ा

इस घटना से पूरे देश में आक्रोश फैल गया. लोगों ने पुलिस हिरासत में हिंसा को लेकर सवाल उठाए और न्याय की मांग की. मामले की गंभीरता ऐसी थी कि जांच अंततः केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) को सौंप दी गई. अपनी जांच में, CBI इस निष्कर्ष पर पहुंची कि यातना देने का यह कृत्य सुनियोजित था और इसे पूरी रात लगातार अंजाम दिया गया. जांच एजेंसी ने कोर्ट में तर्क दिया कि आरोपियों ने यह अपराध जानबूझकर किया था और इसलिए, वे अधिकतम संभव सज़ा के हकदार हैं. 
 
कोर्ट ने CBI द्वारा प्रस्तुत इस तर्क को स्वीकार कर लिया. इस मामले में दोषी ठहराए गए नौ पुलिसकर्मियों में इंस्पेक्टर एस. श्रीधर, सब-इंस्पेक्टर पी. रघु गणेश और के. बालकृष्णन शामिल हैं. इसके अलावा, इस लिस्ट में हेड कांस्टेबल एस. मुरुगन और ए. समदुरई, साथ ही कांस्टेबल एम. मुथुराज, एस. चेल्लादुरई, एक्स. थॉमस फ्रांसिस और एस. वेलुमुथु शामिल हैं.
 

दसवां आरोपी COVID-19 के कारण गुजर गया

इस मामले में दसवां आरोपी, स्पेशल सब-इंस्पेक्टर पॉलदुरई, ट्रायल के दौरान COVID-19 के कारण गुज़र गया. अपने फैसले में, कोर्ट ने साफ तौर पर कहा कि यह कोई आम जुर्म नहीं था; बल्कि, इसमें पुलिस ने अपनी अथॉरिटी का घोर गलत इस्तेमाल करते हुए बेहद क्रूरता दिखाई थी. नतीजतन, इसे दुर्लभतम से दुर्लभ (rarest of rare) श्रेणी में आने वाला मामला मानते हुए, कोर्ट ने फैसला सुनाया कि मौत की सज़ा देना ही सही कदम होगा.

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