Stray Dogs Case : सुप्रीम कोर्ट में आज आवारा कुत्ते मामले पर फिर से सुनवाई शुरू हुई है.जस्टिस विक्रम नाथ, संदीप मेहता और एनवी अंजारिया की बेंच ने मामले की सुनवाई की. शीर्ष अदालत ने कहा कि वो मामले पर डॉग लवर और डॉग हेटर दोनों की बातें सुनेंगा.
सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कहा कि पिछले 20 दिनों में राजस्थान में दो जजों का आवारा जानवरों की वजह से एक्सीडेंट हुआ है. शीर्ष अदालत ने कहा कि इस दुर्घटना के बाद एक जज अभी तक ठीक नहीं हुए हैं. कोर्ट ने कहा कि उन्हें रीढ़ की हड्डी में गंभीर चोटें आई है. यह बहुत गंभीर मामला है
सुप्रीम कोर्ट ने मामले को विस्तार से सुनने की बात कही. उन्होने कहा कि हम पीड़ितों,और कुत्ता प्रेमियों सबकी बात सुनेंगे. इस पर SG तुषार मेहता ने कहा, कुत्तों के लिए पेश होने वाले और इंसानों की ओर से पेश होने वाले दोनों को सुनिए.
‘हम इंसान प्रेमी भी हैं’
कोर्ट को बताया गया मध्यप्रदेश, उत्तरप्रदेश, तमिलनाडु, कर्नाटक और पंजाब जैसे राज्यों ने अभी तक पिछले आदेश के अमल को लेकर जवाब दाखिल नहीं किया है. इस पर SG मेहता ने कहा कि क्या गेटेड सोसाइटी में कुत्ते होने चाहिए, इसके लिए कोई ऐसा प्रोविजन होना चाहिए कि RWA वोट के आधार पर फैसला करे? क्योंकि सभी जानवर प्रेमी हैं लेकिन हम इंसान प्रेमी भी हैं, एक दिन कोई भैंस का दूध पीने के लिए भैंस लाना चाहेगा, क्या इसकी इजाज़त दी जा सकती है? दूसरों को दिक्कत होगी.
सिर्फ काटने से नहीं होती है दुर्घटना-कोर्ट
कोर्ट ने कहा कि ऐसा नहीं है कि दुर्घटना सिर्फ कुत्ते के काटने से होती है कुत्ते लोगों के पीछे भागते भी हैं.जिससे एक्सीडेंट हो सकते हैं .यह तब भी एक प्रॉब्लम है जब वे सड़कों पर दौड़ते हैं, खासकर उन सड़कों पर जहां गाड़ियां चलती हैं.
सिब्बल ने कहा कि कुत्ते सड़कों पर नहीं होते वे कंपाउंड में होते हैं. कोर्ट ने सिब्बल से पूछा, “क्या आप सच कह रहे हैं? आपकी जानकारी पुरानी लगती है. बचाव हमेशा इलाज से बेहतर होता है. सड़कों को साफ और कुत्तों से मुक्त रखना चाहिए. हो सकता है वे काटें नहीं, लेकिन फिर भी वे एक्सीडेंट का कारण बनते हैं.”