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Exclusive:’नेहरू जी ने मस्जिदों और दरगाहों की मरम्मत सरकारी खर्चे से करवाई’,सोमनाथ मंदिर पर सुधांशु त्रिवेदी का बड़ा बयान

Sudhanshu Trivedi: इंडिया न्यूज पर दिए गए एक इंटरव्यू में बीजेपी सांसद डॉ. सुधांशु त्रिवेदी ने सोमनाथ मंदिर के ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्व, सेक्युलरिज़्म की बहस और भारत–पाकिस्तान के बीच हजार साल पुराने संघर्ष पर विस्तार से अपनी बात रखी.

Written By: Divyanshi Singh
Last Updated: January 11, 2026 14:55:35 IST

सुधांशु त्रिवेदी ने कहा कि जो लोग कहते हैं कि सेक्युलर नेशन होने के कारण नेहरू जी ने देश के राष्ट्रपति को सोमनाथ मंदिर के उद्घाटन में जाने पर आपत्ति जताई थी, तो उन्हें मैं बताना चाहता हूं कि एन.वी गाडगिल नेहरू सरकार में कैबिनेट मंत्री थे. उन्होंने ‘Government From Inside’ नाम की किताब लिखी है, जिसमें उन्होंने साफ-साफ लिखा है कि पीडब्ल्यूडी मंत्री होने के नाते मैंने नेहरू के कहने पर अनेक मस्जिदों और दरगाहों की मरम्मत सरकारी खर्चे से करवाई.



 सुधांशु त्रिवेदी ने कहा कि दरअसल नेहरू जी और कांग्रेस के लोगों ने भारत के संविधान को पार्शियली मुस्लिम कॉन्स्टिट्यूशन बना दिया. पाकिस्तान और बांग्लादेश मुस्लिम देश बने, लेकिन भारत को संविधान के मुताबिक आंशिक मुस्लिम देश बना दिया गया, जिसे अब असलियत में सच्चा धर्मनिरपेक्ष देश बनाया जा रहा है.

नेहरू जी का विरोध मंदिरों से था-सुधांशु त्रिवेदी

सुधांशु त्रिवेदी ने कहा कि नेहरू जी का विरोध मंदिरों से था.17 मार्च 1959 को वे ललित कला अकादमी में एक भाषण देते हैं, जिसमें वे कहते हैं कि जब मैं दक्षिण भारत के मंदिरों में जाता हूं तो मेरी स्पिरिट डिप्रेस्ड महसूस करती है. मैं समझ नहीं पाता कि मेरी स्पिरिट डिप्रेस क्यों हो जाती है. लेकिन वहीं, जब मैं ताजमहल के सामने खड़ा होता हूं, तो मुझे बड़ी ताजगी महसूस होती है. सोमनाथ से लेकर बाबरी तक ये सब हिंदू मंदिरों के विरोध में थे और शरिया, पर्सनल लॉ बोर्ड और मदरसा के पक्ष में थे. तो वे सेक्युलर नहीं थे, इसे सूडो-सेक्युलरिज्म या छद्म धर्म निरपेक्षता कहते हैं. इसलिए मैं कहता हूं कि भारत में सेक्युलरिज्म खतरे में नहीं है, बल्कि सूडो-सेक्युलरिज्म के कारण भारत खतरे में है.

यहां देखें पूरा वीडियो

1951 में तत्कालीन राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद के यहां आने पर भी आपत्ति जताई गई- पीएम मोदी 

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को सोमनाथ मंदिर में पूजा-अर्चना और शौर्य यात्रा निकालने के बाद सोमनाथ स्वाभिमान पर्व में शामिल हुए. पीएम मोदी ने इस बात का जिक्र अपनी स्पीच में किया. पीएम मोदी ने कहा कि जब भारत गुलामी की बेड़ियों से मुक्त हुआ, जब सरदार वल्लभभाई पटेल ने सोमनाथ के पुनर्निमाण की शपथ ली तो उन्हें भी रोकने की कोशिश की गई. 1951 में तत्कालीन राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद के यहां आने पर भी आपत्ति जताई गई.आज भी हमारे देश में वह ताकतें मौजूद और पूरी तरह सक्रिय हैं जिन्होंने सोमनाथ पुनर्निमाण का विरोध किया. आज तलवारों की जगह दूसरे कुच्छित तरीके से भारत के खिलाफ षड्यंत्र हो रहे हैं इसलिए हमें ज्यादा सावधान रहना है, हमें खुद को शक्तिशाली बनाना है, हमें एकजुट रहना है.”

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Sudhanshu Trivedi: इंडिया न्यूज पर दिए गए एक इंटरव्यू में बीजेपी सांसद डॉ. सुधांशु त्रिवेदी ने सोमनाथ मंदिर के ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्व, सेक्युलरिज़्म की बहस और भारत–पाकिस्तान के बीच हजार साल पुराने संघर्ष पर विस्तार से अपनी बात रखी.

Written By: Divyanshi Singh
Last Updated: January 11, 2026 14:55:35 IST

सुधांशु त्रिवेदी ने कहा कि जो लोग कहते हैं कि सेक्युलर नेशन होने के कारण नेहरू जी ने देश के राष्ट्रपति को सोमनाथ मंदिर के उद्घाटन में जाने पर आपत्ति जताई थी, तो उन्हें मैं बताना चाहता हूं कि एन.वी गाडगिल नेहरू सरकार में कैबिनेट मंत्री थे. उन्होंने ‘Government From Inside’ नाम की किताब लिखी है, जिसमें उन्होंने साफ-साफ लिखा है कि पीडब्ल्यूडी मंत्री होने के नाते मैंने नेहरू के कहने पर अनेक मस्जिदों और दरगाहों की मरम्मत सरकारी खर्चे से करवाई.



 सुधांशु त्रिवेदी ने कहा कि दरअसल नेहरू जी और कांग्रेस के लोगों ने भारत के संविधान को पार्शियली मुस्लिम कॉन्स्टिट्यूशन बना दिया. पाकिस्तान और बांग्लादेश मुस्लिम देश बने, लेकिन भारत को संविधान के मुताबिक आंशिक मुस्लिम देश बना दिया गया, जिसे अब असलियत में सच्चा धर्मनिरपेक्ष देश बनाया जा रहा है.

नेहरू जी का विरोध मंदिरों से था-सुधांशु त्रिवेदी

सुधांशु त्रिवेदी ने कहा कि नेहरू जी का विरोध मंदिरों से था.17 मार्च 1959 को वे ललित कला अकादमी में एक भाषण देते हैं, जिसमें वे कहते हैं कि जब मैं दक्षिण भारत के मंदिरों में जाता हूं तो मेरी स्पिरिट डिप्रेस्ड महसूस करती है. मैं समझ नहीं पाता कि मेरी स्पिरिट डिप्रेस क्यों हो जाती है. लेकिन वहीं, जब मैं ताजमहल के सामने खड़ा होता हूं, तो मुझे बड़ी ताजगी महसूस होती है. सोमनाथ से लेकर बाबरी तक ये सब हिंदू मंदिरों के विरोध में थे और शरिया, पर्सनल लॉ बोर्ड और मदरसा के पक्ष में थे. तो वे सेक्युलर नहीं थे, इसे सूडो-सेक्युलरिज्म या छद्म धर्म निरपेक्षता कहते हैं. इसलिए मैं कहता हूं कि भारत में सेक्युलरिज्म खतरे में नहीं है, बल्कि सूडो-सेक्युलरिज्म के कारण भारत खतरे में है.

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1951 में तत्कालीन राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद के यहां आने पर भी आपत्ति जताई गई- पीएम मोदी 

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को सोमनाथ मंदिर में पूजा-अर्चना और शौर्य यात्रा निकालने के बाद सोमनाथ स्वाभिमान पर्व में शामिल हुए. पीएम मोदी ने इस बात का जिक्र अपनी स्पीच में किया. पीएम मोदी ने कहा कि जब भारत गुलामी की बेड़ियों से मुक्त हुआ, जब सरदार वल्लभभाई पटेल ने सोमनाथ के पुनर्निमाण की शपथ ली तो उन्हें भी रोकने की कोशिश की गई. 1951 में तत्कालीन राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद के यहां आने पर भी आपत्ति जताई गई.आज भी हमारे देश में वह ताकतें मौजूद और पूरी तरह सक्रिय हैं जिन्होंने सोमनाथ पुनर्निमाण का विरोध किया. आज तलवारों की जगह दूसरे कुच्छित तरीके से भारत के खिलाफ षड्यंत्र हो रहे हैं इसलिए हमें ज्यादा सावधान रहना है, हमें खुद को शक्तिशाली बनाना है, हमें एकजुट रहना है.”

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