Supreme Court on NCERT: आज सुप्रीम कोर्ट ने सोशल मीडिया पर फैलाई जा रही ‘गैर-जिम्मेदाराना’ टिप्पणियों पर कड़ी नाराजगी जताई है. यह पूरा विवाद NCERT की कक्षा 8 की सामाजिक विज्ञान की किताब के एक अध्याय से शुरू हुआ था, जिसमें ‘न्यायपालिका में भ्रष्टाचार’ का जिक्र किया गया है. मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जोयमाल्य बागची और न्यायमूर्ति विपुल एम. पंचोली की पीठ ने भारत सरकार को उन वेबसाइटों और लोगों की पहचान करने का आदेश दिया है जो इस तरह की भ्रामक सामग्री फैला रहे हैं.
कोर्ट ने क्या कहा?
मामले की गंभीरता को देखते हुए मुख्य न्यायाधीश ने बेहद कड़े शब्दों में कहा, ‘कुछ लोगों ने मीडिया पर बहुत ही गैर-जिम्मेदाराना व्यवहार किया है. हम समस्याओं से आँखें मूंदने के बजाय उनका डटकर सामना करने में विश्वास रखते हैं. सरकार ऐसे सभी लोगों और साइटों की पूरी जानकारी हमें सौंपे ताकि हम कार्रवाई कर सकें. कानून अपना काम करेगा और इन शरारती तत्वों को सबक सिखाया जाएगा.’ आदेश देने के बाद CJI ने मानवीय लहजे में लेकिन दृढ़ता से जोड़ा, ‘चाहे वे देश के बाहर ही क्यों न छिपे हों, मैं उन्हें छोड़ूंगा नहीं.’
आलोचना और ‘स्वस्थ बहस’ में अंतर
हालांकि, कोर्ट ने यह भी साफ किया कि वह अभिव्यक्ति की आजादी के खिलाफ नहीं है. पीठ ने कहा कि न्यायपालिका किसी भी सही और तर्कपूर्ण आलोचना के खिलाफ नहीं है. अगर सिस्टम में कोई कमी है और कोई विशेषज्ञ समिति उसे सुधारने के लिए सामने लाती है, तो यह आने वाली पीढ़ियों के लिए एक स्वागत योग्य कदम होगा. कोर्ट का मकसद आलोचना को दबाना नहीं, बल्कि जानबूझकर फैलाई जा रही गंदगी को रोकना है.
NCERT के रुख पर जताई चिंता
सुनवाई के दौरान अदालत इस बात से भी काफी परेशान दिखी कि NCERT ने विवादास्पद अध्याय को केवल संशोधित करके 2026-27 के सत्र में फिर से छापने की बात कही थी. कोर्ट की आपत्ति के बाद सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने भरोसा दिलाया कि अब यह अध्याय तब तक नहीं छापा जाएगा, जब तक केंद्र सरकार द्वारा गठित एक उच्च-स्तरीय कमेटी इसकी समीक्षा न कर ले. सीजेआई ने अंत में दो-टूक शब्दों में कहा, ‘उन्हें (शरारती तत्वों को) यह समझ लेना चाहिए कि वे वर्तमान मुख्य न्यायाधीश से पाला डाल रहे हैं! मैं उनसे खुद निपटूँगा.’