Live
Search
Home > देश > रियल एस्टेट पर सुप्रीम कोर्ट की तीखी टिप्पणी, रेरा से बिल्डरों को ज्यादा फायदा, खरीदार जनता अब भी परेशान

रियल एस्टेट पर सुप्रीम कोर्ट की तीखी टिप्पणी, रेरा से बिल्डरों को ज्यादा फायदा, खरीदार जनता अब भी परेशान

सुप्रीम कोर्ट RERA टिप्पणी: सुप्रीम कोर्ट ने रेरा पर तीखी टिप्पणी करते हुए ये साफ सवाल किया है कि क्या यह कानून घर खरीदने वालों की सुरक्षा के अपने असली मकसद से भटक गया है और इसके बजाय डिफॉल्ट करने वाले बिल्डरों के लिए ढाल बन गया है.

Written By: Shristi S
Last Updated: 2026-02-12 16:12:09

Mobile Ads 1x1
Supreme Court on RERA: सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को रियल एस्टेट यानी रेगुलेशन एंड डेवलपमेंट एक्ट के काम करने के तरीके पर तल्ख टिप्पणी की. कोर्ट ने सवाल किया कि क्या यह कानून घर खरीदने वालों की सुरक्षा के अपने असली मकसद से भटक गया है और इसके बजाय डिफॉल्ट करने वाले बिल्डरों के लिए ढाल बन गया है. एक राज्य RERA अथॉरिटी के काम करने के तरीके से जुड़े एक मामले की सुनवाई करते हुए, कोर्ट ने इस बात पर गहरी नाराजगी जताई कि रेगुलेटरी फ्रेमवर्क को राज्यों में कैसे लागू किया जा रहा है. बेंच ने कहा कि रियल एस्टेट सेक्टर में ट्रांसपेरेंसी और अकाउंटेबिलिटी लाने के लिए लगभग एक दशक पहले RERA लागू होने के बावजूद, इसका जमीनी असर उम्मीदों से बहुत कम रहा है.

सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने क्या कहा?

सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने अपनी तीखी टिप्पणियों में कहा कि RERA कंज्यूमर्स से ज़्यादा बिल्डरों की मदद कर रहा है, खासकर उन मामलों में जिनमें प्रोजेक्ट में देरी और खरीदारों से किए गए वादों को पूरा न करने की बात शामिल है. गलत डेवलपर्स के खिलाफ रोकने के बजाय, RERA अथॉरिटी अक्सर उन्हें मदद करती दिखती हैं, जिससे घर खरीदने वाले लंबे झगड़ों में फंस जाते हैं और उन्हें कोई खास राहत नहीं मिलती.
कोर्ट ने तो मौजूदा रूप में कानून के इस्तेमाल पर ही सवाल उठा दिया और कहा कि अगर RERA आम खरीदारों के हितों की रक्षा नहीं कर सकता, तो इसे इस तरह जारी रखने का कोई खास मकसद नहीं है. ये बातें संसद के कानून पास करने के इरादे और राज्य अधिकारियों द्वारा इसे लागू करने के तरीके के बीच के अंतर को दिखाते हुए की गईं.

सुप्रीम कोर्ट ने गंभीरता की कमी पर जताई चिंता

बेंच ने कमजोर एनफोर्समेंट मैकेनिज्म, फैसले में देरी और RERA के आदेशों का पालन सुनिश्चित करने में गंभीरता की कमी पर भी चिंता जताई. इसने कहा कि कई डेवलपर्स बहुत कम नतीजों के साथ डिफॉल्ट कर रहे हैं, जबकि खरीदारों को एक ऐसे रेगुलेटर से संपर्क करने के बावजूद लंबी कानूनी लड़ाइयों में मजबूर होना पड़ रहा है, जिसका मकसद तेज और असरदार उपाय देना था.

हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने कानून को खत्म करने या उसमें बड़े बदलाव करने के लिए कोई निर्देश नहीं दिए, लेकिन उसकी टिप्पणियां RERA को जिस तरह से चलाया जा रहा है, उससे बढ़ती न्यायिक निराशा का संकेत देती हैं. इन टिप्पणियों से राज्य सरकारों पर अपनी रेगुलेटरी अथॉरिटी को मजबूत करने, एनफोर्समेंट में सुधार करने और यह सुनिश्चित करने का दबाव बढ़ने की संभावना है कि कानून डेवलपर्स को प्रक्रिया से राहत देने के बजाय घर खरीदारों को सार्थक सुरक्षा दे.

कब लाया गया था RERA?

बता दें कि, RERA को 2016 में भारत के रियल एस्टेट सेक्टर को साफ़ करने, गलत कामों पर रोक लगाने और खरीदारों का भरोसा वापस लाने के लिए एक बड़े सुधार के तौर पर लाया गया था. कोर्ट की टिप्पणियों से यह चिंता ज़ाहिर होती है कि जब तक इसे लागू करने में सुधार नहीं होता, तब तक कानून का वादा सिर्फ़ कागज़ों तक सिमट कर रह जाएगा, जिससे खरीदारों की सुरक्षा की बुनियादी समस्या का हल नहीं हो पाएगा.

MORE NEWS

Home > देश > रियल एस्टेट पर सुप्रीम कोर्ट की तीखी टिप्पणी, रेरा से बिल्डरों को ज्यादा फायदा, खरीदार जनता अब भी परेशान

Written By: Shristi S
Last Updated: 2026-02-12 16:12:09

Mobile Ads 1x1

MORE NEWS