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Paternity Leave: मां जरूरी लेकिन पिता की भूमिका को इग्नोर करना गलत, पितृत्व अवकाश पर बने कानून – SC

Paternity Leave: पितृत्व अवकाश पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि बच्चे के विकास में मां की भूमिका केंद्रीय होती है, लेकिन पिता की भूमिका को भी नज़रअंदाज नहीं किया जा सकता. मंगलवार को एक अहम फैसले में कोर्ट ने केंद्र सरकार को निर्देश दिया कि वह 'पितृत्व अवकाश' को एक सामाजिक सुरक्षा लाभ के तौर पर मान्यता देने के लिए कानून बनाने पर विचार करे. कोर्ट ने जोर देकर कहा कि माता-पिता होने की जिम्मेदारी सिर्फ किसी एक व्यक्ति की नहीं होती.

Written By: Pushpendra Trivedi
Last Updated: March 19, 2026 14:59:43 IST

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Paternity Leave: पितृत्व अवकाश पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि बच्चे के विकास में मां की भूमिका केंद्रीय होती है, लेकिन पिता की भूमिका को भी नज़रअंदाज नहीं किया जा सकता. मंगलवार को एक अहम फैसले में कोर्ट ने केंद्र सरकार को निर्देश दिया कि वह ‘पितृत्व अवकाश’ को एक सामाजिक सुरक्षा लाभ के तौर पर मान्यता देने के लिए कानून बनाने पर विचार करे. कोर्ट ने जोर देकर कहा कि माता-पिता होने की जिम्मेदारी सिर्फ किसी एक व्यक्ति की नहीं होती. सुप्रीम कोर्ट की यह टिप्पणी एक ऐसे मामले की सुनवाई के दौरान आई, जिसमें एक खास नियम को चुनौती दी गई थी.

इस नियम के तहत गोद लेने वाली मां को मातृत्व अवकाश (maternity leave) तभी मिलता था, जब वह तीन महीने से कम उम्र के बच्चे को गोद लेती थी. इस प्रावधान को रद्द करते हुए कोर्ट ने फैसला दिया कि गोद लेने वाली मां को भी 12 हफ्ते का मातृत्व अवकाश मिलना चाहिए, चाहे बच्चे की उम्र कुछ भी हो.

पिता की भूमिका को नजरअंदाज करना गलत 

जस्टिस जे.बी. पारदीवाला और जस्टिस आर. महादेवन की बेंच ने कहा कि जहां एक तरफ बच्चे के भावनात्मक, शारीरिक और मानसिक विकास में मां की भूमिका निस्संदेह सबसे अहम होती है, वहीं पिता की भी उतनी ही महत्वपूर्ण भूमिका होती है. इसे नजरअंदाज करना न तो सही है और न ही न्यायसंगत है. कोर्ट ने टिप्पणी की कि माता-पिता होने की जिम्मेदारी सिर्फ किसी एक व्यक्ति की नहीं होती बल्कि यह एक साझा ज़िम्मेदारी है, जिसमें दोनों माता-पिता बच्चे के सर्वांगीण विकास में योगदान देते हैं. इसलिए पिता को भी बच्चे के शुरुआती विकास के चरणों में सक्रिय भूमिका निभाने का अवसर मिलना चाहिए. (paternity leave)

बच्चे की देखभाल में दोनों की अहम भूमिका 

सुप्रीम कोर्ट ने इस बात की पुष्टि की कि बच्चे की देखभाल और भावनात्मक विकास में दोनों माता-पिता की अहम भूमिका होती है. शुरुआती कुछ महीने और साल बच्चे के जीवन का सबसे महत्वपूर्ण समय होता है. इसी दौरान बच्चे और माता-पिता के बीच भावनात्मक बंधन बनता है और मज़बूत होता है. अगर इस दौरान पिता को बच्चे के साथ रहने का अवसर नहीं मिलता, तो बच्चा और पिता दोनों ही इस महत्वपूर्ण अनुभव से वंचित रह जाते हैं. इसलिए, पितृत्व अवकाश का प्रावधान जरूरी है. मां के लिए पिता का सहयोग अनिवार्य है. अदालत ने माना कि यह सच है कि बच्चे के विकास में मां की भूमिका केंद्रीय होती है, फिर भी पिता की भूमिका को नजरअंदाज करना अनुचित है. विशेषकर बच्चे के जन्म या गोद लेने के बाद की शुरुआती अवधि में क्योंकि मां के लिए पिता का सहयोग अनिवार्य है. इसका बहुत अधिक महत्व भी है. पितृत्व अवकाश (Paternity leave) पिताओं को बच्चों की देखभाल में सक्रिय भूमिका निभाने और पारिवारिक जिम्मेदारियों को साझा करने में सक्षम बनाता है.

पिताओं को अवकाश समानता को भी बढ़ावा 

पीठ ने टिप्पणी की कि पितृत्व अवकाश का प्रावधान समाज के भीतर की पारंपरिक सोच को बदलने में भी मदद करेगा. यह इस धारणा को कमजोर करने का काम करेगा कि बच्चों की देखभाल केवल महिलाओं की ज़िम्मेदारी है. यदि पिताओं को भी अवकाश दिया जाता है, तो इससे परिवार और कार्यस्थल दोनों जगहों पर लैंगिक समानता को बढ़ावा मिलेगा. इससे माता-पिता की भूमिकाओं में अधिक संतुलित तालमेल बनेगा. अपने महत्वपूर्ण फैसले में पीठ ने कहा कि इस अवकाश की अवधि ऐसी होनी चाहिए जो बच्चे और माता-पिता दोनों की जरूरतों के अनुरूप हो, जिससे पिता बच्चे के शुरुआती विकास में सक्रिय भूमिका निभा सकें और परिवार को बेहतर सहयोग प्रदान कर सकें. (paternity leave)

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Written By: Pushpendra Trivedi
Last Updated: March 19, 2026 14:59:43 IST

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Paternity Leave: पितृत्व अवकाश पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि बच्चे के विकास में मां की भूमिका केंद्रीय होती है, लेकिन पिता की भूमिका को भी नज़रअंदाज नहीं किया जा सकता. मंगलवार को एक अहम फैसले में कोर्ट ने केंद्र सरकार को निर्देश दिया कि वह ‘पितृत्व अवकाश’ को एक सामाजिक सुरक्षा लाभ के तौर पर मान्यता देने के लिए कानून बनाने पर विचार करे. कोर्ट ने जोर देकर कहा कि माता-पिता होने की जिम्मेदारी सिर्फ किसी एक व्यक्ति की नहीं होती. सुप्रीम कोर्ट की यह टिप्पणी एक ऐसे मामले की सुनवाई के दौरान आई, जिसमें एक खास नियम को चुनौती दी गई थी.

इस नियम के तहत गोद लेने वाली मां को मातृत्व अवकाश (maternity leave) तभी मिलता था, जब वह तीन महीने से कम उम्र के बच्चे को गोद लेती थी. इस प्रावधान को रद्द करते हुए कोर्ट ने फैसला दिया कि गोद लेने वाली मां को भी 12 हफ्ते का मातृत्व अवकाश मिलना चाहिए, चाहे बच्चे की उम्र कुछ भी हो.

पिता की भूमिका को नजरअंदाज करना गलत 

जस्टिस जे.बी. पारदीवाला और जस्टिस आर. महादेवन की बेंच ने कहा कि जहां एक तरफ बच्चे के भावनात्मक, शारीरिक और मानसिक विकास में मां की भूमिका निस्संदेह सबसे अहम होती है, वहीं पिता की भी उतनी ही महत्वपूर्ण भूमिका होती है. इसे नजरअंदाज करना न तो सही है और न ही न्यायसंगत है. कोर्ट ने टिप्पणी की कि माता-पिता होने की जिम्मेदारी सिर्फ किसी एक व्यक्ति की नहीं होती बल्कि यह एक साझा ज़िम्मेदारी है, जिसमें दोनों माता-पिता बच्चे के सर्वांगीण विकास में योगदान देते हैं. इसलिए पिता को भी बच्चे के शुरुआती विकास के चरणों में सक्रिय भूमिका निभाने का अवसर मिलना चाहिए. (paternity leave)

बच्चे की देखभाल में दोनों की अहम भूमिका 

सुप्रीम कोर्ट ने इस बात की पुष्टि की कि बच्चे की देखभाल और भावनात्मक विकास में दोनों माता-पिता की अहम भूमिका होती है. शुरुआती कुछ महीने और साल बच्चे के जीवन का सबसे महत्वपूर्ण समय होता है. इसी दौरान बच्चे और माता-पिता के बीच भावनात्मक बंधन बनता है और मज़बूत होता है. अगर इस दौरान पिता को बच्चे के साथ रहने का अवसर नहीं मिलता, तो बच्चा और पिता दोनों ही इस महत्वपूर्ण अनुभव से वंचित रह जाते हैं. इसलिए, पितृत्व अवकाश का प्रावधान जरूरी है. मां के लिए पिता का सहयोग अनिवार्य है. अदालत ने माना कि यह सच है कि बच्चे के विकास में मां की भूमिका केंद्रीय होती है, फिर भी पिता की भूमिका को नजरअंदाज करना अनुचित है. विशेषकर बच्चे के जन्म या गोद लेने के बाद की शुरुआती अवधि में क्योंकि मां के लिए पिता का सहयोग अनिवार्य है. इसका बहुत अधिक महत्व भी है. पितृत्व अवकाश (Paternity leave) पिताओं को बच्चों की देखभाल में सक्रिय भूमिका निभाने और पारिवारिक जिम्मेदारियों को साझा करने में सक्षम बनाता है.

पिताओं को अवकाश समानता को भी बढ़ावा 

पीठ ने टिप्पणी की कि पितृत्व अवकाश का प्रावधान समाज के भीतर की पारंपरिक सोच को बदलने में भी मदद करेगा. यह इस धारणा को कमजोर करने का काम करेगा कि बच्चों की देखभाल केवल महिलाओं की ज़िम्मेदारी है. यदि पिताओं को भी अवकाश दिया जाता है, तो इससे परिवार और कार्यस्थल दोनों जगहों पर लैंगिक समानता को बढ़ावा मिलेगा. इससे माता-पिता की भूमिकाओं में अधिक संतुलित तालमेल बनेगा. अपने महत्वपूर्ण फैसले में पीठ ने कहा कि इस अवकाश की अवधि ऐसी होनी चाहिए जो बच्चे और माता-पिता दोनों की जरूरतों के अनुरूप हो, जिससे पिता बच्चे के शुरुआती विकास में सक्रिय भूमिका निभा सकें और परिवार को बेहतर सहयोग प्रदान कर सकें. (paternity leave)

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