19 फरवरी 2026 की सुबह दिल्ली इंदिरा गांधी इंटरनेशनल एयरपोर्ट (IGIA) पर चेक-इन सिस्टम फेल हो गया. नेविटेयर के ग्लोबल सर्वर ग्लिच के कारण लंबी कतारें लग गईं. कई एयरलाइंस की फ्लाइट्स प्रभावित हुईं, लेकिन उड़ानें रद्द नहीं हुईं.
नेविटेयर में अस्थायी खराबी के कारण थोड़े समय के लिए परिचालन संबंधी व्यवधानों का सामना करना पड़ा, जिससे देश के साथ-साथ एशिया-प्रशांत और यूरोप क्षेत्रों के कुछ हिस्सों में कई एयरलाइनें प्रभावित हुईं.
नेविटेयर आउटेज का असर
नेविटेयर एक प्रमुख एयरलाइन सॉफ्टवेयर प्रोवाइडर है, जो चेक-इन, बुकिंग और बोर्डिंग पास जारी करने का काम करता है. मामले की जानकारी रखने वाले एक अधिकारी ने बताया कि भारत में एयर इंडिया को छोड़कर इस प्रणाली का उपयोग करने वाली सभी एयरलाइनें सुबह के समय प्रभावित हुईं. उन्होंने कहा,
“सिस्टम में खराबी के कारण इंडिगो, एयर इंडिया एक्सप्रेस, अकासा एयर और स्पाइसजेट एयरलाइंस सुबह 6:45 बजे से 7:28 बजे के बीच और फिर सुबह 8:10 बजे से 8:25 बजे के बीच रुक-रुक कर प्रभावित हुईं, जिससे दिल्ली के इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे (आईजीआईए) सहित कई हवाई अड्डों पर चेक-इन और बोर्डिंग प्रक्रियाओं में अस्थायी देरी हुई.”
यह गड़बड़ी भारत के अलावा नेविटेयर सॉफ्टवेयर उपयोग करने वाली यूरोप और APAC क्षेत्र में भी देखी गई. दिल्ली एयरपोर्ट टर्मिनल 3 पर काउंटरों पर भारी भीड़ लगी. एयर इंडिया एक्सप्रेस ने ट्वीट कर माफी मांगी और मैन्युअल चेक-इन की बात कही.
उड़ानों पर प्रभाव
नेविटेयर सॉफ्टवेयर में ग्लिच होने से चेक-इन काउंटरों पर भीड़ बढ़ने लगी. स्पाइसजेट, इंडिगो जैसी एयरलाइंस पर इसका व्यापक असर दिखा. दिल्ली एयरपोर्ट ने स्टेटमेंट जारी कर कहा कि तकनीकी समस्या का समाधान हो रहा है. यात्रियों को लाउंज में इंतजार करने को कहा गया.
सुबह 9 बजे से यह समस्या शुरू हुई. टर्मिनल 3 पर लंबी लाइनें, लोग घंटों खड़े रहे. एक यात्री ने कहा, “2 घंटे से चेक-इन का इंतजार.” एयरपोर्ट ने बोर्डिंग पास के लिए वैकल्पिक तरीके बताए. यह समस्या दोपहर तक ठीक हो गई. यह ग्लोबल आउटेज थी, जो एशिया-प्रशांत और यूरोप तक फैली. नेविटेयर ने सर्वर रिस्टोर कर लिया. भारत में दिल्ली सबसे ज्यादा प्रभावित रहा, जहां से प्रतिदिन हजारों फ्लाइट्स हैं.