Tumakuru Suicide News: मीडिया रिपोर्ट्स की जानकारी के अनुसार, शनिवार को कर्नाटक के तुमकुरु ज़िले में समाज कल्याण विभाग के एक अधिकारी ने कथित तौर पर अपने दफ्तर में खुदखुशी कर जान दे दी. आत्महत्या से पहले उन्होंने अपने सीनियर सहकर्मी पर उत्पीड़न का आरोप लगाया था. पुलिस ने बताया कि मृतक मल्लिकार्जुन, जो एक असिस्टेंट डायरेक्टर थे, शुक्रवार को पावागड़ा शहर में समाज कल्याण विभाग के ऑफिस में छत के पंखे से लटके हुए पाए गए.
यह जानलेवा कदम उठाने से पहले विभाग के इस तालुका-स्तरीय अधिकारी ने अपने मोबाइल फोन पर एक सेल्फ़ी वीडियो रिकॉर्ड किया. इस वीडियो में उन्होंने आरोप लगाया कि जॉइंट डायरेक्टर कृष्णप्पा के उत्पीड़न के कारण ही उन्हें यह फैसला लेने पर मजबूर होना पड़ा. पुलिस ने बताया कि मल्लिकार्जुन पावागड़ा के गुंडरलहल्ली के रहने वाले थे.
वीडियो किया रिकॉर्ड
वीडियो में उन्होंने यह भी कहा कि उनकी मां, पत्नी और बच्चों ने उनका बहुत अच्छे से ख्याल रखा था. उन्होंने कहा कि भगवान और कानून उनके सीनियर सहकर्मी को उनके गलत कामों के लिए ज़रूर सज़ा देंगे. एक सीनियर पुलिस अधिकारी ने बताया कि मल्लिकार्जुन के परिवार द्वारा दर्ज कराई गई शिकायत और सेल्फ़ी वीडियो के आधार पर जॉइंट डायरेक्टर के खिलाफ ‘भारतीय न्याय संहिता’ की धारा 108 के तहत आत्महत्या के लिए उकसाने का मामला दर्ज कर लिया गया है और मामले की जांच चल रही है. शुरुआती जांच के नतीजों का हवाला देते हुए अधिकारी ने बताया कि जॉइंट डायरेक्टर ने हाल ही में मृतक के खिलाफ एक जांच शुरू की थी. मृतक सिर्फ़ 10 दिन बाद ही रिटायर होने वाले थे. इस जांच का असर उनकी पेंशन और काम से जुड़े दूसरे मामलों पर पड़ सकता था.
जॉइंट डायरेक्टर कृष्णप्पा ने किया बयान जारी
आधिकारिक स्पष्टीकरण के तौर पर मल्लिकार्जुन की आत्महत्या के मामले में समाज कल्याण विभाग के जॉइंट डायरेक्टर कृष्णप्पा ने एक 7 मिनट का वीडियो बयान जारी किया है और इस मामले पर अपनी स्थिति साफ की है. इस वीडियो में उन्होंने कहा कि उनके (मल्लिकार्जुन के) रिटायर होने में सिर्फ़ 10 दिन बचे थे. मैंने निजी तौर पर मल्लिकार्जुन को बिल्कुल भी परेशान नहीं किया. हमने उन्हें एक दिन के लिए भी परेशान नहीं किया. हम न तो उनके दफ़्तर गए, न ही कोई जांच-पड़ताल की और न ही उन्हें कोई नोटिस दिया. अगर हमने उन्हें परेशान किया होता, तो उनके दफ़्तर के लोग इस बात को जरूर बता सकते थे. हमारा विभाग एक परिवार की तरह काम करता रहा है और हम सभी के साथ सहयोग करते हैं.
मौत की सच्चाई आए सामने
उन्होंने बताया कि बेंगलुरु स्थित हेड ऑफ़िस से एक पत्र आया था, जिसमें शिकायत की गई थी कि मल्लिकार्जुन ने कोई गैर-कानूनी काम किया है. यह सच है कि उस पत्र के आधार पर मैंने उन्हें एक नोटिस दिया था. मैंने उस शिकायत की जांच के लिए दो कर्मचारियों को नियुक्त किया था. लेकिन, अभी तक वह जांच पूरी नहीं हुई है. इसके अलावा, मैंने किसी भी तरह का कोई मानसिक उत्पीड़न नहीं किया है. चूंकि उनकी रिटायरमेंट में अब सिर्फ़ दस दिन बचे हैं, इसलिए उन्हें परेशान करने या उनकी पेंशन रोकने का कोई मौका ही नहीं था. मैंने खुद उनकी पेंशन में मदद के लिए एक संतोषजनक प्रस्ताव पेश किया था. उनकी आत्महत्या से शक पैदा होता है. मैं गुज़ारिश करता हूं कि उनकी मौत के पीछे की सच्चाई सामने लाई जाए.
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