Union Budget 2026: केंद्रीय बजट 2026-27 में रेयर अर्थ मेटल्स के उत्पादन पर विशेष फोकस किया गया है. वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने दुर्लभ खनिजों (रेयर अर्थ एलिमेंट्स) के लिए चार राज्यों में विशेष कॉरिडोर स्थापित करने की बड़ी घोषणा की है.
यह पहल ओडिशा, केरल, तमिलनाडु और आंध्र प्रदेश को लक्षित करती है, जहां इन खनिजों का भरपूर भंडार मौजूद है. इसका उद्देश्य भारत को चीन जैसे देशों पर निर्भरता कम कर रेयर अर्थ मेटल्स के मामले में आत्मनिर्भर बनाना है.
रेयर अर्थ कॉरिडोर क्या है?
रेयर अर्थ एलिमेंट्स (REE) 17 दुर्लभ धातुएं हैं, जो इलेक्ट्रॉनिक्स, इलेक्ट्रिक वाहनों (EV), रिन्यूएबल एनर्जी, सेमीकंडक्टर और डिफेंस उपकरणों के निर्माण में महत्वपूर्ण सामग्री हैं. चीन विश्व का 80% से अधिक REE उत्पादन नियंत्रित करता है, जिससे इसकी वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला प्रभावित हो सकती है. बजट में इन राज्यों में माइनिंग, प्रोसेसिंग, रिसर्च और विनिर्माण को बढ़ावा देने के लिए कॉरिडोर बनाने का प्रस्ताव है. बजट में नवंबर 2025 में शुरू हुई रेयर अर्थ परमानेंट मैग्नेट योजना को ही आगे बढ़ाया जा रहा है.
चुने गए राज्यों की भूमिका
ओडिशा और आंध्र प्रदेश में समुद्री और स्थलीय खनिज भंडार प्रचुर हैं, जबकि केरल के समुद्री तटों पर थोरियम जैसे रेयर अर्थ का महत्वपूर्ण भंडार है. तमिलनाडु को अन्य राज्यों के साथ जोड़कर एक कॉरिडोर विकसित किया जाएगा, जो इन मेटल्स के उत्पादन में बढ़ावा देगा. केरल में विझिंजम पोर्ट को चावरा और कोच्चि से लिंक किया जाएगा, जहां KMML के पास डेडिकेटेड सेंटर बनेगा. इस कॉरिडोर के बनने से क्षेत्र में रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे. इससे 42,000 करोड़ निवेश और 50,000 नौकरियां अपेक्षित हैं.
आर्थिक और रणनीतिक महत्व
यह घोषणा भारत को ग्लोबल REE हब बनाने की दिशा में कदम है. इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण योजना के तहत खर्च 40,000 करोड़ रुपये तक बढ़ाया गया है. क्लस्टर-आधारित प्लग-एंड-प्ले मॉडल से रासायनिक उत्पादन बढ़ेगा और आयात निर्भरता घटेगी. सरकार का लक्ष्य विकसित भारत 2047 के लिए मैन्युफैक्चरिंग, ईवी और डिफेंस को मजबूत करना है. ये कॉरिडोर न केवल रोजगार सृजन करेंगे, बल्कि वैश्विक व्यापार में भारत की स्थिति सुधारेंगे. बजट 1 फरवरी को पेश होने से अप्रैल से ये योजनाएं लागू होंगी.