भारत सरकार ने संशोधित उड़ान योजना को अगले दस वर्षों यानी 2026 से 2036 तक के लिए मंजूरी दे दी है. इस योजना से टायर-2 और टायर-3 शहरों के नागरिक देश के किसी भी कोने में पहुंच सके ख़ास तौर पर व्यापारी और छात्र. इसके साथ ही 10,043 करोड़ की वायबिलिटी गैप फंडिंग’ (VGF) यह सुनिश्चित करेगी कि एयरलाइन कंपनियां उन रूटों पर भी उड़ान भरें जहां से अभी तक संपर्क कटा हुआ था और किराया भी आम आदमी की जेब के हिसाब से रखा जाएगा.
इस योजना के तहत बुनियादी ढांचे को लेकर दो बड़े संकल्प लिए गए हैं. अगले आठ वर्षों में 12,159 करोड़ रुपए की लागत से 100 मौजूदा अप्रयुक्त हवाई पट्टियों को आधुनिक हवाई अड्डों में बदला जाएगा. पहाड़ी इलाकों, द्वीपों और दूरदराज के क्षेत्रों के लिए 3,661 करोड़ रुपए की लागत से हेलीपैड बनाए जाएंगे. यह सिर्फ यात्रा सुगम नहीं बनाएंगे बल्कि आपातकालीन चिकित्सा स्थिति में किसी की जान बचाने के लिए संजीवनी का काम करेंगे.
आत्मनिर्भर भारत की अपनी उड़ान
इस बार सरकार ने केवल कनेक्टिविटी पर ही ध्यान नहीं दिया बल्कि स्वदेशी विमानन क्षेत्र को भी मजबूती दी है. आत्मनिर्भर भारत अभियान के तहत पवन हंस के बेड़े में दो नए HAL ध्रुव हेलीकॉप्टर शामिल किए जाएंगे. एलायंस एयर को दो HAL डोर्नियर विमान दिए जाएंगे.
9 वर्षों का सफल सफर
फरवरी 2026 तक के आंकड़े गवाह हैं कि ‘उड़ान’ ने क्या बदला है. 663 रूट अब तक चालू हो चुके हैं. 1.62 करोड़ से ज्यादा यात्री आसमान का सफर तय कर चुके हैं. 3 लाख 41 हजार से अधिक उड़ानें भरी जा चुकी हैं.
आर्थिक और सामाजिक प्रभाव
यह योजना केवल आवाजाही का साधन नहीं है, बल्कि आर्थिक प्रगति का इंजन है. नए हवाई अड्डों के आने से स्थानीय पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा, व्यापार के नए रास्ते खुलेंगे और छोटे शहरों में रोजगार के अवसर पैदा होंगे. यह सबका साथ, सबका विकास’ के मंत्र को धरातल पर उतारने की एक और सशक्त कोशिश है.
‘संशोधित उड़ान’ योजना केवल ईंट-पत्थर के हवाई अड्डे बनाने के बारे में नहीं है. यह एक बीमार बुजुर्ग को वक्त पर इलाज दिलाने, एक युवा उद्यमी को बड़े बाजार से जोड़ने और एक मध्यमवर्गीय परिवार को हवाई यात्रा का अनुभव देने का संकल्प है.