Dopamine Dressings: आज के बदलते दौर में आए दिन एक नया ट्रेंड वायरल होते रहता है. Gen Z जनरेशन इनको अपनाने और नए अपडेट से काफी ज्यादा जुड़ी रहती है. ये लोग अपनी बोरियत को दूर करने के लिए ऐसे ट्रेंड से पीछे भागते हैं. दरअसल, बदलती लाइफस्टाइल के साथ आजकल काम का माहौल थोड़ा तनाव भरा हो गया है. ऐसे में Gen Z अपना मूड सही करने और आत्मविश्वास बढ़ाने के लिए चमकीले रंग वाले कपड़े पहन रहे हैं. इससे उन्हें बर्नआउट, डेडलाइन और काम के दबाव से बेहतर तरीके से निपटने में मदद मिलती है. इसको डोपामाइन ड्रेसिंग (Dopamine Dressing) भी कहते हैं. अब सवाल है कि आखिर, डोपामाइन ड्रेसिंग (Dopamine Dressing) क्या है? यह आपके मूड को कैसे रखता है फिट? क्या डोपामाइन ड्रेसिंग के नुकसान भी हैं? आइए जानते हैं इस बारे में-
डोपामाइन ड्रेसिंग क्या होता है? What is Dopamine Dressing
india Today की एक रिपोर्ट के मुताबिक, डोपामाइन ड्रेसिंग एक फैशन ट्रेंड है जिसमें लोग जानबूझकर चमकीले और आकर्षक कपड़े पहनते हैं ताकि उनका मूड,ऊर्जा और आत्मविश्वास बढ़े. इसमें लोग समाज के लिए नहीं बल्कि अपनी खुशी के लिए कपड़े पहनते हैं. जनरेशन Z के लोग इस ट्रेंड को मूड बूस्टर के रूप में अपना रहे हैं और रंग-बिरंगे अगल दिखने वाले कपड़ों पहनकर खुद को बेहतर महसूस कराते हैं. ये अब केवल फैशन नहीं है बल्कि बोरिंग दिनों में खुद को खुश रखने का तरीका बन गया है.
कपड़े आपके मूड को फिट रखने में कैसे करते मदद
इंटरनेशनल जर्नल ऑफ नोवेल रिसर्च एंड डेवलपमेंट (INJMRD) रिपोर्ट के मुताबिक, अच्छे कपड़े पहनना तनाव, , मबोरियत और भावनात्मक असुविधा से निपटने का एक तरीका बन गया है. 24 साल की पत्रकार निशिता सिन्हा कहती हैं कि जब वह अच्छे कपड़े पहनती हैं, तो उनका मूड अच्छा हो जाता है और वह ज्यादा काम कर पाती हैं. अगर वह ऐसा न करें, तो उन्हें आलस महसूस होता है. इतना ही नहीं अच्छे कपड़े पहनने से आत्मविश्वास और आत्मसम्मान बढ़ता है, मूड अच्छा रहता है और व्यक्ति खुद को बेहतर तरीके से व्यक्त कर पाता है. इससे भागदौड़ भरी जिंदगी में भी लोग ज्यादा सहज और कंट्रोल में महसूस करते हैं.
तनाव कम और पॉजिटिव सोच को मिलता है बढ़ावा
ईपीआरए इंटरनेशनल जर्नल ऑफ मल्टीडिसिप्लिनरी रिसर्च में प्रकाशित एक रिपोर्ट भी बताती है कि चमकीले रंग पहनने से मूड बेहतर होता है, तनाव कम होता है और पॉजिटिव सोच बढ़ती है. इस वजह से Gen Z रंग-बिरंगे कपड़ों का इस्तेमाल अपने काम के तनाव से निपटने के लिए कर रहे हैं. वहीं, 25 साल की डिजाइनर अरेया वर्मा कहती हैं कि अच्छे से तैयार होने से उनका आत्मविश्वास बढ़ता है और हल्के या पेस्टल रंग पहनने से उनका मन शांत रहता है.
डोपामाइन ड्रेसिंग Gen Z के लिए बन रहा खतरा
रिपोर्ट के मुताबिक, 25 वर्षीय जनरेटिव एआई टेक लीड बिलाल सानी कहते हैं कि भले ही डोपामाइन ड्रेसिंग से लोगों को आत्मविश्वास मिलता है और तनाव कम होता है, लेकिन Gen Z के लिए यह धीरे-धीरे खुद ही एक तनाव बनता जा रहा है. जो चीज पहले खुशी देती थी वह अब एक तरह की उम्मीद या अपेक्षा बनती जा रही है. अच्छा महसूस करने के लिए कपड़े पहनना सिर्फ अपनी पसंद नहीं रहा बल्कि एक जरूरत जैसा महसूस होने लगा है. लोग उम्मीद करते हैं कि आप हमेशा अच्छे और प्रोफेशनल दिखें. लेकिन अगर कोई ठीक से तैयार होकर नहीं आता है तो, उसे नोटिस किया जाता है. इस वजह से Gen Z अब अपनी लुक्स को लेकर ज्यादा सचेत हो गए हैं.
गंभीरता से लेना चाहिए ड्रेस कोड को
यूरोपियन जर्नल ऑफ वर्क एंड ऑर्गनाइजेशनल साइकोलॉजी की 2026 की एक रिपोर्ट के मुताबिक, कपड़े यह दिखाने का तरीका होते हैं कि कोई व्यक्ति कितना सक्षम, जिम्मेदार और प्रोफेशनल है. वर्क प्लेस पर लोग अक्सर किसी के कपड़ों को देखकर ही उसकी योग्यता और व्यवहार के बारे में राय बना लेते हैं. इसलिए सही और प्रोफेशनल कपड़े पहनना बहुत जरूरी होता है.
मनोवैज्ञानिक प्रिया वारिक के अनुसार, लोग अक्सर कपड़ों के आधार पर यह तय कर लेते हैं कि कोई व्यक्ति कितना प्रोफेशनल है. कुछ जगहों पर आरामदायक कपड़े चल जाते हैं, लेकिन कॉर्पोरेट माहौल में सही ड्रेसिंग बहुत जरूरी होती है क्योंकि इससे आपके काम को गंभीरता से लिया जाता है. वह आगे कहती हैं कि कार्पोरेट पहनावे में कभी कोई बदलाव नहीं आया है बस समय के साथ इसमें कुछ बदलाव किए गए हैं.