Mumbai palghar gas leak: महाराष्ट्र के पालघर जिले से निकल कर एक बड़ी घटना सामने आई है. जानकारी के मुताबिक, यहां भगेरिया इंडस्ट्रीज लिमिटेड की बोइसर एमआईडीसी स्थित फैक्ट्री से ओलियम (फ्यूमिंग सल्फ्यूरिक एसिड) गैस का रिसाव हो गया. इसके बाद वहां से करीब 2600 लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया, जिनमें 1600 स्कूली छात्र भी शामिल हैं. अधिकारियों के मुताबिक, सोमवार दोपहर करीब 2 बजे 2,500 लीटर क्षमता वाले ओलियम डे-टैंक से गैस लीक हुई है. हवा की दिशा के कारण सफेद धुएं का घना बादल तेजी से आसपास के इलाकों में फैल गया. इसका असर लगभग पांच किलोमीटर के दायरे में देखा गया. अब सवाल है कि आखिर ओलियम गैस क्या है? पालघर में लीक हुई ओलियम गैस का क्या यूज है? ओलियम गैस सेहत के लिए कितनी खतरनाक? आइए जानते हैं इस बारे में-
ओलियम गैस क्या है?
विकिपिडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, ओलियम एक खतरनाक गैस होती है. इसको प्यूमिंग सल्फ्यूरिक एसिड या पायरोसल्फ्यूरिक एसिड (H2s2o7) भी कहा जाता है. बता दें कि, सल्फ्यूरिक एसिड में घुले सल्फर ट्राईऑक्साइड का एक अत्यंत विषैला और संक्षारक घोल है. यह एक गाढ़े, तैलीय तरल या वाष्प के रूप में दिखाई देता है, जो हवा के संपर्क में आने पर दम घोंटने वाली सफेद गैसें छोड़ता है.
ओलियम गैस का औद्योगिक उपयोग क्या?
रिपोर्ट के मुताबिक, ओलियम गैस का औद्योगिक उपयोग होता है. आमतौर पर इसका रासायनिक विनिर्माण में किया जाता है, जिसमें उर्वरक, विस्फोटक और रंगों का उत्पादन शामिल है. इसके साथ ही पेट्रोलियम शोधन में भी इसका उपयोग होता है.
सेहत के लिए ओलियम गैस कितनी खतरनाक?
हेल्थ एक्सपर्ट के मुताबिक, ओलियम गैस अत्यंत खतरनाक होती है. इसके रिसाव होने से आंखों में गंभीर जलन, सांस लेने में तकलीफ और रासायनिक जलन हो सकती है. महाराष्ट्र के पालघर में जहरीले धुएं के कारण हजारों लोगों को निकालने की आवश्यकता पैदा कर सकती है. इस घटना में कम से कम तीन लोगों को आंखों में हल्की जलन की शिकायत हुई. उन्हें अस्पताल में भर्ती कर इलाज दिया जा रहा है. फिलहाल किसी के गंभीर रूप से घायल होने की खबर नहीं है.
धुएं ने बचावकर्मियों को भी किया परेशान
घटना की सूचना मिलते ही एनडीआरएफ और भाभा ऑटोमिक रिसर्च सेंटर (BARC) और फायर ब्रिगेड की टीमें मौके पर पहुंचीं. हालांकि, धुएं की ज्यादा मात्रा के कारण शुरुआत में रिसाव की सही जगह तक पहुंचने में दिक्कत हुई. बाद में विशेषज्ञों ने सेल्फ-कंटेन्ड ब्रीदिंग अपेरटस (SCBA) की मदद से अंदर जाकर गैस के स्रोत का पता लगाया. रिसाव वाले टैंक के चारों ओर रेत की बोरियां लगाकर स्थिति को काबू में किया गया.