Long Distance Relationship Effects: रिश्ते बनाना और उसको निभाना दोनों एक अच्छे रिलेशनशिप के महत्वपूर्ण पहलू हैं. लेकिन ये इतना आसान काम नहीं होता है. क्योंकि, रिश्ते बनाने में जितनी कठिनाई नहीं आती है, उससे अधिक परेशानी रिश्तों को निभाने में आती है. इसीलिए कहा जाता है कि, रिश्ता दो दिलों, भावनाओं और भरोसे का एक ऐसा संगम है, जो सम्मान, प्यार और ईमानदारी की नींव पर टिकता है. हालांकि, कहा तो ये भी जाता है कि, जहां सच्चा प्यार होता है तकरार भी वहीं होती है. हालांकि, जब बात लॉन्ग डिस्टेंस रिलेशनशिप की आती है तो यह और भी चुनौतियों भरा होता है. अब सवाल है कि आखिर, लॉन्ग-डिस्टेंस रिलेशनशिप क्या है? लॉन्ग-डिस्टेंस रिलेशनशिप मेंटल हेल्थ को कैसे प्रभावित करता है? क्यों टूट रहा लॉन्ग-डिस्टेंस रिलेशनशिप? लॉन्ग-डिस्टेंस रिलेशनशिप को कैसे बचाएं? आइए जानते हैं इस बारे में-
लॉन्ग-डिस्टेंस रिलेशनशिप क्या है?
आज की डेट में लॉन्ग-डिस्टेंस रिलेशनशिप बहुत कॉमन हो गया है. लॉन्ग-डिस्टेंस रिलेशनशिप यानी लव बर्ड का मतलब है कि, कपल का एक साथ एक ही शहर में न रहना. उदाहरण के लिए ‘एक दिल्ली में तो दूसरा मुंबई में’ रहता हो. आप जब चाहे एक-दूसरे से मिल नहीं सकते हैं. आप सिर्फ फोन, वीडियो कॉल, चैटिंग के जरिए ही बात कर पाते हैं. कई बार लोगों को अपने काम के कारण भी एक-दूसरे से दूर जाकर रहना पड़ता है. कई मायने में यह रिलेशनशिप बेहतर भी है, क्योंकि इस तरह के रिश्ते में ही प्यार करने वालों की सही पहचान भी हो जाती है. इससे पता चल जाता है कपल एक-दूसरे से दूर रहकर भी आपस में कितने लॉयल हैं. हालांकि, इसके कुछ फायदे हैं तो कुछ नुकसान भी. कई बार इस तरह के रिश्ते मेंटल हेल्थ को भी प्रभावित करने लगते हैं.
लॉन्ग-डिस्टेंस रिलेशनशिप मेंटल हेल्थ को कैसे प्रभावित करता है?
राजकीय मेडिकल कॉलेज कन्नौज के मनोचिकित्सक डॉ. विवेक कुमार बताते हैं कि, कई बार ऐसा होता है कि, एक पार्टनर को दूसरे पार्टनर की बहुत याद सताती है. ऐसे में उससे मिलकर कुछ पल बिताने का मन करता है. लेकिन, दूर रहने के चलते ऐसा संभव नहीं हो पाता है. इस स्थिति में भी अपनी बातों को शेयर करने के लिए फोन कॉल का ही सहारा लेना पड़ता है. कई बार यह स्थिति इतनी कठिन बन जाती है कि, यह मानसिक सेहत पर नेगेटिव असर डालने लगती है. हेल्थ एक्सपर्ट कहते हैं कि, जब किसी को परेशानी की घड़ी में उस एक इंसान की बहुत कमी महसूस हो और वो आपके पास न हो तो इससे आप और भी ज्यादा मेंटली डिस्टर्ब हो सकते हैं. जो सीधे तौर पर मेंटल हेल्थ को नुकसान पहुचा सकता है.
लॉन्ग-डिस्टेंस रिलेशनशिप की स्थिति में ब्रेन में क्या होता है?
वेरीवेलमाइंड में छपी एक खबर के अनुसार, जब आप एक ही घर में या अपने साथी के पास नहीं रहते हैं, तो सिर्फ दूरी ही आपके तनाव के स्तर को बढ़ा सकती है. साथ रहने वाले प्रेमी-प्रेमिका या कपल की तुलना में एक लंबी दूरी के रिश्ते में होने पर व्यक्तिगत रूप से आप अधिक रिलेशनशिप स्ट्रेस से गुजरते हैं. ऐसा इसलिए होता है, क्योंकि आप शारीरिक, मानसिक और भावनात्मक रूप से अपने साथी के उतने करीब नहीं होते हैं, इसलिए आपको फील-गुड न्यूरोट्रांसमीटर या हैप्पी हार्मोन डोपामाइन और सेरोटोनिन पर्याप्त मात्रा में नहीं मिल पाता है. ये दोनों ही आपके पेट के स्वास्थ्य को भी प्रभावित करते हैं. हैप्पी हार्मोन खुशियों को बढ़ाने का काम करता है. इन फील गुड हार्मोन की कमी होने से कई बार लोग मेजर डिप्रेसिव डिसऑर्डर से भी ग्रस्त हो जाते हैं.
क्यों टूट रहा लॉन्ग-डिस्टेंस रिलेशनशिप?
विश्वास में कमी: पार्टनर से दूर होने पर कुछ लोगों का एक-दूसरे के प्रति विश्वास डगमगाने लगता है. उनके मन में ख्याल आता है कि कहीं वह मुझे धोखा तो नहीं दे रहा है. कहीं उसकी दोस्ती किसी और से तो नहीं हो गई है. इस तरह के नेगेटिव ख्याल मन में आने से मानसिक सेहत प्रभावित होने लगती है. रिश्ते में विश्वास की कमी होने से आपके अंदर डर, चिंता घर करने लगती है. विश्वास की कमी होने से रिश्ते टूट जाते हैं.
बातचीत में कमी: लॉन्ग-डिस्टेंस रिलेशनशिप में एक-दूसरे से बात करने के लिए फोन, मैसेज करना पड़ता है. आप आमने-सामने बैठकर अपने दिल की भावनाओं को शेयर नहीं कर पाते हैं. कई बार ये भी होता है कि व्यस्त होने के कारण कई दिनों तक बात ही ना हो. इससे आपस में कम्यूनिकेशन गैप भी आता है और जरूरत के समय बात ना हो, तो दिल-दिमाग में बेचैनी महसूस होने लगती है. इसलिए पार्टनर को हर दिन मैसेज, फोन कॉल पर बात जरूर करें.
लॉन्ग-डिस्टेंस रिलेशनशिप को कैसे बचाएं?
- एक-दूसरे से दूर होंने पर रिश्ते में विश्वास बनाकर रखें. पार्टनर के साथ ईमानदार रहें, चीटिंग करने न करें.
- अगर एक-दो दिन फोन न भी आए तो पहले कारण को समझने, न कि फोन पर ही चिल्लाना शुरू कर दें.
- पार्टनर की बात को इग्नोर करने से बचें. हर बात को सुनें और उनकी परेशानियों को समझने की कोशिश करें.
- प्यार में फिजिकल इंटिमेसी जरूरी है. लेकिन, संभव न होने पर एक-दूसरे को प्यार भरे मैसेज करें. रोमांटिक बातें करें.
- एक-दूसरे से मिलने का कोई भी मौका न गवाएं. इससे मन में भावना आएगी कि आपको सच में एक-दूसरे से बेहद प्यार है.
- छोटी-मोटी बातों पर लड़ाई करने से बचें. फोन क्यों नहीं किया, किसके साथ घूम रहे थे आदि शक करने वाली बातें न करें.