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कौन हैं हरिवंश जो कभी थे नीतीश के करीबी, फिर कैसे हो गए ‘बेगाने’, क्या अब अगल-बगल बैठेंगे

Harivansh Rajya Sabha Member of Parliament: हरिवंश को नीतीश कुमार ही राज्यसभा में लेकर आए. एक दौर में दोनों की खूब बनती थी, लेकिन फिर बिगड़ गई.

Written By: JP YADAV
Last Updated: April 10, 2026 11:59:48 IST

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Harivansh Rajya Sabha Member of Parliament : बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार राज्यसभा अकेले नहीं पहुंच रहे बल्कि उनके साथ करीबी हरिवंश की वापसी उच्च सदन में हो रही है. हरिवंश को राष्ट्रपति द्वारा राज्यसभा के लिए नामित किया गया है. इसके बाद बतौर राज्यसभा सांसद उनका यह कार्यकाल अब वर्ष 2032 तक रहेगा. एक दौर में पेशे से पत्रकार रहे नीतीश कुमार के करीबी हरिवंश वर्ष 2018 में उपसभापति बने. इसके बाद से लगातार अपनी जिम्मेदारी का निर्वहन कर रहे हैं. राज्‍यसभा के उपसभापत‍ि हरिवंश एक बार फिर राज्‍यसभा के लिए नामित कर लिए गए हैं. गृह मंत्रालय के गजट में इसका घोषणा भी कर दी गई है.  

गृह मंत्रालय के गजट के अनुसार, एक सांसद की सेवानिवृत्ति‍ के बाद खाली हुई सीट पर राष्‍ट्रपति द्रोपदी मुर्मु ने उन्‍हें राज्यसभा मनोनीत किया है. उनका कार्यकाल 9 अप्रैल, 2026 को ही समाप्‍त हुआ. प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने खासतौर से हरिवंश की तारीफ भी की थी. एक दौर में बिहार के मुख्‍यमंत्री नीतीश कुमार के काफी करीबी रहे हरिवंश वर्ष 2014 में पहली बार राज्‍यसभा सदस्‍य के रूप में चुने गए थे. 

12 साल तक की सेवा

वर्ष 2014 में राज्यसभा में चुने जाने के बाद 9 अगस्‍त, 2018 को हरिवंश राज्‍यसभा के उपसभापत‍ि बनाए गए. इसके बाद 14 सितंबर, 2020 को राज्‍यसभा के उपसभापति‍ निर्वाचित हुए थे. ताजा मनोनीत होने के बाद उनका कार्यकाल 2032 तक रहेगा.

JDU ने नहीं बनाया इस बार उम्मीदवार 

कुछ महीने पहले बिहार की 5 राज्यसभा सीटों के लिए हुए चुनाव में हरिवंश को जनता दल युनाइटेड ने हरिवंश को उम्मीदवार नहीं बनाया था.  इस बार राज्‍यसभा चुनाव के समय उनका नाम उम्‍मीदवारों की सूची में नहीं था. ऐसे में कयास लगाए जा रहे थे कि यह उनका अंत‍िम कार्यकाल होगा, लेकिन अब कयासों पर विराम लग चुका है.

कौन हैं हरवंश 

एक दौर में बिहार के दिग्गज पत्रकार रहे हरिवंश नारायण सिंह दरअसल हरिवंश नाम से चर्चित हैं. उत्‍तर प्रदेश के बलिया में 30 जून, 1956 के जन्‍में  हरिवंश की पढ़ाई की बात करें तो उन्होंने काशी हिंदू विश्‍वविद्यालय से स्‍नातक और पत्रकारिता की पढ़ाई की है.   

सरकारी नौकरी छोड़ बने पत्रकार

हरिवंश ने 1981-84 यानी तीन साल तक हैदराबाद और पटना में बैंक ऑफ इंडिया में नौकरी की. वह चर्चा में ज्यादा तब आए जब विपक्ष के बहिष्कार के बावजूद हरिवंश ने नए संसद भवन के उद्घाटन कार्यक्रम में न सिर्फ हिस्सा लिया बल्कि प्रधानमंत्री की जमकर तारीफ की थी. हरिवंश को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी हरिवंश बाबू भी कहते हैं.

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Written By: JP YADAV
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Harivansh Rajya Sabha Member of Parliament : बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार राज्यसभा अकेले नहीं पहुंच रहे बल्कि उनके साथ करीबी हरिवंश की वापसी उच्च सदन में हो रही है. हरिवंश को राष्ट्रपति द्वारा राज्यसभा के लिए नामित किया गया है. इसके बाद बतौर राज्यसभा सांसद उनका यह कार्यकाल अब वर्ष 2032 तक रहेगा. एक दौर में पेशे से पत्रकार रहे नीतीश कुमार के करीबी हरिवंश वर्ष 2018 में उपसभापति बने. इसके बाद से लगातार अपनी जिम्मेदारी का निर्वहन कर रहे हैं. राज्‍यसभा के उपसभापत‍ि हरिवंश एक बार फिर राज्‍यसभा के लिए नामित कर लिए गए हैं. गृह मंत्रालय के गजट में इसका घोषणा भी कर दी गई है.  

गृह मंत्रालय के गजट के अनुसार, एक सांसद की सेवानिवृत्ति‍ के बाद खाली हुई सीट पर राष्‍ट्रपति द्रोपदी मुर्मु ने उन्‍हें राज्यसभा मनोनीत किया है. उनका कार्यकाल 9 अप्रैल, 2026 को ही समाप्‍त हुआ. प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने खासतौर से हरिवंश की तारीफ भी की थी. एक दौर में बिहार के मुख्‍यमंत्री नीतीश कुमार के काफी करीबी रहे हरिवंश वर्ष 2014 में पहली बार राज्‍यसभा सदस्‍य के रूप में चुने गए थे. 

12 साल तक की सेवा

वर्ष 2014 में राज्यसभा में चुने जाने के बाद 9 अगस्‍त, 2018 को हरिवंश राज्‍यसभा के उपसभापत‍ि बनाए गए. इसके बाद 14 सितंबर, 2020 को राज्‍यसभा के उपसभापति‍ निर्वाचित हुए थे. ताजा मनोनीत होने के बाद उनका कार्यकाल 2032 तक रहेगा.

JDU ने नहीं बनाया इस बार उम्मीदवार 

कुछ महीने पहले बिहार की 5 राज्यसभा सीटों के लिए हुए चुनाव में हरिवंश को जनता दल युनाइटेड ने हरिवंश को उम्मीदवार नहीं बनाया था.  इस बार राज्‍यसभा चुनाव के समय उनका नाम उम्‍मीदवारों की सूची में नहीं था. ऐसे में कयास लगाए जा रहे थे कि यह उनका अंत‍िम कार्यकाल होगा, लेकिन अब कयासों पर विराम लग चुका है.

कौन हैं हरवंश 

एक दौर में बिहार के दिग्गज पत्रकार रहे हरिवंश नारायण सिंह दरअसल हरिवंश नाम से चर्चित हैं. उत्‍तर प्रदेश के बलिया में 30 जून, 1956 के जन्‍में  हरिवंश की पढ़ाई की बात करें तो उन्होंने काशी हिंदू विश्‍वविद्यालय से स्‍नातक और पत्रकारिता की पढ़ाई की है.   

सरकारी नौकरी छोड़ बने पत्रकार

हरिवंश ने 1981-84 यानी तीन साल तक हैदराबाद और पटना में बैंक ऑफ इंडिया में नौकरी की. वह चर्चा में ज्यादा तब आए जब विपक्ष के बहिष्कार के बावजूद हरिवंश ने नए संसद भवन के उद्घाटन कार्यक्रम में न सिर्फ हिस्सा लिया बल्कि प्रधानमंत्री की जमकर तारीफ की थी. हरिवंश को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी हरिवंश बाबू भी कहते हैं.

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