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Kanishka Bisht Chandigarh: चंडीगढ़ में 17 साल की 12वीं क्लास की स्टूडेंट कनिष्का बिष्ट ने उन लोगों के लिए एक मिसाल कायम की है जो छोटी-छोटी मुश्किलों के आगे हार मान लेते हैं. बचपन से दिव्यांग कनिष्का बिष्ट जनवरी 2026 से गंभीर निमोनिया से जूझ रही हैं. इस बीमारी की वजह से वह अभी ऑक्सीजन सपोर्ट पर हैं. इसके बावजूद, वह आज डॉक्टरों की देखरेख में एम्बुलेंस से चंडीगढ़ के मनीमाजरा में एग्जाम सेंटर पर अपनी 12वीं क्लास की परीक्षा देने पहुंचीं.
कैसे पहुंची कनिष्का एग्जाम हॉल?
स्ट्रेचर पर लेटे हुए, डॉक्टर उन्हें एग्जाम सेंटर तक ले गए. कनिष्का ने ऑक्सीजन सपोर्ट पर होने के बावजूद परीक्षा दी. वह पिछले 13 दिनों से ICU में हैं और दस दिनों से वेंटिलेटर पर बेहोश थीं. डॉक्टरों ने तीन दिन पहले कनिष्का का वेंटिलेटर हटा दिया था, लेकिन उन्हें ऑब्जर्वेशन में रखा था. ऑक्सीजन सपोर्ट और स्ट्रेचर पर होने के बावजूद, कनिष्का ने परीक्षा दी.
एक घंटा एक्स्ट्रा मिला
कनिष्का के पिता ने बताया कि वे चंडीगढ़ के सेक्टर 7 में अपने परिवार के साथ रहते हैं. बचपन से दिव्यांग कनिष्का के लिए इस साल निमोनिया एक बड़ी चुनौती बन गया था. मेडिकल रिपोर्ट के आधार पर, CBSE बोर्ड ने कनिष्का को उसके एग्जाम के लिए एक घंटा एक्स्ट्रा दिया. सभी स्टूडेंट्स के एग्जाम दोपहर 1:30 बजे खत्म होने वाले थे, जबकि कनिष्का के एग्जाम दोपहर 2:30 बजे खत्म होने वाले थे.
कनिष्का चंडीगढ़ के सेक्टर 26 के खालसा स्कूल की स्टूडेंट है, जिसका एग्जाम सेंटर मनीमाजरा गवर्नमेंट स्कूल है. सिर्फ खालसा स्कूल ही नहीं, बल्कि मनीमाजरा गवर्नमेंट स्कूल के प्रिंसिपल और टीचर्स ने भी कनिष्का की हिम्मत की तारीफ की. उसकी हालत बिगड़ने पर, उसके परिवार और डॉक्टरों ने उसे आराम करने की सलाह दी, लेकिन कनिष्का ने अपने पिता से कहा कि यह उसके भविष्य का मामला है और वह एग्जाम देगी चाहे कुछ भी हो जाए. 12वीं क्लास के स्टूडेंट्स का आज फिजिक्स का पेपर था, जबकि एग्जाम 18 फरवरी से शुरू हो गए थे.
पिता को बेटी पर गर्व
कनिष्का के पिता, प्रेम सिंह ने कहा मेरी बेटी किसी भी कीमत पर अपने सभी एग्जाम देना चाहती है, लेकिन हमें उसकी हेल्थ की भी चिंता है. आज, उसे फिजिक्स का पेपर देने के लिए एम्बुलेंस से एग्जाम सेंटर लाया गया. इस दौरान, कनिष्का ने डॉक्टरों की देखरेख में ऑक्सीजन सपोर्ट के साथ एग्जाम दिया. उसे शुरू में सर्दी-खांसी हुई और बाद में निमोनिया का पता चला. जब उसकी हेल्थ में सुधार नहीं हुआ, तो कनिष्का को ICU में भर्ती कराया गया, जहां वह दस दिनों तक बेहोश रही, जो कि एक लंबा दस दिन था. उन्होंने अपनी बेटी की हिम्मत को सलाम किया और उस पर गर्व जताया.