Minor Driving Rules: अक्सर हमारे आस-पास ऐसे मामले सुनने में आते हैं कि किसी के नाबालिक बच्चे ने कार से किसी एक्सीडेंट को अंजाम दिया हो और सजा उसके पिता को हो जाती है. जी हां, ऐसा ज्यादातर उन मामले में होता है, जिनके बच्चे नाबालिक यानि 18 साल से कम के होते हैं. ऐसे बच्चों के माता-पिता को सजा हो जाती है. ऐसा ही एक मामला इन दिनों दिल्ली के द्वारका में देखा जा रहा है, जहां एक 17 साल के नाबालिक ने स्कॉर्पियो कार से एक 23 साल के बच्चे का एक्सीडेंट कर दिया.
क्या आपने ऐसा सोचा है कभी कि नाबालिक बच्चे के जुर्म की सजा आखिर उसके पिता को क्यों मिलती है. अगर नहीं, तो इस लेख को जरूर पढ़ें. इस लेख के माध्यम से हम आपको इसके बारे में विस्तार से बताएंगे.
कानूनी तौर पर पैरेंट्स जिम्मेदार
अगर एक नाबालिक बच्चा किसी का एक्सीडेंट कर दे तो उसके पिता को सजा क्यों होती है इसका जवब धारा 199A में है. इस धारा के तहत अगर नाबालिक बच्चा किसी वाहन से एक्सीडेंट को अंजाम देता है तो ऐसे में वाहन के मालिक या उसके पैरेंट्स पर ही सारी बात आती है. ऐसे में पैरेंट्स या पिता पर आपराधिक धारा इसलिए बनती है क्योंकि नाबालिक को लाइसेंस नहीं दिया जाता है और वह कानूनी तौर पर ड्राइविंग के लिए वैध्य नहीं है. इसलिए यह माना जाता है कि वाहन उसे जानबूझकर दिया गया है. इसलिए उसके पिता पर पुलिस द्वारा कार्रवाही की जाती है.
परिजनों को हो सकती है सजा
नाबालिक द्वारा एक्सीडेंट किए जाने पर उसके पिता को केवल जुर्माना ही नहीं देना पड़ता है, बल्कि जेल तक जाना पड़ सकता है. कानूनी धाराओं और नियमों के तहत नाबालिक को दोषी पाए जाने पर उसके परिजनों को 3 साल तक की जेल भी काटनी पड़ सकती है. केवल यही नहीं जेल जाने के साथ-साथ उसका वाहन जब्त किया जा सकता है और 25000 रुपये का जुर्माना भी लगाया जा सकता है.
नाबालिक पर क्यों नहीं होती कार्रवाही
नाबालिक द्वारा एक्सीडेंट किए जाने पर आमतौर पर उसे हिरासत में लेकर बाल सुधार केंद्र में डाल दिया जाता है. वहीं, ज्यादातर मामलों में नाबालिक पर कार्रवाही इसलिए भी नहीं होती है क्योंकि अधिकांश मामलों में पैरेंट्स यह साबित कर देते हैं कि उनका बच्चा वाहन उनसे बिना पूछे और उनकी गैर मौजूदगी में लेकर गया था.