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Republic Day 2026: क्यों सिख रेजिमेंट गणतंत्र दिवस पर देती है दो बार सलामी? जानें इस ऐतिहासिक परंपरा की कहानी

Sikh Regiment Republic Day parade: परेड के दौरान सिख रेजिमेंट दो बार सैल्यूट क्यों देती है और कैसे 1979 का एक जेस्चर गणतंत्र दिवस की विरासत बन गया? चलिए विस्तार से जानें इस ऐतिहासिक जेस्चर के पीछे की कहानी.

Written By: Shristi S
Last Updated: January 26, 2026 16:12:52 IST

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Sikh Regiment Two Salute Tradition: भारत ने सोमवार को अपना 77वां गणतंत्र दिवस मनाया. जिसमें नई दिल्ली में कर्तव्य पथ पर पारंपरिक परेड हुई. गणतंत्र दिवस परेड के दौरान, सभी मिलिट्री टुकड़ियां विजय चौक से लाल किले तक मार्च करते समय भारत के राष्ट्रपति को सलामी देती हैं. हालांकि, सिख रेजिमेंट एक अनोखी परंपरा का पालन करती है वे दो बार सलामी देते हैं. दूसरी सलामी चांदनी चौक में स्थित गुरुद्वारा सीस गंज साहिब के प्रति सम्मान का प्रतीक है. इसके बदले में, गुरुद्वारे के सेवादार बहादुर सिख सैनिकों पर गुलाब की पंखुड़ियां बरसाते हैं, जिससे आपसी सम्मान का एक दिल को छू लेने वाला नज़ारा बनता है.

कैसे शुरू हुई परंपरा?

आपकी जानकारी के लिए बता दें कि, यह खास परंपरा 24 जनवरी, 1979 से शुरू हुई, जब गणतंत्र दिवस परेड की फुल-ड्रेस रिहर्सल हो रही थी. जैसे ही सिख रेजिमेंट गुरुद्वारा सीस गंज साहिब के पास पहुंची, टुकड़ी के कमांडर कर्नल इंजो गक्खल ने “दाहिने देख” (आँखें दाईं ओर) का आदेश दिया और सलामी देते हुए अपनी तलवार नीचे की. इस हावभाव से गुरुद्वारा प्रबंधन हैरान रह गया, लेकिन वे जल्द ही लाल किले में टुकड़ी के पास पहुंचे और आभार के तौर पर कड़ा प्रसाद और जलपान कराया.

गुलाब की पंखुड़ियों की बारिश 

26 जनवरी, 1979 को, इस परंपरा ने एक यादगार मोड़ लिया. जब सिख रेजिमेंट ने मुख्य परेड के दौरान गुरुद्वारे को सलामी दी, तो गुरुद्वारा प्रबंधन, जो अब तैयार था, ने सत श्री अकाल के गूंजते नारों के बीच मार्च कर रहे सैनिकों पर गुलाब की पंखुड़ियां बरसाईं. दर्शकों की खुशी भरी प्रतिक्रिया ने इसे एक स्थायी परंपरा बना दिया जो आज भी जारी है.

सिख वीरता और भक्ति को श्रद्धांजलि

यह अनोखी दोहरी सलामी न केवल गुरुद्वारा सीस गंज साहिब की पवित्रता का सम्मान करती है, बल्कि सिख सैनिकों और उनके विश्वास के बीच गहरे संबंध को भी दर्शाती है. गुलाब की पंखुड़ियों की बारिश सिख रेजिमेंट को उनकी अद्वितीय बहादुरी और राष्ट्र के प्रति सेवा के लिए दिए गए सामूहिक आभार और आशीर्वाद का प्रतीक है.

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