Wolf Supermoon: 3 जनवरी को पौष पूर्णिमा है और इस दिन वुल्फ सुपरमून दिखाई देगा. इस दौरान चंद्रमा सामान्य पूर्णिमा के चांद से ज्यादा बड़ा और चमकदार दिखेगा. खगोलविदों की मानें, तो जनवरी महीने की पूर्णिमा को वुल्फ मून के नाम से जाना जाता है. ऐसे में लोगों के मन में सवाल होगा कि इसे सिर्फ सुपरमून या पूर्णिमा का चांद कहा जा सकता है, तो आखिर इसे वुल्फ सुपरमून क्यों कहा जाता है? इसके पीछे एक कहानी प्रचलित है. कहा जाता है कि पुराने समय में जब कड़ाके की ठंड पड़ती थी, तब भेड़ियों की आवाज सुनाई देना शुरू हो जाती थी. इसी कारण जनवरी की पूर्णिमा को भेड़िये यानी वुल्फ के नाम पर रख दिया गया. इस दिन चंद्रमा पृथ्वी के सबसे करीब होता है. इसे देखना आकर्षक माना जाता है क्योंकि ये हर महीने के चांद से काफी अलग होता है.
सुपरमून देखने के 6 कारण
- बता दें कि सुपरमून सामान्य पूर्णिमा की तुलना में लगभग 14 फीसदी बड़ा दिखता है, जो बेहद कम देखने को मिलता है. इस दिन चांद बड़ा होने के कारण अनोखा लगता है, इसलिए लोगों को देखने के लिए कहा जाता है.
- जनवरी के महीने में पड़ने वाली पूर्णिमा के दिन चांद सामान्य तुलना से 30 फीसदी तक अधिक चमकदार होता है. इससे चांदनी रात और ज्यादा चांदनी होती है.
- चंद्रमा को इसके बड़े आकार और चमकदार होने के कारण इसकी फोटो अच्छी आती है. इमारतों या पेड़ों के पीछे से निकलता हुआ चांद देखने में अद्भुत लगता है.
- वहीं अगर खगोलीय घटना के अनुसार, पृथ्वी और चंद्रमा के बीच की न्यूनतम दूरी को देखने का एक दुर्लभ अवसर माना जाता है.
- इसे इसलिए भी देखना चाहिए क्योंकि कहा जाता है कि जनवरी की सर्दियों में ठंडी और शुष्क हवा अक्सर आसमान को साफ कर देती है. ऐसे में चंद्रमा के क्रेटर यानी गड्ढे ज्यादा साफ दिखाई देते हैं.
- मान्यता है कि वुल्फ मून नाम अमेरिकी मूल निवासियों से आया है. कहा जाता है कि ये सर्दियों में भूख से गरजते भेड़ियों की आवाज़ से प्रेरित है.
हिंदू धर्म में पौष पूर्णिमा का महत्व
वहीं पूर्णिमा का हिंदू धर्म में विशेष महत्व होता है. इस दिन भगवान भोले शंकर और मां पार्वती की पूजा की जाती है. कहा जाता है कि पूर्णिमा का व्रत करने से भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं. इस साल 3 जनवरी को पौष पूर्णिमा पड़ रही है. मान्यता है कि पौष पूर्णिमा के दिन पवित्र स्नान, दान और भगवान विष्णु व मां लक्ष्मी की पूजा से पापों का नाश होता है.
मान्यता है कि इस दिन पवित्र नदियों, विशेषकर संगम में स्नान करने से सभी पाप धुल जाते हैं. लोगों को मोक्ष की प्राप्ति होती है. मां लक्ष्मी और भगवान विष्णु की पूजा करने से धन-धान्य की कमी पूरी होती है और सुख समृद्धि आती है. मान्यता है कि इस दिन जल में तिल मिलाकर स्नान करने से पितृदोष शांत हो जाते हैं.