Iran: एक तरफ जहां ईरान में हिंसक विरोध प्रर्दशन जारी है. वहीं अमेरिका ने एक बड़ा एलान करके खामेनेई पर दबाव और बढ़ा दिया है. अमेरिका के प्रेसिडेंट डोनाल्ड ट्रंप ने सोमवार को ऐलान किया कि ईरान के साथ बिजनेस करने वाले किसी भी देश पर यूनाइटेड स्टेट्स 25 परसेंट टैरिफ लगाएगा. बता दें कि ईरान में हो रहे विरोध प्रर्दशन में अब तक कम से कम 648 लोगों की मौत हो गई है.
सोशल मीडिया पर किया पोस्ट
अपने ट्रुथ सोशल प्लेटफॉर्म पर एक पोस्ट में ट्रंप ने कहा कि यह टैरिफ इस्लामिक रिपब्लिक के साथ कमर्शियल रिश्ते रखने वाले देशों द्वारा यूनाइटेड स्टेट्स के साथ किए जाने वाले सभी बिज़नेस पर ‘तुरंत लागू’ होगा. चीन, ब्राजील, तुर्की और रूस उन अर्थव्यवस्थाओं में शामिल हैं जो तेहरान के साथ व्यापार करती हैं. प्रेसिडेंट ने ऑर्डर को फाइनल और पक्का बताया, लेकिन यह डिटेल नहीं दिया कि टैरिफ किस लीगल अथॉरिटी के तहत आएंगे और इस मामले पर कोई एग्जीक्यूटिव एक्शन तुरंत व्हाइट हाउस की वेबसाइट पर पोस्ट नहीं किया गया.
US President Donald Trump posts, “Effective immediately, any Country doing business with the Islamic Republic of Iran will pay a Tariff of 25% on any and all business being done with the United States of America. This Order is final and conclusive. Thank you for your attention to… pic.twitter.com/7hcmWX7vmH
— ANI (@ANI) January 12, 2026
इस वजह से लगाया टैरिफ
ट्रंप के मुताबिक US ईरान के ट्रेड पार्टनर्स पर 25 परसेंट टैरिफ लगा रहा है ताकि तेहरान पर उसके हिंसक विरोध प्रदर्शनों के खिलाफ एक्शन लेने का दबाव बनाया जा सके. ईरान में चल रहे विरोध प्रदर्शनों में सैकड़ों लोग मारे गए हैं. US प्रेसिडेंट ने तेहरान को बार-बार मिलिट्री एक्शन की धमकी दी है. हाल ही में ट्रंप ने कहा कि अगर उनके एडमिनिस्ट्रेशन को पता चला कि ईरान सरकार विरोधी प्रदर्शनकारियों के खिलाफ जानलेवा ताकत का इस्तेमाल कर रहा है, तो US हमला करेगा.
टैरिफ कैसे लागू होंगे?
हालांकि ट्रंप ने यह नहीं बताया कि ईरान के साथ बिजनेस करने वाले किसे माना जाएगा. ट्रंप की घोषणा से सवाल उठे हैं कि ये एक्स्ट्रा टैरिफ कैसे काम करेंगे। किन देशों को टारगेट किया जाएगा, और क्या सिर्फ सामान पर ही नहीं, बल्कि सर्विसेज़ पर भी ज़्यादा ड्यूटी लगाई जाएगी? ट्रंप की घोषणा ऐसे समय में आई है जब उन्होंने ईरान में सरकार विरोधी प्रदर्शनकारियों की रक्षा के लिए US मिलिट्री दखल की मांग की है. यह ध्यान दिया जाना चाहिए कि ईरान में फोन और इंटरनेट कनेक्शन बंद हैं.
किस देश पर लगेगा सबसे ज्यादा टैरिफ?
नए टैरिफ का मतलब है कि चीन से आने वाले सामान पर कम से कम 45% टैरिफ रेट लग सकता है. यह टैरिफ पहले से ही 20% है. इसका मतलब है कि पिछला 20% और अभी का 25% मिलाकर 45% हो जाएगा. पिछले साल अमेरिका और चीन के बीच ट्रेड वॉर ने ग्लोबल मार्केट को हिलाकर रख दिया था. ट्रंप ने पिछले साल चीनी सामान पर टैरिफ बढ़ाकर 145% कर दिया था. अभी का टैरिफ रेट काफी बातचीत के बाद तय किया गया था.
चीन के अलावा भारत, UAE और तुर्की भी ईरान के बड़े ट्रेड पार्टनर माने जाते हैं. ट्रंप ने रूस से तेल खरीदने वाले देश को सज़ा देने के लिए भारत से आने वाले सामान पर ड्यूटी दोगुनी करके कम से कम 50% कर दी है. ट्रंप ने चीन समेत रूस से तेल खरीदने वाले दूसरे देशों पर भी ऐसे ही टैरिफ लगाने की धमकी दी है.
भारत पर कितना टैरिफ लगेगा?
ईरान भारत का ट्रेड पार्टनर रहा है इस टैरिफ का असर भारत पर इसका काफी असर पड़ने की संभावना है. यह 25% टैरिफ US के 25% रेसिप्रोकल टैरिफ के अलावा होगा. यानी की भारत के ट्रेड पर कुल टैरिफ 75 फीसदी हो जाएगा.
ईरान से किस चीज का व्यापार करता है भारत?
भारत और ईरान के बीच ट्रेड रिलेशन लंबे समय से अच्छे रहे हैं. तेहरान में इंडियन एम्बेसी के मुताबिक, हाल के सालों में भारत ईरान के टॉप पांच ट्रेडिंग पार्टनर्स में से एक रहा है. भारत ईरान को जो मुख्य चीजे एक्सपोर्ट करता है उनमें बासमती चावल, चाय, चीनी, ताज़े फल, दवाइयां, सॉफ्ट ड्रिंक्स (शरबत को छोड़कर), काजू, मूंगफली, बोनलेस मीट, दालें और दूसरी चीज़ें शामिल हैं. ईरान से भारत के मुख्य इंपोर्ट में मेथनॉल, पेट्रोलियम बिटुमेन (सड़क बनाने का सामान), सेब, लिक्विफाइड प्रोपेन गैस, सूखे खजूर और बादाम शामिल हैं.
भारत और ईरान के बीच व्यापार
फिस्कल ईयर 2022-23 में भारत और ईरान के बीच कुल ट्रेड 2.33 बिलियन डॉलर था. यह पिछले साल के मुकाबले लगभग 22% ज़्यादा था. इस दौरान, भारत ने ईरान को 1.66 बिलियन डॉलर का सामान बेचा और ईरान से 672.12 मिलियन डॉलर का सामान खरीदा. अप्रैल 2023 और जुलाई 2023 के बीच, दोनों देशों के बीच कुल ट्रेड 660.70 मिलियन डॉलर था, जिसमें भारत का एक्सपोर्ट 455.64 मिलियन डॉलर और इंपोर्ट 205.14 मिलियन डॉलर था. हालांकि, पिछले साल इसी समय के मुकाबले, इस दौरान कुल ट्रेड में लगभग 23% की गिरावट आई.