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कौन लेगा खामेनेई की जगह? जानें ईरान में कैसे चुने जाते हैं सुप्रीम लीडर

Iran Supreme Leader: ईरान के मौलवी सिस्टम ने चार दशकों से ज्यादा समय तक देश पर राज किया है. खामेनेई की मौत के बाद यह सवाल बना हुआ है कि इस्लामिक शासन में उनका उत्तराधिकारी कौन होगा.

Written By: Divyanshi Singh
Last Updated: 2026-03-01 08:45:28

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Iran Supreme Leader: ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई अमेरिका और इजराइल के हमले में मारे गए हैं. US प्रेसिडेंट डोनाल्ड ट्रंप ने अपने ट्रुथ सोशल प्लेटफॉर्म पर यह अनाउंस किया. ट्रंप के दावे के बाद रविवार सुबह ईरान की सरकारी मीडिया ने खामेनेई की मौत को कन्फर्म किया. ईरान के सरकारी टीवी ने कहा कि सुप्रीम लीडर खामेनेई शहीद हो गए हैं.

मौलवी होना चाहिए सुप्रीम लीडर

ईरान के मौलवी सिस्टम ने चार दशकों से ज्यादा समय तक देश पर राज किया है. खामेनेई की मौत के बाद, यह सवाल बना हुआ है कि इस्लामिक शासन में उनका उत्तराधिकारी कौन होगा और यह सिस्टम कब तक चलेगा. ईरान के संविधान के अनुसार विलायत-ए-फ़कीह के सिद्धांत के तहत देश का सुप्रीम लीडर एक मौलवी होना चाहिए.

खामेनेई की जगह कौन लेगा?

खामेनेई पर उनके करीबी सलाहकारों का राज रहा है जिन्हें गार्डियन काउंसिल के नाम से जाना जाता है. हालांकि शनिवार के हमलों के बाद यह साफ नहीं है कि उनमें से कितने बचे हैं. 86 साल के खामेनेई ने कभी भी अपने वारिस के नाम का पब्लिक में ऐलान नहीं किया है. अभी यह साफ नहीं है कि अगर उनकी मौत कन्फर्म हो जाती है तो उनकी जगह कौन लेगा. इससे पहले खामेनेई के बेटे, मोजतबा खामेनेई, एक मज़बूत कैंडिडेट थे.

इस्लामिक रिपब्लिक के फाउंडर रूहोल्लाह खुमैनी के पोते हसन खुमैनी और दूसरे मौलवियों का भी नाम दावेदारों के तौर पर लिया गया है. इस बीच रॉयटर्स का दावा है कि खामेनेई की जगह लेने का दावा करने वाले किसी भी व्यक्ति को रिवोल्यूशनरी गार्ड्स और सीनियर मौलवियों की गार्डियन काउंसिल पर कंट्रोल के लिए संघर्ष का सामना करना पड़ सकता है.

कैसे चुना जाता है सुप्रीम लीडर

संविधान के अनुसार खामेनेई के वारिस को वही बॉडी मतलब असेंबली ऑफ लीडरशिप एक्सपर्ट्स चुनेगी जिसने उन्हें चुना था. यह 88 मौलवियों की एक बॉडी है जिसे कागज़ों पर लोग हर आठ साल में एक बार वोट देते हैं लेकिन असल में सिर्फ़ इस्लामिक रिपब्लिक के सबसे वफ़ादार मौलवियों को ही इसके लिए खड़े होने की इजाज़त है. यही वजह है कि मौजूदा असेंबली के ज़्यादातर सदस्य अयातुल्ला खामेनेई जैसे कट्टर मौलवी हैं.

संविधान कहता है कि इन मौलवियों को जल्द से जल्द नए सुप्रीम लीडर को चुनना होगा  लेकिन जब ईरान पर अमेरिका और इजराइल का हमला हो रहा हो तो सुरक्षा कारणों से सभी को जल्दी से इकट्ठा करना मुश्किल हो सकता है.

इस बीच, प्रेसिडेंट ज्यूडिशियरी के हेड और ताकतवर गार्डियन काउंसिल के एक मौलवी सदस्य आमतौर पर लीडर की ज़िम्मेदारियां संभालेंगे.

रेस में आगे चल रहे हैं ये नाम

होज्जत-उल-इस्लाम मोहसेन कोमी: अयातुल्ला अली खामेनेई के करीबी एडवाइजर.

अलीरेज़ा अराफी: एक सीनियर मौलवी. गार्जियन काउंसिल और असेंबली ऑफ़ एक्सपर्ट्स दोनों के सदस्य. वह ईरान के मदरसा सिस्टम को लीड करते हैं.

मोहसेन अराकी: असेंबली ऑफ़ एक्सपर्ट्स के सीनियर सदस्य. उनके नाम पर उत्तराधिकारी के लिए चर्चा हो रही है.

गुलाम हुसैन मोहसेनी एजेई: ईरान की ज्यूडिशियरी के हेड. मुश्किल समय में वह बहुत ज़रूरी हो सकते हैं.

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