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1979 से पहले ईरान में किसका शासन था, खामेनेई के उस्ताद खुमैनी ने कैसे इस्लामिक राष्ट्र बनाया? यहां जानें सबकुछ

Ayatollah Ali Khamenei: ईरान पर इजराइल और अमेरिका के हमलों के बाद ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत हो गई थी. ऐसे में अब सवाल उठता है कि खामेनेई ने 37 वर्षों तक ईरान पर कैसे राज किया? आइए जानते हैं.

Written By: Sohail Rahman
Edited By: Hasnain Alam
Last Updated: 2026-03-02 19:06:51

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Ayatollah Ali Khamenei: ईरान पर इजराइल और अमेरिका के संयुक्त हमलों में ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामनेई की मौत हो गई है. खामनेई की मौत की खबर सामने आने के बाद कुछ लोग जश्न मना रहे थे तो दुनिया भर के देशों में लाखों लोगों का हुजूम सड़क पर उतरकर मातम भी मना रहे थे. अब लोगों के मन में एक ही सवाल उठ रहा है कि क्या ईरान में अब इस्लामिक शासन का अंत हो जाएगा. क्या अब अमेरिका और इजराइल के इशारों पर चलने वाला कोई कठपुतली ईरान की सत्ता संभालेगा. ये तो आने वाले वक्त में ही पता चलेगा.

लेकिन इजराइल और अमेरिका के हमलों (Israel iran us war) के बाद जिस तरह से ईरान लगातार जवाबी कार्रवाई कर रहा है. इससे ये साफ संकेत मिल रहे हैं कि ईरान पीछे हटने वाला नहीं है. खामनेई के बाद उसका चाहने वाला ही ईरान की सत्ता पर काबिज होगा. खामेनेई की मौत के बाद अभी तक तो यहीं संकेत मिल रहा है.

1979 में इस्लामिक क्रांति से पहले ईरान में शाह कैसे शासन चलाते थे?

ईरान में राजशाही राज का 2,500 साल पुराना लंबा इतिहास रहा है. आखिरी शाह मोहम्मद रजा पहलवी पहलवी वंश के मुखिया थे, जो 1925 में सत्ता में आए थे. 1953 में लोकतांत्रिक तरीके से चुने गए प्रधानमंत्री मोहम्मद मोसादेग के कट्टर राष्ट्रवादी और सुधारवादी विचारों के कारण शाह को गद्दी छोड़नी पड़ी. जल्द ही CIA के सपोर्ट वाले तख्तापलट में उन्हें फिर से गद्दी पर बिठा दिया गया.

अपनी सभी राष्ट्रवादी, पश्चिमी समर्थक और मॉडर्नाइज़िंग कोशिशों के बावजूद, शाह एक विदेशी ताकत की मदद से गद्दी पर वापस आने की बेइज्जती से उबर नहीं पाए. शाह के धार्मिक और राजनीतिक विरोधी अयातुल्ला रूहोल्लाह खुमैनी के नेतृत्व वाला शिया मौलवी ग्रुप (रूहानियत) क्रांति को लीड करने में सबसे ज्यादा ऑर्गनाइज़्ड और काबिल साबित हुआ.

अयातुल्ला रूहोल्लाह खुमैनी के नेतृत्व में चले आंदोलन की वजह से राजशाही का अंत हुआ और ईरान को एक मौलवी-प्रधान इस्लामिक रिपब्लिक में बदल दिया गया. जिसका रुख अमेरिका और इजराइल के खिलाफ था.

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खामेनेई ने कैसे किया वर्षों तक शासन

खामेनेई की ताकत का सेंटर इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) था. उन्होंने इसे ईरान की सबसे बड़ी मिलिट्री और इकोनॉमिक ताकत बनाया, जिससे इसे बैलिस्टिक मिसाइल प्रोग्राम और बड़े कमर्शियल फायदों की देखरेख करने का मौका मिला. बदले में यह उनके कंट्रोल का सबसे भरोसेमंद ज़रिया बन गया. बसीज मिलिशिया और इंटेलिजेंस सर्विस को बार-बार विरोध को दबाने के लिए तैनात किया गया. 1999 में स्टूडेंट प्रोटेस्ट को दबा दिया गया. 2009 का ‘ग्रीन मूवमेंट’ जो एक विवादित प्रेसिडेंशियल इलेक्शन के बाद शुरू हुआ था, उसे गिरफ्तारियों और ताकत से दबा दिया गया. 2017 और 2019 में इकोनॉमिक प्रोटेस्ट का भी यही हाल हुआ.

खामेनेई ने इस्लाम का लिया सहारा

खुमैनी ने खामेनेई को अपना उत्तराधिकारी चुना था. जब इनको चुना गया था, तब खामेनेई अयातुल्ला बनने के काबिल भी नहीं थे. इनके लिए संविधान को बदला गया था. अब सवाल आता है कि खामेनेई ने करीब 37 वर्षों तक कैसे राज किया? खामेनेई ने इसके बाद एक लोयल बेस्ट सिस्टम बनाया. जिसको हिलाना किसी के बस की बात नहीं थी. इन्होंने इस्लाम का सहारा लेकर अपने आसपास के लोगों को अपना भरोसेमंद बनाया. खामेनेई ने पहले से ही अपने 3 संभावित उत्तराधिकारी का चयन कर लिया था. जिसमें गुलाम हुसैनी, अली अजगर और हसन खुमैनी का नाम शामिल है.

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