Iran Israel War: ईरान अमेरिका में चल रही जंग के बाद से दुनियाभर में तनाव का माहौल है. इसका सीधा असर कई संसाधनों पर देखने को मिला. इंडिया से लेकर पाक तक हड़कंप मच गया. बता दें कि इस दौरान तेल और गैस की कमी से लेकर भोजन और ज़रूरी चीज़ों की आपूर्ति में रुकावट तक देखने को मिली. सिर्फ यही यही संसाधनों के बाद इसका सीधा असर पर्यावरण पर भी देखने को मिला है. यह संघर्ष पर्यावरण को गंभीर नुकसान पहुँचा रहा है, जिसमें तेल रिफाइनरियों पर हमलों से ज़हरीली गैसों का निकलना, कार्बन उत्सर्जन में बढ़ोतरी, समुद्री प्रदूषण और परमाणु रेडियोधर्मिता से जुड़े संभावित खतरे शामिल हैं.
गोला-बारूद ने बिगाड़ा पर्यावरण
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि युद्ध की वजह से धुंध, “काली बारिश” और ज़हरीले कण वातावरण में फैल गए हैं, जिसकी वजह से कैंसर जैसी बीमारियाँ पैदा हो रही हैं. वहीं मिट्टी और पानी भी दूषित हो रहा है. जानकारी के मुताबिक, पिछले 34 दिनों से, ईरान, इज़राइल और खाड़ी देशों पर रोज़ाना लाखों टन गोला-बारूद बरसाया जा रहा है. इससे हानिकारक ग्रीनहाउस गैसों खास तौर पर कार्बन डाइऑक्साइड (CO2), मीथेन (CH4), नाइट्रस ऑक्साइड (N2O), और फ्लोरीनेटेड गैसों (CFCs, HFCs) के उत्सर्जन में भारी बढ़ोतरी हुई है.
काली बारिश की आशंका
इस जंग के कारण दुनियाभर पर अब एक और मुसीबत टूटने वाली है. बता दें कि पृथ्वी का औसत तापमान 2.3 से 2.5 डिग्री सेल्सियस तक बढ़ सकता है. इससे ग्लोबल वार्मिंग (वैश्विक तापन) बढ़ने की संभावना बढ़ जाती है. इसके अलावा, तेल के कुओं और टैंकरों पर हमलों के कारण ईरान में “काली” और तेज़ाबी बारिश की घटनाएँ भी सामने आई रही हैं.
जानें क्या होती है काली बारिश
क्या आप जानते हैं कि काली बारिश क्या होती है? दरअसल, कच्चे तेल के जलने से कई ऐसे पदार्थ निकलते हैं जो पर्यावरण और इंसानी सेहत, दोनों के लिए काफी खतरनाक होते हैं. इनमें सल्फर डाइऑक्साइड (SO2), कार्बन डाइऑक्साइड (CO2), कार्बन मोनोऑक्साइड (CO), नाइट्रोजन ऑक्साइड (NOx), बेंजीन जैसे ‘वोलाटाइल ऑर्गेनिक कंपाउंड्स’ (VOCs), ‘पॉलीसाइक्लिक एरोमैटिक हाइड्रोकार्बन्स’ (PAHs), हाइड्रोजन सल्फाइड (H2S) और कालिख शामिल हैं. एक बार वातावरण में फैलने के बाद, ये प्रदूषक कुछ रासायनिक क्रियाओं, जैसे कि ऑक्सीकरण से गुज़रते हैं. इस प्रक्रिया के परिणामस्वरूप सल्फ्यूरिक एसिड (H2SO4), नाइट्रिक एसिड (HNO3) और अन्य अम्लीय गैसों का निर्माण होता है. जब ये एसिड ‘ऑर्गेनिक एरोसोल’ के भीतर संघनित (condense) होते हैं, तो बूंदों का निर्माण होता है. ये बूंदें काली दिखाई देती हैं, क्योंकि इनमें कालिख, राख और जैविक पदार्थों के जलने से बचे हुए कण मौजूद होते हैं.
कहां-कहां काली बारिश का असर
आपकी जानकारी के लिए बता दें इस बारिश का असर ईरान के अलावा भारत और पाकिस्तान में भी देखने को मिलेगा, ऐसे में मौसम विभाग ने अलर्ट जारी कर दिया है, आपकी जानकारी के लिए बता दें कि देश के कई हिस्सों में मौसम का मिजाज एक बार फिर बदलने वाला है. शुक्रवार को, भारत और पाकिस्तान के कुछ हिस्सों के ऊपर लगभग 1,000 किलोमीटर तक फैला बादलों का एक घेरा देखा गया. इस नज़ारे को सैटेलाइट तस्वीरों में कैद किया गया. बादलों का यह समूह एक मज़बूत ‘पश्चिमी विक्षोभ’ (Western Disturbance) के आने का संकेत है. जैसे ही यह सिस्टम सक्रिय होगा, भारत के उत्तर-पश्चिमी इलाकों—खास तौर पर जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश, पंजाब, हरियाणा और दिल्ली में भारी बारिश होने की संभावना है. मौसम विभाग के अनुसार, बादलों की एक घनी परत इस समय उत्तर-पश्चिमी भारत और पाकिस्तान के सटे हुए इलाकों को घेरे हुए है.