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Afganistan Earthquake: शाम ढलते ही कांप उठी धरती: 5.7 की तीव्रता वाले शक्तिशाली भूकंप से मचा हड़कंप, दहशत में लोग!

शाम 06:39 बजे कांप उठी धरती! 5.7 की तीव्रता वाले शक्तिशाली भूकंप से इलाके में भारी दहशत. 70KM नीचे हुई इस हलचल ने सबको डरा दिया...

Written By: Shivani Singh
Last Updated: 2026-02-20 20:50:29

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शुक्रवार की शाम अफगानिस्तान में एक बार फिर कुदरत का कहर देखने को मिला, जब हिंदुकुश क्षेत्र में आए 5.7 तीव्रता के शक्तिशाली भूकंप ने लोगों को दहशत में डाल दिया. भारतीय समयानुसार शाम 06:39 बजे आए इस जलजले का केंद्र जमीन से करीब 70 किलोमीटर गहराई में था, जिसके झटके इतने तेज थे कि राजधानी काबुल से लेकर आस पास के इलाकों को हिलाकर रख दिया. लोग डर के मारे घरों से बाहर निकल आए और हर तरफ अफरा-तफरी का माहौल बन गया. फिलहाल इस आपदा से हुए जान-माल के नुकसान की खबर नहीं है, लेकिन इतनी गहराई पर आए भूकंप अक्सर बड़े इलाके को प्रभावित करते हैं.

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जधानी काबुल से लेकर नांगरहार प्रांत तक हिली धरती 

The New Indian Express की एक रिपोर्ट के अनुसार शुक्रवार को पूर्वी अफगानिस्तान में आए शक्तिशाली भूकंप ने राजधानी काबुल से लेकर नांगरहार प्रांत तक सबको हिलाकर रख दिया. US Geological Survey के अनुसार, रिक्टर स्केल पर इसकी तीव्रता 5.8 मापी गई, जिसका केंद्र काबुल से करीब 130 किलोमीटर उत्तर-पूर्व में था. हालांकि, राहत की बात यह है कि फिलहाल किसी के हताहत होने या बड़े नुकसान की तुरंत खबर नहीं मिली है. राजधानी के पश्चिम में स्थित बामियान और वर्दक प्रांतों के निवासियों ने भी बताया कि झटके काफी तेज महसूस किए गए। वैसे अफगानिस्तान के लिए भूकंप कोई नई बात नहीं है, खासकर हिंदुकुश पर्वतमाला वाले इलाकों में, जहाँ यूरेशियन और इंडियन टेक्टोनिक प्लेट्स आपस में टकराती रहती हैं।

अगस्त 2025 में ही आया था खतरनाक भूकंप

यहां का इतिहास डराने वाला रहा है. अभी अगस्त 2025 में ही पूर्व में आए 6.0 तीव्रता के भूकंप ने पहाड़ी गांवों को मलबे में तब्दील कर दिया था, जिसमें 2,200 से अधिक लोगों की जान चली गई थी। इससे पहले 2022 और 2023 में भी हेरात और नांगरहार जैसे इलाकों में आए भूकंपों ने सैकड़ों लोगों की जान ली और हजारों घर उजाड़ दिए।

अफगानिस्तान की सबसे बड़ी चुनौती  यहां का बुनियादी ढांचा है। दशकों की जंग और गरीबी की वजह से ग्रामीण इलाकों में घर बहुत कमजोर बने हुए हैं। साथ ही, ऊबड़-खाबड़ पहाड़ों और खराब संचार नेटवर्क के कारण आपदा के समय दूरदराज के गांवों तक मदद पहुँचाना या नुकसान का सटीक आकलन करना प्रशासन के लिए आज भी एक बड़ी चुनौती बना हुआ है।

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