Study Abroad Dream: विदेश में जाकर पढ़ने का सपना तो हर भारतीय छात्र का है. जानकारी के मुताबिक, हर साल लाखों भारतीय छात्र बेहतर पढ़ाई के साथ-साथ कमाई के लिए विदेश जाकर बस जाते हैं. लेकिन, इस बात से बेहद ही अंजान की विदेश में जाकर पढ़ाई करना कितना ज्यादा मुश्किल होता है. तो वहीं, सोशल मीडिया की खूबसूरत तस्वीरों की चमक के पीछे एक ऐसी कड़वी सच्चाई है, जिससे आपका सामना एयरपोर्ट पर उतरते ही होता है. दरअसल, यह सफर जितना रोमांचक है, उससे कहीं ज्यादा मानसिक और आर्थिक रूप से परेशान करने वाला भी है.
मौसम की मार से कैसे बच सकेंगे आप?
भारत के गर्म या फिर सामान्य मौसम में रहने वाले छात्रों के लिए कनाडा, उत्तरी यूरोप या फिर ब्रिटेन की ठंड एक बड़ा ‘वेदर शॉक’ देती है. जबिक, हकीकत यह है कि जब तापमान -20 डिग्री तक गिरता है और हफ्तों तक सूरज के दर्शन नहीं होते हैं, तो हमारे शरीर में विटामिन-D की कमी और ‘सीजनल अफेक्टिव डिसऑर्डर’ (SAD) जैसी गंभीर समस्याएं देखने को मिलती है. लेकिन, जब उसी बर्फ में पैदल चलकर आपको कॉलेज .ा फिर अपने दफत्तर जाने पड़े तो यह संघर्ष के रूप में देखने को मिलता है.
हर डॉलर की कीमत को चुकाना है मुश्किल
भारत छोड़कर विदेश में रहने वालों का यह सपना होता है कि पार्ट-टाइम नौकरी करके पढ़ाई का खर्च निकाल लेंगे, लेकिन हकीकत में यह एक जीतना दिखने में आसान लगता है उतना ज्यादा मुश्किल. ट्यूशन फीस के अलावा कमरे का किराया, ग्रोसरी और बिजली के बिल इतने ज्यादा होते हैं कि छात्र ज्यादातर ‘सर्वाइवल मोड’ में आ जाते हैं.
तो वहीं, दूसरी तरफ गैस स्टेशनों पर काम करना, बर्तन धोना या फिर घंटों खड़े रहकर सिक्योरिटी की नौकरी करना, भारत के ‘मिडिल क्लास’ घरों से आए बच्चों के लिए शारीरिक और मानसिक रूप से बेहद ही थकाने वाला और परेशान करने वाला होता है. इसके साथ ही ज्यादातर छात्र पैसे बचाने के चक्कर में पौष्टिक भोजन का त्याग कर देते हैं, जिससे उनकी सेहत पर बुरा असर देखने को मिलता है.
नए कल्चर में ढलने में होती है बड़ी परेशानी
और आखिरी में यह सच जो कोई नहीं बताता है. विदेश जाने का सबसे बड़ा सच ‘आइसोलेशन’ है. नए कल्चर में ढलना इतना ज्यादा आसान नहीं होता है, जितना हिंदी फिल्मों में दिखाया जाता है. भाषा के साथ-साथ सांस्कृतिक अंतर होने की वजह विदेशी नागरिकों से बात करने में कई परेशानियों का सामना करना पड़ता है. इसके अलावा, एजेंट आपको पीआर (PR) और हाई सैलरी की बातें तो बताते हैं, लेकिन उस मानसिक तनाव के बारे में आपसे बात छुपाई जाती है.